Mukhiyajee Reporter | Patna
शारदीय नवरात्र इस बार 11 अक्टूबर (रविवार) से प्रतिपदा के साथ शुरू होगा। बिहार के ख्यातिलब्ध वेदाचार्य एवं ज्योतिष दैवज्ञ आचार्य ब्रजेश मिश्र ने विक्रम संवत 2083, शाके 1948 और ईस्वी सन 2026 के आधार पर नवरात्र का पूरा विमर्श जारी किया है। उनके अनुसार इस बार मां भगवती का आगमन गज यानी हाथी पर हो रहा है, जो जल प्रदान करने वाला माना गया है। इसका फल यह बताया गया है कि वर्षा अच्छी होगी और कई जगह जलप्लावन की स्थिति बन सकती है।



आचार्य मिश्र ने बताया कि 11 अक्टूबर को प्रतिपदा के दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान आरंभ होगा। इसके बाद 16 अक्टूबर (शुक्रवार) को षष्ठी तिथि पर बिल्वाभिमंत्रण और गज पूजा की जाएगी। 17 अक्टूबर (शनिवार) को सप्तमी पर नवपत्रिका प्रवेश, सरस्वती पूजन और रात्रि पूजन होगा। इस दिन मूल नक्षत्र का समय सुबह 09:10 बजे बताया गया है। 18 अक्टूबर (रविवार) को अष्टमी तिथि रहेगी। इस दिन महाष्टमी व्रत, महानिशा पूजा, रात्रि जागरण, सरस्वती आवाहन, रात्रि में अष्टमी पूजन और बलिदान का विधान है। आचार्य के अनुसार अष्टमी की वृद्धि तिथि होने से 19 अक्टूबर (सोमवार) को भी अष्टमी रहेगी। इसी दिन संधि पूजन होगा, जिसका 48 मिनट का विशेष मुहूर्त सुबह 07:39 बजे से 08:28 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर (मंगलवार) को महानवमी पर त्रिशूलिनी पूजा, नवमी व्रत, कन्या भोजन, बटुक भोजन और नवमी पर्यंत बलिदान एवं हवन किया जाएगा। 21 अक्टूबर (बुधवार) को विजयादशमी पर अपराजिता पूजन और देवी विसर्जन होगा।
उन्होंने बताया कि देवी का गमन भी गज वाहन से होगा, जिसे शुभ दृष्टि वाला माना गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंचांगों में मतभेद के कारण तिथियों में अंतर दिखता है। बंगला पंचांग के अनुसार सप्तमी दो दिन होगी। वाराणसी आदि क्षेत्रों में 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनायी जाएगी, जबकि मिथिला पंचांग के अनुसार अपने क्षेत्र में विजयादशमी 21 अक्टूबर को होगी। उन्होंने श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। नवरात्र में देवी की उपासना का मूल भाव इस श्लोक में समाया है:
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
भावार्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, उन्हें बार-बार नमन है।





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