हवेली खड़गपुर में 4 साल सब-रजिस्ट्रार रहीं स्वीटी, क्या यहां हुई रजिस्ट्री की भी होगी जांच? निगरानी के शिकंजे के बाद उठ रहे सवाल

Mukhiyajee Reporter (Rajesh Thakur)

पटना के एडीएम (आपूर्ति) रवींद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई के बाद अब एक नया सवाल चर्चा में है। कुमारी स्वीटी 2017 से 2021 तक हवेली खड़गपुर अवर निबंधन कार्यालय में सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनात रहीं। जमीन-मकान की रजिस्ट्री से जुड़े दफ्तर में चार साल का यह कार्यकाल क्या जांच के दायरे में आएगा, यही सवाल अब लोग पूछ रहे हैं। निगरानी ब्यूरो के अनुसार दंपती के नाम और परिजनों के नाम अर्जित अचल संपत्ति का कुल मूल्य 2 करोड़ 92 लाख 85 हजार 900 रुपये दर्ज है। एडीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि बेनामी संपत्तियों में निवेश, शैल कंपनियों और बैंक खातों के जरिए हुए लेन-देन की गहनता से जांच की जा रही है। सवाल यह है कि जब संपत्ति का यह पूरा जाल खंगाला जा रहा है, तो क्या स्वीटी की पूर्व तैनाती वाले कार्यालयों के दौर की संपत्ति खरीद और रजिस्ट्रियां भी देखी जाएंगी।

बरामद समान को दिखाते निगरानी के अधिकारी।

गौरतलब है कि स्वीटी तेघड़ा और हवेली खड़गपुर, दोनों जगह चार-चार साल सब-रजिस्ट्रार रहीं। उनके करियर का यह बड़ा हिस्सा दो ही कार्यालयों में बीता। ऐसे में जानकार मानते हैं कि इस अवधि में हुई रजिस्ट्रियों, जमीन की कीमत के आकलन और दस्तावेजों के निष्पादन की भी पड़ताल जरूरी हो सकती है। हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि निगरानी ब्यूरो ने अभी तक उनके अन्य पोस्टिंग क्षेत्र के बारे में कुछ नहीं कहा है और न ही उस दौर की रजिस्ट्रियों की अलग से जांच करने की बात कही है। लेकिन चर्चा जरूर है कि जब्त दस्तावेजों का सत्यापन जारी है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। अब देखना यह है कि ब्यूरो की पड़ताल सिर्फ दंपती की संपत्ति तक सीमित रहती है या हवेली खड़गपुर, तेघड़ा और सकरा जैसे पूर्व कार्यालयों के रिकॉर्ड तक भी पहुंचती है। इसका जवाब आने वाले दिनों में जांच की दिशा से ही मिलेगा। बता दें कि स्वीटी कुमारी की 2013 से 2017 तक तेघड़ा, 2017 से 2021 तक हवेली खड़गपुर और 2021 से 2024 तक सकरा अवर निबंधन कार्यालय में पोस्टिंग रही। इसके बाद वे दानापुर आ गयीं।

अब आप निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई का पूरा ब्योरा यहां पढ़ें। Mukhiyajee Reporter के अनुसार, सरकारी शिक्षक से बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बने पटना के एडीएम (आपूर्ति) रवींद्र कुमार दिवाकर और उनकी निबंधन सेवा अधिकारी पत्नी कुमारी स्वीटी की कथित अकूत संपत्ति का निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में पता चला है। ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी थाना कांड संख्या 113/26 दर्ज किया है। दोनों अधिकारियों पर अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। जांच के दायरे में कुमारी स्वीटी की तैनाती वाले रजिस्ट्री कार्यालय भी अहम माने जा रहे हैं, जिनमें हवेली खड़गपुर भी शामिल है। वर्तमान में वे दानापुर अवर निबंधन कार्यालय में तैनात हैं। वहीं उनके पति रवींद्र कुमार दिवाकर 2024 से पटना में तैनात हैं। वे उस समय पटना में वरीय उप समाहर्ता बने और अक्टूबर 2025 से पटना जिले के एडीएम (आपूर्ति) बन गए। निगरानी मुख्यालय के अपर पुलिस महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने मीडिया को बताया कि सरकारी पदों पर तैनात एडीएम सप्लाई रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी दानापुर की जिला सब-रजिस्ट्रार कुमारी स्वीटी ने अपनी ज्ञात आय से ढाई करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है। उन्होंने बताया कि एडीएम दंपत्ति के पटना के रूपसपुर, दानापुर स्थित कश्यप ग्रीनसिटी और बेगूसराय स्थित उनके पैतृक आवास सहित कुल 4 ठिकानों पर सघन तलाशी ली गयी। जांच में प्राथमिक रूप से सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने अपनी घोषित वैध आय की तुलना में लगभग 47 प्रतिशत अधिक अवैध संपत्ति हासिल की है।

