PATNA (MR) : बिहार में आखिर एक अरसे बाद ‘मुखिया राज’ खत्म हुआ। 16 जून से त्रिस्तरीय पंचायती व्यवस्था अब परामर्शी समिति के हवाले चली जाएगी। इस पर मंगलवार (8 जून) को हुई कैबिनेट मीटिंग में भी मुहर लग गयी। हालांकि पंचायती जनप्रतिनिधियों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं की गयी है। उन्हें पूर्व की तरह वेतन मिलते रहेंगे। अधिकार कायम रहेगा। MLC Election के लिए वे वोट भी करेंगे। बस केवल नाम हो गया है परामर्शी समिति। 

इस बाबत बिहार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मुखिया, सरपंच, प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष ही परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे। राज्य में वर्ष 2016 में गठित त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाएं और ग्राम कचहरियां 15 जून के बाद भंग हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद भी पंचायत और ग्राम कचहरी के निर्वाचित प्रतिनिधि पूर्व की तरह काम करेंगे, पर इनका पदनाम बदल जाएगा। 16 जून से ये सभी प्रतिनिधि बतौर परामर्शी समिति अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य के रूप में काम करेंगे। इसको लेकर पंचायती राज विभाग ने परामर्शी समिति के गठन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। 

पंचायती राज मंत्री ने यह भी बताया कि 16 जून से मुखिया संबंधित ग्राम पंचायत की परामर्शी समिति के अध्यक्ष कहलाएंगे। उपमुखिया उपाध्यक्ष एवं ग्राम के वार्ड मेंबर, सदस्य कहलाएंगे। सरपंच संबंधित ग्राम कचहरी की परामर्शी समिति के अध्यक्ष कहलायेंगे। उपसरपंच उपाध्यक्ष एवं पंच सदस्य कहलाएंगे। पंचायत समिति प्रमुख, संबंधित पंचायत समिति की परामर्शी समिति के अध्यक्ष कहलाएंगे। उपप्रमुख उपाध्यक्ष एवं पंचायत समिति सदस्य, सदस्य कहलायेंगे। 

इतना ही नहीं, पंचायत समिति के सभी कार्यक्षेत्र के विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा एवं राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य भी समिति के सदस्य होंगे। समिति के कार्यक्षेत्र के सभी ग्राम पंचायतों के परामर्शी के अध्यक्ष भी इसके सदस्य होंगे। जिला परिषद अध्यक्ष, संबंधित जिला परिषद के परामर्शी समिति के अध्यक्ष कहलायेंगे। जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं जिला परिषद का सदस्य, सदस्य कहलाएंगे। इसके अलावा जिला परिषद के कार्यक्षेत्र के विधानसभा, विधानपरिषद, लोकसभा एवं राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य भी परामर्शी समिति के सदस्य होंगे। जिला परिषद के कार्यक्षेत्र के सभी पंचायत समिति के परामर्शी समिति के अध्यक्ष भी इसके सदस्य होंगे। कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका प्रखंड विकास पदाधिकारी की होंगी। 

मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि खास बात यह है कि इस दौरान निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के वेतन एवं भत्ता भी मिलता रहेगा। यह व्यवस्था आगामी चुनाव के बाद त्रिस्तरीय पंचायत के गठन तक जारी रहेगी। गौरतलब है कि मंगलवार की देर शाम नीतीश कैबिनेट की आवश्यक मीटिंग हुई। इसमें 10 एजेंडों पर मुहर लगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा परामर्शी समिति के गठन का ही मामला था।

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