PATNA (APP) : पटाखे के नाम पर एक बार फिर बिहार दहल गया। इस बार छपरा में विस्फोट हुआ। इस जानलेवा विस्फोट में 6 लोगों की जान चली गयी। 3 लोगों की तो मौके पर ही मौत हो गयी थी। दरअसल, बिहार पुलिस की लापरवाही कहें या फिर स्थानीय प्रशासन की सुस्ती, बिहार में बम धमाका थम नहीं रहा है। एक शहर से धमाके की आवाज थमती नहीं है कि दूसरे शहर से यह बुरी खबर आ जाती है। छपरा में भी यही हुआ। 24 जुलाई को हुए अवैध पटाखा विस्फोट ने एक बार फिर प्रशासनिक महकमे की नींद उड़ा दी है। छपरा में भी गोपालगंज की तरह देखते ही देखते पूरा मकान भरभरा कर जमींदोज हो गया। लोगों में चीख-पुकार मच गयी। अब पढ़िये पूरा विश्लेषण : 

परा ब्लास्ट में भी पहली नजर में वही पुराने कारण बताए जा रहे हैं। पटाखा से ऐसा हो गया, पटाखे से वैसा हो गया। इसे लेकर अचानक से सोया हुआ जिला प्रशासन समेत पुलिस भी अलर्ट मोड में आ गयी है। संभव है कि पटना मामले में एटीएस, एनआइए आदि एजेंसियों की जांच का दायरा छपरा तक बढ़ जाए। लेकिन, हर धमाके के बाद सवाल अब भी वही है। पटाखे के नाम पर कब तक बिहार दहलता रहेगा? दबी जुबान से पुलिस भी कहती है कि पटाखे से पूरा मकान जमींदोज नहीं हो सकता है। आखिर इतनी अधिक मात्रा में बारुद कैसे जमा हो जाता है ? यह तब हो रहा है, जब आइबी ने भी बिहार सरकार को अलर्ट किया है कि कुछ जिलों में कुछ असामाजिक तत्व दहशत फैला सकते हैं। सूत्रों की मानें तो यह अलर्ट दो दिन पहले ही किया गया है। इसके बाद भी सही मायने में न हेड क्वार्टर के अधिकारी सबक ले रहे हैं और न ही लोकल लेवल पर ही अफसर अलर्ट हो रहे हैं।   

बिहार के छपरा में जो कुछ हुआ, वह अब सबके सामने है। जिले के खोदाईबाग बाजार से सटे खोदाईबाग गांव में लगभग 10 बजे तेज धमाका हुआ। धमाका इतना कानफाडू था कि धमाके की आवाज 2 से 3 किलोमीटर तक सुनाई पड़ी। इसके बाद तो पूरा मकान भरभरा कर गिर पड़ा। मकान भी तीन मंजिला था। एक तो पटाखे की ब्लास्ट और दूसरा मकान गिरने की आवाज, लोग इतने दहशत में आ गए कि वे गिरते-पड़ते जान बचाकर भागे। आवाज सुन पुलिस व प्रशासन के अधिकारी पहुंच गए, लेकिन अंदर जाने की किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी। अंदर से रह-रह कर धमाके की आवाज आ रही थी। रुक-रुक कर आती आवाज लगभग तीन घंटे के बाद पूरी तरह बंद हुई।  

इसके बाद पुलिस जब पहुंची तो उसके होश उड़ गए। मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई थी। लगभग आधा दर्जन लोग जख्मी हो गए थे। इसमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 3 अन्य लोगों की मौत बाद में हो गयी। घटनास्थल खैरा थाना क्षेत्र में पड़ता है। जांच शुरू हुई तो पता चला कि जो मकान पटाखे की ब्लास्ट से ध्वस्त हुआ है, वह मकान रेयाजू मियां का है। वे शादी समेत अन्य ओकेजन पर आतिशबाजी के लिए पटाखे बनाते हैं। वे काफी दिनों से पटाखे बेच रहे हैं। लेकिन, पुलिस ने कभी पता लगाने की कोशिश नहीं की, कि उनके यहां पटाखे का निर्माण किस स्तर पर हो रहा है? लाइसेंस है भी या नहीं? लाइसेंस यदि है तो कितने बारुद का है? कितना पटाखा स्टेार मे रह सकता है? लेकिन न तो पुलिस को इससे मतलब है और न ही जिला प्रशासन को। लेकिन, जब इतनी बड़ी घटना हो गई तो सबके सब अधिकारी एक्टिव मोड में आ गए। 

