PATNA (APP) : IPL-2023 के फाइनल में माही की टीम जीत गयी। अंतिम बॉल तक रोमांच रहा। चेन्नई सुपर किंग ने गुजरात टाइटन्स को पराजित कर दिया। रविंद्र जडेजा ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना महेंद्र सिंह धोनी ने भी नहीं की थी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में गुजरात को चेन्नई ने 5 विकेट से हरा दिया। आखिरी ओवर में चेन्नई को जीत के लिए 13 रन चाहिए थे। पहली चार गेंदों पर तीन रन आए। इसके बाद आखिरी दो गेंदों पर जडेजा ने छक्का और चौका लगाकर पासा ही पलट दिया। और यही वजह रही कि जब रविंद्र जडेजा ने विनिंग स्ट्रोक लगाया तो माही की आखें डबडबा गयीं। इस पल को कैमरे ने कैद किया। वरीय पत्रकार मंजीत ठाकुर ने भी इस सुखद पल को अपनी लेखनी से यादगार बना दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बिंदास अंदाज में लिखा है- यार! धोनी भी इमोशनल होते हैं… यहां उनका पूरा रिपोर्ताज पढ़ सकते हैं। इसे उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लिया गया है और इसमें उनके निजी विचार हैं…

म बचपन से इस गलतबयानी पर यकीन करते आए हैं कि भावुकता कमजोरी की निशानी है। पराजय के बाद गुस्से से बल्ला पटकना और जीत के बाद हवा में मुट्ठियां लहराना, हल्के-फुल्के खिलाड़ियों के लक्षण हैं, लेकिन महेंद्र सिंह धोनी के नहीं। लेकिन, आइपीएल के फाइनल में जीत का मौका ऐसा आया कि धोनी भी जज्बाती हो उठे। आखिरी दो गेंदों में 10 रन चाहिए थे और जडेजा ने वह असंभव कर दिखाया। इस जीत के बाद धोनी ने जडेजा को गले से लगाया और फिर गोद में उठा लिया। कैमरा जूम होकर जब धोनी के चेहरे पर फिक्स हुआ तो पता चला कि धोनी की आंखें नम हैं। यह दुर्लभ क्षण था।

जीत के बाद भी सामान्य बने रहने में धोनी को अगर कोई टक्कर दे सकता है तो वह इकलौता भारतीय है अभिनव बिंद्रा। क्रिकेट में शांत बने रहने की जरूरत नहीं होती, उसके बावजूद धोनी ने अपने धैर्य से अपनी शख्सियत को और आभा ही बख्शी है। जडेजा को गले से लगाने के बाद क्षणांश के लिए भावुक हुए धोनी एक बार फिर से अपने मूल अवस्था में लौट आए और ट्रॉफी लेने के लिए जडेजा और रायुडू को आगे भेज दिया। सेनानायक ने एक बार फिर जीत के बाद खुद नेपथ्य में रहना चुना। उस्ताद रणनीतिकार ने जीत का श्रेय एक बार फिर हरावल दस्ते को दे दिया। यह एक परिपक्व और स्थिर मस्तिष्क का संकेत है, जो इस बात को समझता है कि कामयाबी कोई एक बार में बहक जाने वाली चीज नहीं, इसे लगातार बनाए रखना पड़ता है। ऐसे लोग अतिउत्साहित नहीं होते। वे अपनी खुशी को अपने तक रखते हैंं। इस तरह औसत लोगों से ज्यादा उपलब्धियां हासिल करते हैं। उन्होंने हमेशा आलोचकों का मुंह बंद किया है और सीनियर खिलाड़ियों से अपनी बात मनवाई है। उन्होंने छोटे शहरों की एक समूची पीढ़ी के लिए प्रेरणा का काम किया है। धोनी की कहानी शब्दों में बयां करना आसान नहीं। उनकी पारी अब भी जारी है। (उन्होंने कल कहा भी)

पहले एक किस्सा। बात थोड़ी पुरानी है। एक दफा धोनी नए खिलाड़ियों को क्रिकेट प्रशिक्षक एमपी सिंह से बल्लेबाजी के गुर सीखता देख रहे थे। बता रहे थे कि कैसे बैकलिफ्ट, पैरों का इस्तेमाल और डिफेंस करना है। सत्र के बाद उन्होंने क्रिकेट प्रशिक्षक एमपी सिंह से कहा कि वे दोबारा उन्हें वह सब सिखाएं। सिंह अकचका गए। उन्होंने कहा, ‘तुम इंडिया के खिलाड़ी हो, शतक मार चुके हो और ये सब अब सीखना चाहते हो? धोनी ने सहजता से कहा, ‘सीखना जरूरी है, कभी भी हो.’ जाहिर है, खेल धोनी के स्वभाव में है और क्रिकेट उनके लिए पैदाइशी बात है। फिल्म धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी का वह दृश्य याद करिए, जब अपनी मोटरसाइकिलों की देख-रेख करते वक्त धोनी वह चीज हासिल कर लेते हैं, जो उनको कामयाब होने से रोक रही थी। धोनी रक्षात्मक खेल के लिए नहीं बने हैं। यही बात फिल्म में भी उनसे कही गई थी, और यही बात शायद धोनी ने इस बार समझ भी ली, पर इस दफा तरीका अलहदा रहा।

