LUCKNOW (MR) : हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने यूपी पंचायत चुनाव 2021 (UP Panchayat Election 2021) को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है। यूं कहें कि फाइनल स्टेज में है। योगी सरकार ने पंचायतीराज विभाग की ओर से लाए गए आरक्षण नियमावली के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब जल्द ही इसका शासनादेश जारी हो जाएगा। उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग कभी भी पंचायत चुनाव की डेट की घोषणा कर देगा। अब आरक्षण का जो नया फार्मूला लागू होगा, वह सभी 75 जिलों में एक समान होगा।

जानें आरक्षण का प्रावधान

सीएम योगी आदित्य नाथ की सरकार ने निर्णय किया है कि इस बार के चुनाव के लिए आरक्षण तय करते समय सबसे पहले यह देखा जाए कि वर्ष 1995 से अब तक के पांच चुनावों में कौन-सी पंचायतें अनुसूचित जाति (एससी) व अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित नहीं हो पाई हैं। इन पंचायतों में इस बार प्राथमिकता के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए। नए फैसले से अब वह पंचायतें, जो पहले एससी के लिए आरक्षित होती रहीं और ओबीसी के आरक्षण से वंचित रह गईं, वहां ओबीसी का आरक्षण होगा और जो पंचायतें अब तक ओबीसी के लिए आरक्षित होती रही हैं, वे अब एससी के लिए आरक्षित होंगी। इसके बाद जो पंचायतें बचेंगी, वह आबादी के घटते अनुपात में चक्रानुक्रम के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए होंगी। इन पांच चुनावों में महिलाओं के लिए तय 33 प्रतिशत आरक्षण का कोटा तो पूरा होता रहा, मगर एससी के लिए 21 प्रतिशत और ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण कोटे के हिसाब से कई ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायतें आरक्षित नहीं हो पाईं।

हर पंचायत में जातिगत आरक्षण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि कोई भी पंचायत जातिगत आरक्षण से वंचित नहीं रहने पाए। पंचायतीराज विभाग की मानें तो इस बार के चुनाव के लिए जो आरक्षण फार्मूला लागू किया जाएगा, उसमें अब कोई भी पंचायत जातिगत आरक्षण से वंचित नहीं रहेगी। अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ पंचायतों के वार्डों के आरक्षण की नीति लागू होगी। इसके साथ ही इस बार आरक्षण तय करते समय इस बात पर भी गौर किया जाएगा कि वर्ष 1995 से अब तक हुए पांच त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों में ऐसी कौन सी पंचायतें हैं, जिनमें ग्राम प्रधान,क्षेत्र पंचायत प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष के पद अभी तक जातिगत आरक्षण से वंचित रह गये हैं। वर्ष 1995 में पहली बार त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था और उसमें आरक्षण के प्रावधान लागू किए गए थे। मगर तब से अब तक हुए पांच पंचायत चुनावों में प्रदेश की करीब 18 हजार ग्राम पंचायतें, करीब 100 क्षेत्र पंचायतें और लगभग आधा दर्जन जिला पंचायतों में क्रमश: ग्राम प्रधान, क्षेत्र व जिला पंचायत अध्यक्ष के पद आरक्षित होने से वंचित रह गए।

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