Rajesh Thakur | Patna
बिहार की प्राचीन चित्रकला शैली पटना कलम को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर सरकार ने विधान परिषद में अपना पक्ष रखा है। मंगलवार को बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र में सदस्य सौरभ कुमार ने पटना कलम चित्रकारी को बढ़ावा देने, कलाकारों को प्रशिक्षण देने और इसके माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने से जुड़ा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार यह मानती है कि मधुबनी चित्रकला की तरह पटना कलम चित्रकारी में भी युवाओं के लिए स्वरोजगार, उद्यमिता और रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं? सरकार की ओर से उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने जवाब दिया। जवाब में उन्होंने कहा कि पटना कलम चित्रकारी बिहार की एक प्राचीन एवं विशिष्ट चित्रकला शैली है, जिसमें युवाओं के लिए स्वरोजगार, उद्यमिता एवं रोजगार सृजन की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार ने यह भी कहा कि कला के संरक्षण, प्रचार-प्रसार, डिजायन निर्माण और प्रशिक्षण के माध्यम से इसे रोजगार एवं आय का प्रभावी साधन बनाया जा सकता है।
सौरभ कुमार ने आगे पूछा कि पटना कलम चित्रकारी को सरकार द्वारा उद्योग, रोजगार, प्रशिक्षण, पुरस्कार, सम्मान और मेले के माध्यम से बढ़ावा क्यों नहीं दिया जा रहा है? इस पर सरकार ने बताया कि उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान, पटना द्वारा वर्तमान में 18 शिल्पों में नियमित प्रशिक्षण संचालित किया जाता है, लेकिन पटना कलम चित्रकारी इन 18 शिल्पों में शामिल नहीं है। हालांकि, सरकार ने कहा कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मेलों में संस्थान द्वारा प्रदर्शनी के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। इन मेलों में 18 शिल्पों के अतिरिक्त अन्य शिल्पों के लिए भी विकल्प उपलब्ध रहता है। पटना कलम चित्रकारी के कलाकार भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
सरकार के अनुसार, योग्य कलाकारों का चयन कर उन्हें मेले और प्रदर्शनियों में भागीदारी का अवसर दिया जाता है। इसके अतिरिक्त पटना कलम चित्रकारी के कलाकारों को अपनी कलाकृतियों का प्रचार-प्रसार करने के लिए उद्योग विभाग के अधीन संचालित विक्रय केंद्रों (Sales Outlets) के माध्यम से भी अवसर उपलब्ध कराया जा सकता है।


सदस्य ने सरकार से यह भी पूछा कि यदि पटना कलम चित्रकारी को रोजगार, सम्मान, पुरस्कार, प्रदर्शनी और व्यापार से जोड़ने की योजना है तो वह कब तक लागू होगी? इस पर सरकार ने जवाब में कहा कि वर्तमान में पटना कलम चित्रकारी के लिए कोई अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित नहीं है। हालांकि, पटना कलम चित्रकारी के कलाकारों से आवेदन प्राप्त होने पर उन्हें नियमानुसार मेलों में विपणन और प्रदर्शनी की सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पटना कलम चित्रकारी के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के लिए आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध संसाधनों और सरकार के निर्णय के आलोक में उचित कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, सरकार के जवाब से यह साफ है कि पटना कलम को फिलहाल मधुबनी पेंटिंग की तरह अलग से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, कलाकारों के लिए मेलों, प्रदर्शनियों और सरकारी विक्रय केंद्रों के जरिए बाजार उपलब्ध कराने की संभावना जरूर खुली है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार की इस प्राचीन चित्रकला शैली को सरकार अलग से प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराकर युवाओं के रोजगार का नया माध्यम बनाएगी? क्योंकि पटना कलम केवल बिहार की कला विरासत नहीं, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार की एक बड़ी संभावना भी है।





