Exclusive : रोहिणी आचार्य क्या लालू यादव की सियासी वारिस बनेंगी, राजद के बिखरे वोट बैंक को संभालेंगी; कल आ रही हैं पटना

Rajesh Thakur | Special Report

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य कल दोपहर 3 बजे इंडिगो की फ्लाइट से पटना पहुंच रही हैं। उनके आगमन के साथ ही लालू परिवार के भीतर चल रहा कोल्ड वार अब हॉट होने के आसार दिख रहे हैं। सियासी गलियारों में इस दौरे को महज पारिवारिक यात्रा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नयी पारी की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोहिणी आचार्य अब पटना में परिवार के साथ स्थायी रूप से नहीं रहेंगी। वहां कहां रहेंगी यह भविष्य के गर्भ में है। सूत्रों का दावा है कि वे राष्ट्रीय जनता दल को मजबूत करने और बिहार की राजनीतिक कमान खुद संभालने का मन लगभग बना चुकी हैं। हालांकि इस बारे में रोहिणी या राजद की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन चर्चा यह है कि कांग्रेस में सही समय पर प्रियंका गांधी ने जो गलती की थी, वह रोहिणी नहीं करना चाह रही हैं।

अपुष्ट सूत्रों की मानें तो रोहिणी अपना आवास राजनीतिक रूप से भी परिवार से अलग रखना चाहती हैं। सियासी चर्चा है कि वे लालू यादव की विरासत की दावेदार बनना चाहती हैं। अभी तक वे बिहार की सियासत में मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर सक्रिय रही हैं, लेकिन अब सरजमीं पर भी अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में बताई जा रही हैं। गौरतलब है कि पिछले साल विधानसभा चुनाव के बाद रोहिणी का तेजस्वी यादव से विवाद हुआ था और वे रोते हुए घर से निकली थीं। उस दौरान उन्होंने तेजस्वी पर गलत सलाहकारों से घिरे होने का आरोप भी लगाया था। तब से परिवार की दूरियां लगातार चर्चा में रही हैं। इधर, लालू परिवार की मुश्किलें सिर्फ रोहिणी तक सीमित नहीं हैं। तेजप्रताप यादव भी पारिवारिक विवाद के बाद अलग पार्टी बनाकर अपनी सियासत कर रहे हैं। सरकार ने राबड़ी आवास भी खाली करा लिया है। इसे लेकर भी राजद के कोर वोटरों में गुस्सा है। फिलहाल तेजस्वी यादव अपने सरकारी आवास में रह रहे हैं, जबकि लालू-राबड़ी निजी आवास में रहते हैं। यानी एक ही परिवार अब कई ठिकानों में बंटा नजर आ रहा है।

सियासी जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव आज की राजनीति में उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पा रहे हैं। चर्चा है कि इन परिस्थितियों के बीच लालू यादव के कोर वोटरों में बिखराव होता जा रहा है और कुछ पुराने नेता भी तेजस्वी को लेकर उधेड़बुन में हैं। बांकीपुर उपचुनाव में इसकी झलक देखने को मिली। जब भाजपा को हराने के लिए माय समीकरण ने प्रशांत किशोर के पक्ष में जमकर मतदान किया। सियासी पंडितों की मानें तो राजद का कोर वोटर अब भी लालू यादव का दीवाना है। वैसे वोटरों के दूसरी पार्टियों में जाने के बाद भी लालू और राबड़ी से उतना ही लगाव है। यही वजह है कि भाजपा में वर्षों से नित्यानंद राय (केंद्रीय मंत्री), भूपेंद्र यादव (पूर्व बिहार प्रभारी), मोहन यादव (मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री) है, बावजूद इसके बिहार का यादव वोट बैंक लालू के साथ है। जहां तक मुस्लिम वोटरों का सवाल है तो वह भाजपा विरोधी के साथ है। यदि उनके मन में यह घर कर जाए कि रोहिणी ही लालू की वारिस बनेंगी तो उनके साथ मुस्लिम वोटरों को जाने में तनिक देर नहीं लगेंगी।

बहरहाल, ऐसे माहौल में रोहिणी आचार्य की पटना वापसी और उनकी संभावित सक्रियता राजद की अंदरूनी राजनीति के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अब देखना यह होगा कि कल पटना पहुंचने के बाद रोहिणी क्या कदम उठाती हैं और लालू परिवार व पार्टी की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। सियासी पंडित भी मानते हैं कि रोहिणी आचार्य अपने पिता लालू की वारिस बन सकती हैं, वे जेन-जी को भी मोटिवेट कर सकती हैं, राजद के बिखरे वोट बैंक को भी समेट सकती हैं, भाजपा के क्षुब्ध वोटरों को भी अपने पाले में कर सकती हैं, सवर्ण वोटरों को भी अपनी पार्टी से जोड़ सकती हैं। हालांकि, यह सब भविष्य के गर्त में है। लेकिन राजनीति में किसका भविष्य कब चमक जाए और कौन धरती पकड़ ले, यह किसी ने नहीं देखा है। आपको यह भी बता दें कि सबसे पहले मुखियाजी ने ही 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले छापा था कि रोहिणी आचार्य बिहार में छपरा से चुनाव लड़ेंगी।