PATNA (APP) : उगहे सूरजदेव अरघ के बेरिया… दर्शन देहू अपार हे दीनानाथ… मरबो रे सुगवा धनुष से… कांचही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए… महिमा बा अगम अपार हे छठी मईया… ऐसे ही गीतों से बिहार का माहौल भक्तिमय हो उठा है। गली-मुहल्ले से लेकर गांव-गलियारा तक जय छठी मईया से गूंज रहा है। शारदा सिन्हा के गीत छठ में नहीं बजे, ऐसा हो नहीं सकता है। उनके गीतों के बिना तो लगता है यह महापर्व ही अधूरा है। दूसरी ओर क्या पटना के बस स्टैंड, क्या रेलवे स्टेशन और क्या पटना एयरपोर्ट, एक जैसा नजारा हो गया है। इसके साथ ही आज नहाय-खाय के साथ ही लोक आस्था का महापर्व शुरू हो गया। 

उधर पटना समेत जिलों के बाजार का हाल मत पूछिए, छठ सामग्रियों से पूरा बाजार पट गया है। फलों से लेकर मिट्टी के चूल्हे, सूप-दउरा, लकड़ी व अन्य सामान बिक रहे हैं। बिहार के बड़े से लेकर छोटे शहर में सड़कों और घाटों तक की सफाई लास्ट स्टेज में है। पटना में तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद घाटों का निरीक्षण कर रहे हैं। पिछले सप्ताह निरीक्षण के दौरान उनकी स्टीमर गंगा में पिलर से टकरा गयी थी, जिसमें उन्हें चोट भी लगी थी। इसके बाद भी उन्होंने दो दिन पहले दोबारा घाटों का निरीक्षण किया। उनके निर्देश पर सभी जिलों के डीएम से लेकर अन्य अधिकारी घाटों का दुरुस्त करा रहे हैं। नगर निगम से लेकर नगर पंचायत के अधिकारी शहरों की सफाई कराने में लगे हुए हैं। पंचायतों में भी कमोवेश यही स्थिति है। 

उगहे सूरजदेव अरघ के बेरिया… दर्शन देहू अपार हे दीनानाथ… मरबो रे सुगवा धनुष से… कांचही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए… महिमा बा अगम अपार हे छठी मईया…

दरअसल, दिवाली खत्म होते ही छठ पूजा के सामान से पूरा बाजार पट गया है। शहरों से लेकर गांवों और गली-मोहल्लों में छठ पूजा के गीत बज रहे हैं। छठी मईया के पारंपरिक गीतों से माहौल भक्तिमय हो उठा है। बता दें कि चार दिवसीय लोक आस्था का यह अनुष्ठान शुक्रवार 28 अक्टूबर को नहाय खाय से आज शुरू हो गया। जबकि कल शनिवार को दूसरे दिन खरना है। रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को परबैतिन अर्घ्य देंगे। वहीं सोमवार 31 अक्टूबर को इस महापर्व का उदयगामी सूर्य के अर्घ्य के साथ ही समापन होगा। 

मुहल्लों से लेकर गंगा घाटों तक का नजारा देखते ही बन रहा है। हर कोई भक्तिमय में वातावरण डूब-सा गया है। खासकर राजधानी पटना की सभी सड़कें सजने लगी हैं। बांस-बल्ले गाड़े जा रहे हैं। हालांकि, गंगा के जलस्तर में पिछले दो दिनों से कमी हुई है… इस वजह से कुछ घाटों पर दलदल की स्थिति हो गयी है, जिससे पटना डीएम ने यहां के 16 घाटों को खतरनाक घोषित कर दिया है। दूसरी ओर, आम से लेकर खास तक सभी लोग सड़कों की सफाई में व्यस्त हो गये हैं। खासकर युवाओं में छठ पूजा को लेकर गजब का क्रेज हो गया है। हर कोई छठ पर्व में हाथ बंटाना चाह रहा है। 

पटना में तो कई स्थानों पर तोरण द्वार लगाए जा रहे हैं। इसमें विभिन्न मुहल्लों की पूजा समितियां भी बढ़-चढ़ कर भाग ले रही हैं। सूत्रों की मानें तो पटना के गंगा घाटों को कई जोन में बांट कर प्रशासनिक पदाधिकारियों की अलग-अलग जिम्मेवारी दी गई है और सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। इसी तरह की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध मुजफ्फरपुर, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर, दरभंगा, सारण से लेकर तमाम जिलों में किए गए हैं। आप कह सकते हैं कि सभी जिलों में गांव से लेकर शहर तक लोग छठ पर्व की भक्ति में डूब गए हैं। इधर लोकआस्था के महापर्व छठ को लेकर पटना के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर कानों में माटी की सोंधी खुशबू में लिपटे गीत बजने शुरू हो गये हैं। ‘मारबो रे सुगवा धनुष से‚ सुग्गा गिरे मुरुझाए’ से लेकर ‘दरसन दीन्ही अपार हे छठ मइया दरसन दीन्ही अपार’… जैसे लोकगीत मानो पर्व की रौनकता को बढ़ा दी है। आप पटना एयरपोर्ट पर चले जाइए या फिर पटना जंक्शन पर देख लीजिए नजारा। भीड़ की आपाधापाी के बीच एक अलग प्रकार के उल्लास को आप महसूस करेंगे। दिल्ली-मुंबई या अन्य शहरों से आने वाली ट्रेनों को देख लीजिए। आप समझ जाएंगे कि छठ मईया की कैसी महिमा है। महिलाएं तो ट्रेनों में ही गीत गाते हुए आती हैं। पटना को टच करते ही ट्रेनों में जय छठ मईया, जय छठ मईया के जयकारों से गूंजायमान हो जाता है। पटना एयरपोर्ट पर वीआइपी से वीआइपी व्यक्ति तक जय छठ मईया के जयकारा लगाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। 

पटना में बस स्टैंड तक का तो गजब का नजारा है। आप चाहे तो गांधी मैदान का बस स्टैंड देख लीजिए अथवा बैरिया चले जाइए, हर जगह गांव जाने के लिए लोग बसों को ढूढते नजर आएंगे। हर बस खचाखच भरी रहती है। ट्रेनों में भी खचाखच भीड़ है, लेकिन छठ मईया के नाम पर वे सारे कष्ट भूल जा रहे हैं। पूछने पर कहते भी हैं कि छठ मईया हर कष्ट को दूर कर देती हैं। 

बहरहाल, घरों में भी ठेकुआ, लड्डू, पिरकिया, गुझिया बनाने की तैयारी शुरू हो गयी है। इसके लिए गेहूं, चावल को धोने सुखाने की तैयारी चल रही है। गांवों में महापर्व से जुड़े बरतनों को लोगों ने निकाल लिया गया है। शहर में जहां चूल्हे से लकड़ी तक का बाजार सज गया है। वहीं गांवों में लोग घरों में ही माटी के चूल्हे बनाते हैं। यही हाल सूप-दउरे के बाजारों का हाल है। गांवों में सूप-दउरा बनाने वाले भी छठ मईया के गीत गा रहे हैं और वे छठी मईया की भक्ति की धुन में डूबे हुए हैं। हर ओर जय छठ मइया की ही गूंज है।

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