DELHI (APP) : जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud)। भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) बन गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) ने राष्ट्रपति भवन में जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ को भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ दिलाई। ये अपने कई बड़े फैसले के लिए जाने जाते हैं। एक बार तो इन्होंने अपने पिता के फैसले को भी पलट दिया था। सबसे अधिक चर्चा इनके शपथग्रहण समारोह को लेकर है। इन्होंने 9 नवंबर 2022 को CJI पद की शपथ ली थी, लेकिन इनके शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं हो पाए थे। इसे लेकर चर्चाएं भी खूब हुई हैं। ऐसे में हम 5 प्रमुख बातों में यह बताएंगे कि देश के नए CJI डी वाई चंद्रचूड़ कौन हैं। कैसा है उनका सफर और कब तक है उनका कार्यकाल। 

फोटो गूगल से साभार।

धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ है पूरा नाम : जब तत्कालीन CJI यू यू ललित (UU Lalit) रिटायर होने वाले थे तो इन्होंने इनके नाम की सिफारिश की थी। देश के नए CJI का पूरा नाम धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ है और ये पुणे रहने वाले हैं। इनके दादा विष्णु बी चंद्रचूड़ ने सावंतवाड़ी रियासत के दीवान के रूप में काम कर चुके हैं, जबकि पिता वाई वी चंद्रचूड़ भी भारत के 13वें मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। डी वाई चंद्रचूड़ ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज और लॉ डिपार्टमेंट से पढ़ाई की। इसके बाद इन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का रुख किया, जहां से 1983 में LLM की डिग्री ली। 1986 में Juridical Sciences में डॉक्टरेट की उपाधि लेने के बाद इन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में एक वकील के रूप में प्रैक्टिस की। फिर इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सफलता की सीढ़ी चढ़ते चले गए। 

फोटो गूगल से साभार।

जन्म 11 नवंबर 1959 को लिये हैं : डी वाई चंद्रचूड़ का जन्म 11 नवंबर 1959 को हुआ है और इनका कार्यकाल 10 नवंबर 2024 है। ये 2013 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे। यंग होने की वजह से तब देशभर के लोगों का ध्यान इनकी ओर गया था। इसके बाद इन्होंने 1998 से 2000 तक भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी कार्य किया। 29 मार्च, 2000 को इन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट के भी ये सबसे यंग जज थे। इसी तरह, 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

राम मंदिर और ज्ञानवापी केस की सुनवाई में भी रहे हैं डी वाई चंद्रचूड़

विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं ये : कानूनी पेशे के अलावा डी वाई चंद्रचूड़ कई जगह विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी में संवैधानिक कानून के विजिटिंग प्रोफेसर रहे चंद्रचूड़ USA में भी विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर काम चुके हैं। इसी तरह, इन्होंने ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल, येल लॉ स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटरसैंड, दक्षिण अफ्रीका में भी कई बार क्लास दी है। ये संयुक्त राष्ट्र उच्चायोग, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक सहित संयुक्त राष्ट्र के कई निकायों की ओर से आयोजित सम्मेलन में शामिल हुए हैं। इन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल, यूएसए से LLM की डिग्री और न्यायिक विज्ञान (SJD) में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है। इसके साथ ही इन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज, नई दिल्ली से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स की पढ़ाई की है। वहीं, कैंपस लॉ सेंटर से LLB की भी डिग्री ली है। 

फोटो गूगल से साभार।

कलम से लिखे हैं कई अहम फैसले :  D Y चंद्रचूड़ ने अपनी कलम से कई अहम फैसले भी लिखे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अहम फैसलों की बात करें तो हाल ही में आए अविवाहिता को गर्भपात देने के हक के फैसले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी थे। इसके अलावा ट्विन टावर गिराने के फैसले में भी चंद्रचूड़ की बेंच ने सुनवाई की थी। इसी तरह, ये राम मंदिर और ज्ञानवापी केस की सुनवाई में भी रहे हैं। इन्होंने अबतक के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले लिये हैं। अयोध्या भूमि विवाद, आईपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के अलावा ये आधार योजना की वैधता से जुड़े मामले, सबरीमाला मुद्दा, सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने, भारतीय नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला करने वाली पीठ का भी हिस्सा रहे हैं। 

फोटो गूगल से साभार।

पिता के फैसले को भी पलटा : असहमति को लोकतंत्र के सेफ्टी वाल्व’ के रूप में देखने वाले जस्टिस चंद्रचूड़ कई संविधान पीठ और ऐतिहासिक फैसले देने वाली उच्चतम न्यायालय की पीठों का हिस्सा रहे हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने व्यभिचार और निजता के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने पिता वाई. वी. चंद्रचूड़ के फैसले को पलटने में कोई संकोच नहीं किया। दरअसल, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने 1976 के ADM जबलपुर केस में पूर्व चीफ जस्टिस और अपने पिता वी वाई चंद्रचूड का फैसला पलट दिया था। इन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट के अपने फैसले में कहा कि निजता का अधिकार संविधान का अभिन्‍न हिस्‍सा है। इन्‍होंने पूर्व CJI के फैसले को गलत बताया, जिसे तत्‍कालीन चीफ जस्टिस जे एस खेलकर, जस्टिस आर के अग्रवाल और जस्टिस एस ए नज़ीर का समर्थन भी मिला। बता दें कि तत्कालीन CJI U U Lalit का विदाई समारोह चल रहा था, तब D Y चंद्रचूड़ ने उन्हें आश्वासन दिया कि सर्वोच्च अदालत में उन्होंने जिन सुधारों पर काम किया, उन्हें लेकर निरंतरता बनी रहेगी। इतना ही नहीं, चीफ जस्टिस का पद संभालने के 24 घंटे बाद ही CJI डी. वाई. चंद्रचूड़ ने सिस्टम में सुधार शुरू कर दिया। शपथ लेने के दूसरे ही दिन इन्होंने केस की सुनवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि उन्होंने नए मामलों के पीठों के समक्ष सुनवाई के लिए स्वत: सूचीबद्ध होने को लेकर रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद से नए मामले स्वत: सूचीबद्ध होंगे। 

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