PATNA (MR)। बिहार में वट सावित्री पूजा शहर से लेकर गांव तक मनायी गयी। विवाहितों ने पिया की लंबी उम्र की कामना की। बरगद के पेड़ की पूजा कर दुआएं मांगी। पिया के प्यार में कोरोना का डर छूमंतर हो गया। इस दौरान कहीं फीजिकल डिस्टेंसिंग का पालन हुआ तो कहीं नहीं। लेकिन शहर हो या गांव, मैक्सिमम महिलाओं ने घरों में ही बरगद की डाली लगाकर पूजा की।

मिल रही जानकारी के अनुसार, शहरों में कोरोना का डर कुछ ज्यादा देखने को मिला। पूजा के दौरान महिलाओं ने दो गज की दूरी का पालन भी किया, लेकिन कुछ जगहों पर इसका पालन नहीं के बराबर हुआ। कमोबेश गांवों में यही​ स्थिति रही। पेड़ों के निकट जाकर पूजा करने वाली विवाहितों की संख्या नहीं के बराबर रहीं।

इस दौरान सुहागिनों ने सत्यवान-सावित्री की कथा भी सुनी। इस दौरान उन्हें बताया ​गया कि सावित्री पूजा सुहागिनों के अखंड सौभाग्य प्राप्त करने का प्रमाणिक और प्राचीन व्रत है। कथा के अनुसार, इस व्रत को करने से अल्पायु पति भी दीघार्यु हो जाता है। बताया गया कि यमराज जब सत्यवान की आत्मा को लेकर चल पड़े तो उनकी पत्नी सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। यमराज के काफी समझाने के बाद भी वह नहीं मानी। तब विवश होकर यमराज ने सत्यवान की प्राण लौटा दी। इस तरह, सावित्री का पति जिंदा हो गया। तब से यह पूजा करने की परंपरा चल रही है।

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