बढ़ती उम्र का तकाजा था कि उन्हें अपनी टाइमिंग पर काम करने की जरूरत थी। धोनी ने अपने बल्लों (वह अमूमन अपनी पारियों में दो वजन के अलग-अलग बल्लों का इस्तेमाल करते हैं) के वजन को कम कर लिया। इसी से उनकी टाइमिंग बेहतर हो गई। और, शायद इस वजह से धोनी इस बार के आइपीएल में वही शॉटस लगा पाए हैं, जिसके मुरीद हम सभी रहे हैं। आपको 2004 के अप्रैल में पाकिस्तान के खिलाफ विशाखपट्नम के मैच की याद है? नवागंतुक और कंधे तक लंबे बालों वाले विकेट कीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने पाकिस्तानियों को वॉशिंग पाउडर से धोया और 123 गेंदों में 148 रन कूट दिए थे। फिर तो आपको 2005 के अक्टूबर में जयपुर वनडे की भी याद होगी, जब श्रीलंका के खिलाफ धोनी ने 145 गेंदों में नाबाद 183 रन बनाए थे। पाकिस्तान के खिलाफ 2006 की फरवरी में लाहौर में नाबाद 72 रन की पारी हो, या फिर कराची में 56 गेंदों में नाबाद 77 रन। यहां तक कि 2011 विश्व कप फाइनल में भी आखिरी छक्का उड़ाते धोनी का भावहीन चेहरा आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ला देता होगा।

इस बार के आइपीएल में महेंद्र सिंह धोनी भले ही कम गेंदें खेलने के लिए आते थे। कभी-कभी तो महज दो गेंद, लेकिन वह अपने पुराने अवतार में दिखे। इस बार उन्होंने ऐसे छक्के उड़ाए जैसे उस्ताद कसाई चापड़ (बड़ा चाकू) चलाता है। इस बार के आइपीएल में धोनी के आते ही जियो सिनेमा पर लॉग इन करने वाले लोगों की संख्या लाखों की तादाद में बढ़ जाती थी। स्टेडियम में धोनी के आते ही हजारों की संख्या में मोबाइल की बत्तियां रोशन हो उठती थीं। लोग धोनी के विकेट पर आने के लिए जडेजा के आउट होने की प्रार्थना करते थे। लेकिन, जडेजा… उफ्फ, उनकी इस बार की गाथा भी अद्भुत रही।

सीजन की शुरुआत मे जडेजा लय में नहीं थे। दो मैच पहले बुरी तरह पिटे जडेजा को कप्तान धोनी ने कुछ कहा भी था और सोशल मीडिया पर लोग इस बात को लेकर उड़ गए। जडेजा ने एक बार कहा भी था कि लोग उनके आउट होने की प्रार्थना करते हैं, पर उन्होंने बुरा नहीं माना। क्योंकि, सम्राट जब स्वयं युद्धभूमि में उतर रहे हों तो सिपहसालारों के लिए को-लैटरल डैमेज अनहोनी बात नहीं। बहरहाल, उम्र के चौथे दशक में चल रहे अधेड़ धोनी के हाथों में हरक्यूलीज वाली ताकत अभी भी बरकरार है और इस बार उन्होंने उस ताकत का बखूबी इस्तेमाल किया। हेलीकॉप्टर शॉट लगाने वाले धोनी ने खुद को इस बार रॉकेट की तरह स्थापित किया है। शुभमन गिल को स्टंप करने में चीता भी पीछे रह जाता। धोनी ज्यादा तेज साबित हुए। अब भी कमेंटेटर उनकी तेज नजर को धोनी रिव्यू सिस्टम कहकर हैरतजदा हो रहे हैं, तो कभी धन धनाधन धोनी कहकर मुंह बाए दे रहे हैं। कभी उनको तंज से महेंद्र बाहुबली कहने वाले सहवाग जैसे कमेंटेटर भी खामोश हैं। खामोश तो धोनी भी हैं, पर इस बार उनके बल्ले से जैज के धुन निकले हैं। धोनी का नायकत्व अभी भी चरम पर है, शायद पहले से कहीं ज्यादा। यह एक ऐसा तिलिस्म है जिससे निकलने का जी नहीं करता। कल रात धोनी भावुक थे, जब धोनी रिटायर होंगे तो उनके सभी प्रशंसक और पूरा देश भावुक होगा।

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