PATNA (RAJESH THAKUR) : माॅनसून की तरह सियासी मौसम भी अब रंग दिखाने लगा है। अब तक का जो पाॅलिटिकल सिनेरियो है, उससे साफ लग रहा है कि मिशन 2024 की लड़ाई नरेंद्र मोदी बनाम नीतीश कुमार की होने वाली है। महागठबंधन की ओर से पीएम पद का दूल्हा कौन होगा, अभी से नहीं कहा जा सकता है। जेडीयू का कहना है कि पहले पीएम पद की रिक्ति, फिर होगी नियुक्ति। लेकिन, बीजेपी की ओर से तो दूल्हा तय है। इस पद के लिए नरेंद्र मोदी का नाम तय है। बीजेपी उन्हें लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश में जुट गयी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार बिहार के दौरे पर आ रहे हैं। मोदी सरकार के पूरे हुए नौ वर्ष के शासन को बिहार के चप्पे-चप्पे में पाॅलिटिकल इवेंट के रूप में मनाया जा रहा है। पार्टी की ओर से बूथ तक को मजबूत करने की रणनीति शुरू कर दी गयी है। इसे देखते हुए पाॅलिटिकल एक्सपर्ट कह रहे हैं कि महागठबंधन अभी अपने दलों को एकजुट करने में ही जुटा हुआ है, जबकि बीजेपी बूथे-बूथ पहुंच गयी है।

दरअसल, नीतीश कुमार की पहल पर 23 जून को पटना में 15 राजनीतिक दलों की बैठक हुई थी। इसमें कई मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हुए थे। वहीं इस बैठक में न तो नीतीश कुमार के नाम पर यूपीए के संयोजक बनने की मुहर लगी और न ही सीटों को लेकर कोई बात हुई। अलबत्ता, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुंह फुलाकर बिना प्रेस को संबोधित किए हुए ही दिल्ली लौट गए। इसे लेकर मीडिया में भी खूब बहसें हो रही हैं। केजरीवाल को लेकर नेताओं के बीच बयानबाजी भी खूब हो रही है। वहीं इसे लेकर बीजेपी भी जबर्दस्त ढंग से चुटकी ले रही है। बीजेपी के बड़े-बड़े नेता ताना भी कस रहे हैं। नीतीश कुमार भी उतने ही कड़े अंदाज से बीजेपी वाले कमेंट कर रहे हैं। लेकिन, इन कमेंट के बीच बीजेपी की ठोस रणनीति भी दिखने लगी है। वे बूथों को मजबूत करने में जुट गयी है और इसकी कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभाले हुए हैं। और इसे पाॅलिटिकल एक्सपर्ट भी मान रहे हैं।

दरअसल, नीतीश कुमार की पहल पर 23 जून को पटना में 15 राजनीतिक दलों की बैठक हुई थी। इसमें कई मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हुए थे। वहीं इस बैठक में न तो नीतीश कुमार के नाम पर यूपीए के संयोजक बनने की मुहर लगी और न ही सीटों को लेकर कोई बात हुई। अलबत्ता, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुंह फुलाकर बिना प्रेस को संबोधित किए हुए ही दिल्ली लौट गए।

दरअसल, पिछले माह की 27 तारीख को बीजेपी की ओर से देशभर में बड़ा इवेंट किया गया। यह इवेंट डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर आयोजित किया गया। इसे राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का नाम था ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’। इसमें पीएम मोदी ने न केवल कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और बूथ मजबूती के टिप्स दिए, बल्कि ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे बूथ प्रभारियों से बातें भी की। उन्होंने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के कार्यकर्ताओं से सवाल किए, उनके फीडबैक लिये और उन्हें चुनावी टिप्स भी दिए। उन्हें वोटरों को मोटिवेट करने के लिए वैसी-वैसी बातें बतायी, यदि सही मायने में उस पर अमल किया जाए तो फिर क्या कहने। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने ऐसे-ऐसे टिप्स दिए हैं, जिनका फायदा चाहे तो विरोधी दल भी ले सकते हैं।