आपको बता दें कि इसी साल मार्च के पहले पखवारे में गोपालगंज में इसी तरह का धमाका हुआ था। गोपालगंज में भी इसी तरह दिनदहाड़े विस्फोट हुआ था। मामला बिल्कुल छपरा जैसा ही था। यह धमाका फुलवरिया थाना क्षेत्र के बथुआ बाजार में हुआ था। उसमें भी धमाका इतना जोरदार था कि एक मकान देखते ही देखते ढह गया था। पूरा मकान जमीन पर आ गया। हालांकि, उसमें 55 साल के हलीम मियां की मौके पर मौत हो गयी थी। उस समय भी आनन-फानन में पांच थानों की पुलिस पहुंच गई थी। मुजफ्फरपुर के अलावा पटना से भी एफएसएल की टीम पहुंच गई थी। गोपालगंज की घटना से महज 6 दिन पहले ही भागलपुर में इसी तरह का भीषण धमाका हुआ था। उसमें तो 4 घर पूरी तरह जमींदोज हो गये थे। वहां भी पहले स्थानीय पुलिस ने जांच की कमान अपने हाथ में ली। इसके बाद एटीएस को भी जांच की जिम्मेवारी सौंपी गई। भागलपुर में मरने वालों की संख्या 15 पर पहुंच गई थी। इसके बाद भी न तो पटाखे का अवैध निर्माण रुक रहा है और न ही पुलिस ही चेत रही है। न ही कुछ ठोस उपाय निकाल रही है। और एक बार फिर छपरा की घटना ने पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। 

हालांकि, भागलपुर ब्लास्ट का दायर काफी बढ़ गया। उसमें टेरर कनेक्शन के सुराग मिले थे। वहां से बरामद कुकर बम ने पुलिस प्रशासन को सकते में डाल दिया था। लेकिन छोटे-छोटे ब्लास्ट को कौन देखेगा? हाल ही में पटना का पीएफआई कनेक्शन ने पहले से ही पुलिस की नींद उड़ा रखी है। ऐसे में अब छपरा धमाके ने फिर से पुलिसिया सिस्टम पर सवाल उठा दिए हैं। दरअसल, पिछले एक-दो साल में इस तरह की कई घटनाएं हो गई हैं। बांका, सिवान, दरभंगा… एक शहर हो तब न? दरभंगा ब्लास्ट के तार तो हैदराबाद से जुड़ गए थे। भागलपुर में ब्लास्ट की घटना कोई नया नहीं है। वहां तो कूड़े के ढेर पर इस तरह के ब्लास्ट में कई बच्चों की भी मौत हो चुकी है। यही नहीं, भागलपुर में टाइम टू टाइम टिफिन बम से लेकर केन बम, सुतली बम मिलते ही रहे हैं। जबकि, बांका जिले के एक मदरसे में बड़ा धमाका हुआ था। तब मदरसे के इमाम अब्दुल सत्तार मोबिन की महज चंद मिनटों में ही मौत हो गई थी। मदरसे को भी काफी क्षति पहुंची थी। 

अब इसे लेकर सियासी बयानबाजी भी होगी ही होगी। बीजेपी वालों को एक बार फिर अपनी ही सरकार पर हमला करने का मौका मिल जाएगा। वहीं, सरकार की ओर से भी बचाव में बयान आएगा। पुलिस वाले भी अपने बचाव में कुछ से कुछ बयान देंगे, लेकिन आम आदमी के मन में सवाल तो उठेंगे ही। आखिर कब तक पटाखा के नाम पर शहर दहलते रहेंगे। वहीं, नाम नहीं बताने की शर्त पर पुलिस वाले यह भी कहते हैं कि पटाखा विस्फोट से इस तरह पूरा घर ध्वस्त हो जाए, यह संभव नहीं है। बहरहाल, एक बार फिर ब्लास्ट ने पुलिसिया सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब इस मामले में एंगल तलाशे जाएंगे। 

बहरहाल, आइबी ने पिछले सप्ताह ही बिहार सरकार को अलर्ट किया है। आइबी ने बिहार में हिंसा और उपद्रव होने की आशंका जाहिर की है… इसे लेकर उसने आशंका जाहिर की है कि बिहार के आठ जिलों में भारी बवाल हो सकता है। उनके अलर्ट में यह भी कहा गया है कि जुमे की नमाज के बाद कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की साजिश हो सकती है। कई जिलों को चिह्नित भी किया गया है। इसके बाद भी यदि पुलिस नहीं जगी तो फिर घटना के बाद नींद टूटने से क्या फायदा ?

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