PATNA (MR)। कोरोना संकट से त्रस्त बिहार के किसानों के लिए अभी संक्रमण काल चल रहा है। कोरोना के अलावा प्राकृतिक आपदा-विपदा ने भी किसानों का जीना मुहाल कर दिया है। आंधी-तूफान एक अलग ही बाधा बनकर आ रहा है तो भागलपुर के इलाकों में अमेरिकन कीट मकई की फसल को बर्बाद कर रहा है। अब नया मामला टिड्डियों का दल है।

पुरवा हवा ने टिड्डियों का रास्ता रोक दिया है, लेकिन मौसम का क्या है, पछुआ चलते देर नहीं लगेगी। यदि पछुआ चली तो खतरा बढ़ सकता है।

यूपी की ओर से टिड्डियों के दल के बिहार आने की भी आशंका है। इसे लेकर बॉर्डर के इलाकों को लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। हालांकि, पुरवा हवा ने टिड्डियों का रास्ता रोक दिया है, लेकिन मौसम का क्या है, पछुआ चलते देर नहीं लगेगी। यदि पछुआ चली तो खतरा बढ़ सकता है।

टिड्डियों की सूचना इन नंबरों पर दें

18001801551, 8789957264, 9934026188, 9431818813, 9431818715

बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने इसी सप्ताह संबंधित अधिकारियों के संग मीटिंग की। बॉर्डर वाले इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गयी है। जिला प्रशासन को भी आवश्यक निर्देश दिए गए। बोस्टर स्प्रेयर एवं अग्निशमन वाहनों को तैनात कर दिया गया है। कीटनाशक दवाओं के छिड़काव करने को कहा गया है। हेडक्वार्टर लेवल पर कंट्रोल रूम बनाया गया है, जो 24 घंटे काम कर रहा है। किसान सेंटर का हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिया गया है ताकि किसान भाई वहां से जरूरत पड़ने पर सहायता ले सके। इसके अलावा जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, पौधा नियंत्रण एवं संयुक्त निदेशक के भी नंबर जारी किये गये हैं।

किसान सेंटर का हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिया गया है ताकि किसान भाई वहां से जरूरत पड़ने पर सहायता ले सके। इसके अलावा जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, पौधा नियंत्रण एवं संयुक्त निदेशक के भी नंबर जारी किये गये हैं।

कृषि विभाग की मानें तो बिहार में टिड्डियों की एंट्री कैमूर जिले के रास्ते हो सकती है। ऐसे में कैमूर के किसानों की जिम्मेवारी कुछ ज्यादा बनती है। किसानों से विभाग ने आग्रह भी किया है कि यदि टिड्डियों के बारे में कोई जानकारी मिलती है तो विभाग की ओर से जारी नंबरों पर तुरंत सूचना दें। कृषि मंत्री ने एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज को भी निर्देश दिया है। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारियों से भी बात की है। इतना ही नहीं, कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि इसे लेकर यूपी सरकार से भी बात की जा रही है। उसके साथ मिलकर रणनीति बनाई जा रही है ताकि टिड्डियों से किसानों को किसी प्रकार की प्रॉब्लम नहीं हो।

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