Rajesh Thakur | Patna
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर बिहार के प्राकृतिक और वन क्षेत्रों को पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है। इसके तहत मुंगेर के हवेली खड़गपुर स्थित भीमबांध को एक प्रमुख ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए आरएफपी तैयार करने की प्रक्रिया भी तेज हो गयी है। इसके बाद इस स्थल पर पर्यटकीय सुविधाओं को विकसित करने की कवायद शुरू की जाएगी। दरअसल, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के स्तर से प्रकृति संरक्षण के साथ पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। इसके तहत प्राकृतिक स्थलों, जलाशयों, पहाड़ी क्षेत्रों और वन्यजीव क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए आधारभूत संरचना एवं जन-सुविधाओं के विकास की योजनाएं आगे बढ़ायी जा रही हैं।


अधिकृत सूत्रों के अनुसार, बिहार ईको-टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी (बीईटीडीएस) के माध्यम से राज्य के ईको-टूरिज्म स्थलों के समग्र विकास के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर, आर्किटेक्ट कंसल्टेंट और प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही बिहार में ईको-टूरिज्म की ब्रांडिंग और रणनीतिक प्रचार-प्रसार के लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी शुरू की गयी है। इसका उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को व्यवस्थित पहचान दिलाने के साथ पर्यटकों के लिए बेहतर अनुभव विकसित करना है। चयनित ईको-टूरिज्म स्थलों के विकास और संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पीपीपी/डीबीएफओटी मॉडल पर भी कार्य किया जा रहा है।

दरअसल, भीमबांध को बिहार सरकार दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की तैयारी में काफी पहले से जुट गयी है। जब सम्राट चौधरी बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री थे तो इसकी घोषणा उन्होंने की थी। तब उन्होंने कहा था कि भीमबांध जंगल काफी विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटक यहां आएंगे तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र के उत्पादों को भी वैश्विक पहचान मिलेगी। इस योजना के तहत जंगल के भीतर 54 किलोमीटर लंबा ट्रैक, कई कॉटेज, आधुनिक पर्यटक सुविधाएं और संपूर्ण आधारभूत ढांचे का विकास किया जाएगा।

बहरहाल, भीमबांध के अलावा बिहार के अन्य प्रमुख प्राकृतिक एवं ईको-टूरिज्म स्थलों पर भी विकास की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। इनमें राजगीर, कैमूर, रोहतास, गया, वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य सहित विभिन्न वन और जलाशय क्षेत्र शामिल हैं। राजगीर में ईको-फ्रेंडली कॉटेज विकसित करने तथा नेचर सफारी में क्लिफ वॉक जैसी नयी पर्यटकीय सुविधाएं विकसित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। विभाग का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों का संतुलित विकास करना है। ईको टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आजीविका से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। विभाग की योजना बिहार के प्राकृतिक स्थलों को पर्यावरण अनुकूल, गुणवत्तापूर्ण और आकर्षक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की है, ताकि प्रकृति संरक्षण के साथ राज्य में पर्यटन की नयी संभावनाओं को भी गति मिल सके।