दरअसल, मेरा बूथ सबसे मजबूत कार्यक्रम को भोपाल से लाइव किया गया था। मध्य प्रदेश में जल्द ही विधानसभा चुनाव होना है, वहीं लोकसभा चुनाव भी मुंह पर आ गया है। ऐसे में भोपाल से कार्यक्रम संबोधित कर मोदी ने एकसूत्र में पूरे देश को बांध दिया और विरोधियों के खिलाफ काफी गुस्से का भी इजहार किया। उन्होंने विरोधियों पर बरस कर अपने कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं तक को रिचार्ज कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस, राजद, सपा, डीमएके, एनसीपी आदि को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि विरोधियों की घोटाला और भ्रष्टाचार की गारंटी है तो मोदी की भी एक बड़ी गारंटी है। उन्होंने सीना ठोकते हुए कहा कि वे जब तक हैं विरोधियों को नहीं छोड़ने वाले हैं। उन्होंने एक तरफ से लगभग सभी नेताओं का नाम लिया। उन्होंने लालू यादव, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, एम के स्टालिन, शरद पवार तक का नाम गिनाया और उनके भ्रष्टाचार के आंकड़े भी गिनाये। कहा कि यदि चाहते हैं भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के परिवार बढ़े तो आप उन्हें वोट दीजिए। लेकिन यदि आप चाहते हैं कि आपका परिवार बढ़े, आपके बेटे-बेटी, नाती-पोते, पोतियां आगे बढ़े तो बीजेपी को वोट दीजिए।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट भी मानते हैं कि आज भी पीएम मोदी की रणनीतियों का कोई जोड़ नहीं है। यदि महागठबंधन को इनसे टकराना है तो उनके घटक दलों को इसी रणनीति के तहत आगे बढ़ना होगा। इतना ही नहीं, बेंगलुरु में होने वाली बैठक में भी महागठबंधन के नेताओं को चाहिए कि वह मिशन 2024 का फाइनल रोड मैप तैयार कर ले ।

बिहार, झारखंड, उत्तराखंड समेत मध्य प्रदेश के दुरूह क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछे। किसी ने बूथों पर काम करने के टिप्स पूछ रहे थे तो किसी ने सरकारी विकास योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने की जानकारी मांग रहे थे। पीएम मोदी ने हर सवाल का जवाब काफी सलीके और सहज अंदाज में दिया। उन्होंने अपने जवाब से उन नेताओं को भी मैसेज दिया जो छोटे कार्यकर्ताओं के सवाल पर कभी-कभी खिसिया जाते हैं। उन्होंने मुफ्त अनाज योजना से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना तक के बारे में बताया और कहा कि जिनके घर पक्के के हो गए हैं, उन्हें केंद्र सरकार की ‘मुद्रा योजना’ के बारे में जानकारी दें और उन्हें लाभ दिलाने की कोशिश करें।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट भी मानते हैं कि आज भी पीएम मोदी की रणनीतियों का कोई जोड़ नहीं है। यदि महागठबंधन को इनसे टकराना है तो उनके घटक दलों को इसी रणनीति के तहत आगे बढ़ना होगा। इतना ही नहीं, बेंगलुरु में होने वाली बैठक में भी महागठबंधन के नेताओं को चाहिए कि वह मिशन 2024 का फाइनल रोड मैप तैयार कर ले, क्योंकि बीजेपी सालोंभर चुनाव लड़ती है और हर पल चुनावी मोड में रहती है। वहां केवल और केवल रणनीति पर काम होता है। बहरहाल, मेरा बूथ सबसे मजबूत कार्यक्रम में पीएम मोदी के अटैकिंग मोड को देखकर बेशक महागठबंधन के नेता भी सकते में आ गए होंगे। नीतीश कुमार का जदयू के विधायकों और सांसदों से मिलना भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

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