बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही के इस्तीफे से भूमिहार समाज स्तब्ध, सियासी जगत में नए नाम पर मंथन शुरू

Mukhiyajee Reporter | Patna

पीके शाही के नाम से सियासी और अदालत के क्षेत्र में लोकप्रिय बिहार सरकार के महाधिवक्ता प्रशांत कुमार शाही ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राज्य के कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। हालांकि, इस्तीफे के कारणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पी.के. शाही का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार सरकार के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। उनके अचानक पद छोड़ने से नए महाधिवक्ता की नियुक्ति को लेकर जहां अटकलें तेज हो गयी हैं। वहीं, इस खबर ने सबको हैरान कर दिया है। सियासी पंडित उनके इस्तीफे की वजह तलाश रहे हैं।

दरअसल, वरिष्ठ अधिवक्ता पीके शाही पिछले कई वर्षों से पटना हाईकोर्ट में बिहार सरकार का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं। राज्य सरकार के सबसे बड़े विधिक अधिकारी के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में सरकार की पैरवी की और न्यायालय में सरकार का प्रभावी पक्ष रखा। कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभायी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गहरा लगाव की वजह से वे राज्य सरकार में शिक्षा, पर्यावरण तथा योजना एवं विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने थे। सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के बाद उन्होंने पुनः वकालत शुरू की और बाद में सरकार के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका निभायी।

बता दें कि पीके शाही को जनवरी 2023 में दोबारा बिहार का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। यह जिम्मेदारी उन्हें पूर्व महाधिवक्ता ललित किशोर के पद छोड़ने के बाद सौंपी गyi थी। इसके बाद से वे लगातार राज्य सरकार के प्रमुख विधिक प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आए थे, तब पीके शाही को पहली बार राज्य का महाधिवक्ता बनाया गया था। वर्ष 2005 से 2010 तक का उनका पहला कार्यकाल भी काफी चर्चित रहा। बाद में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर शिक्षा, पर्यावरण और योजना विभागों की जिम्मेदारी दी गयी थी। राजनीतिक जीवन में भी पीके शाही ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। वर्ष 2013 में उन्होंने जदयू के उम्मीदवार के रूप में महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और फिर पूरी तरह कानून के क्षेत्र में लौट आए।

बहरहाल, पीके शाही के इस्तीफे की खबर से हर कोई हैरान है। भूमिहार जाति से आने वाले शाही के इस्तीफे से उनका समाज तो स्तब्ध है। इसी बीच अब बिहार के अगले महाधिवक्ता को लेकर चर्चा तेज हो गयी है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार का विधि विभाग नए एडवोकेट जनरल की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है। माना जा रहा है कि जल्द ही नए महाधिवक्ता के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल पटना हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामों पर विचार-विमर्श जारी है।