एडीजी ने बरामदगी का विस्तृत ब्योरा देते हुए बताया कि पटना और बेगूसराय स्थित ठिकानों से छापेमारी के दौरान कुल 1 करोड़ 6 लाख रुपये की नकदी राशि बरामद की गयी है। इसके अलावा, अधिकारियों के पास से 24 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण व ज्वेलरी, 6 लाख रुपये मूल्य की ब्रांडेड कंपनियों की महंगी कलाई घड़ियां, कई बैंक खातों के कागजात तथा अचल संपत्तियों एवं जमीनों में निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर आगे की कानूनी और विधिक कार्रवाई तेजी से जारी है। जब्त दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। आरोपी एडीएम दंपत्ति द्वारा बेनामी संपत्तियों में किए गए निवेश और अन्य शैल कंपनियों, बैंक खातों के माध्यम से किए गए लेन-देन की गहनता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक जांच अवधि में रविंद्र कुमार दिवाकर, उनकी पत्नी और परिजनों के नाम पर अर्जित अचल संपत्ति का कुल मूल्य 2 करोड़ 92 लाख 85 हजार 900 रुपये दर्ज है। इसमें दानापुर के कश्यप ग्रीन होम्स में पत्नी कुमारी स्वीटी के नाम फ्लैट संख्या 402 की कीमत करीब 49.34 लाख रुपये और रविंद्र कुमार दिवाकर के नाम फ्लैट संख्या 401 की कीमत करीब 45.68 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा फुलवारीशरीफ में दोनों के नाम करीब 3.9-3.9 डिसमिल जमीन दर्ज है। दस्तावेज में दोनों जमीनों की कीमत करीब 51.73 – 51.73 लाख रुपये बतायी गयी है। बलिया में 20 डिसमिल जमीन की कीमत 23.77 लाख रुपये और फुलवारीशरीफ में रविंद्र कुमार दिवाकर के पिता के नाम दर्ज 3.9 डिसमिल जमीन की कीमत 44.19 लाख रुपये है। बेगूसराय में 4 डिसमिल जमीन भी दस्तावेज में शामिल है, जिसकी कीमत 26.40 लाख रुपये दर्ज है। जानकारी के मुताबिक रविंद्र कुमार दिवाकर ने साल 2000 में शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की थी। 2009 में वह सारण में डीपीआरओ रहे। इसके बाद कटिहार में एसडीसी, दरभंगा में एसडीसी, सहरसा में पीजीआरओ और समस्तीपुर में एसडीएम के पद पर भी रहे। साल 2023 में गया में एसडीसी और 2024 में पटना में एसडीसी के पद पर काम किया। अक्टूबर 2025 से वह पटना में एडीएम सप्लाई के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं, वहीं उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी 2013 बैच की सब रजिस्ट्रार हैं। उन्होंने तेघड़ा, हवेली खड़गपुर और सकरा में भी सब-रजिस्ट्रार के तौर पर काम किया और साल 2024 से वह वर्तमान में दानापुर में सब रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं। खास बात कि वे तेघड़ा और हवेली खड़गपुर में 4-4 साल सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनात रहीं।