PATNA (MR) : प्रयागराज टू पटना। इसे पढ़कर शायद आप ट्रेन या प्लेन की सोच रहे होंगे। लेकिन हकीकत कुछ और है। जी, हम बात कर रहे हैं इलाहाबादी अमरूद की। इलाहाबाद मतलब आप प्रयागराज (वर्तमान नाम) से बिहार की राजधानी पटना आ जाइए, ट्रेनों में हर जगह हरे-हरे और सामान्य से बड़े-बड़े अमरूद बिकते दिखेंगे। ट्रेनों में ही नहीं, बल्कि प्रयागराज व पटना के मार्केट में भी यही अमरूद फल की दुकानों से लेकर ठेलों तक पर मिलेंगे। 

प्रयागराज में फल व्यापारी ने बताया, मेरी दुकान के बगल में बस अड्डा है। दूर-दूर से लोग पूछने आते हैं, भाई लाल अमरूद कहां मिलेगा?

जो न कराए कोरोना

दरअसल, कोरोना की चेन तोड़ने के लिए पिछले लगभग 10 माह से जेहन में बने एक सवाल का जवाब देश में 16 जनवरी को आया। कोरोना वारियर्स के लिए ही सही अदृश्य दुश्मन के खात्मे के लिए कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध हो गई। इसी के साथ जीवन पटरी पर लौटने की आस फिर जग गई। कोरोना काल में बड़ी संख्या में जान ही नहीं गई, प्रयागराज को अपनी ‘इलाहाबादी’ पहचान का संकट बन गया। 

पीली मक्खी का साया

प्रयागराज में हर साल ठंड की दस्तक के साथ ही पूरे देश के लोगों को गंगा किनारे बसे इस ऐतिहासिक शहर के लाल अमरूद का लाजवाब स्वाद लेने का इंतज़ार रहता है। इस बार प्रयाग के बाजारों में सेबिया, सफेदा और सुर्खिया आदि अमरूदों की झलक पाना भी मुश्किल है। अमरूद की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि फसल पर पीली मक्खी का साया पड़ा है। कोरोना के कारण देखभाल भी कम हो पाई। 

रो रहे हैं किसान

कौशाम्बी के एक किसान ने बताया कि जहां 50 हजार का मुनाफा होता था, वहां 10 हजार का कारोबार हो पाना मुश्किल हो गया है। मेडिकल चौराहे पर फल दुकान लगाए व्यापारी ने बताया कि बाजार में लाल अमरूद बहुत कम है। कभी-कभी अमरूद दिख भी जाए तो भाव 200 रुपये से ऊपर। मार्केट में अमरूद तो हैं, मगर छत्तीसगढ़ के हरे वाले। लेकिन इनमें वो इलाहाबादी स्वाद कहां। 

पटना में तो पूछिए मत, जिधर नजर घुमाइए, उधर आपको बड़े-बड़े अमरूद ही दिखेंगे। और साइज तो बिल्कुल बेल की तरह।

अगले साल का अब विकल्प

सिविल लाइन के फल व्यापारी ने बताया, मेरी दुकान के बगल में बस अड्डा है। दूर-दूर से लोग पूछने आते हैं, भाई लाल अमरूद कहां मिलेगा? ये बोलने पर कि इस बार बाजार में इलाहाबादी अमरूद नहीं है तो जवाब मिलता है, हम तो केवल गंगा नहाने और साथ में अमरूद ले जाने इतनी दूर से आये थे। गंगा जी के दर्शन तो हुए अमरूद न मिला। चलो आएंगे अगले साल। 

बिहार में भी छतीसगढ़ वाला 

पटना में तो पूछिए मत, जिधर नजर घुमाइए, उधर आपको बड़े-बड़े अमरूद ही दिखेंगे। चाहे आप बाजार समिति की फल मंडी घूम लें अथवा इनकम टैक्स गोलम्बर पर स्थित फल मार्केट का जायजा ले लें। कंकडबाग या बोरिंग रोड की स्ट्रीट लेन हो। हर जगह इलाहाबाद के नाम पर यही छत्तीसगढ़ वाले अमरूद ही बिक रहे हैं। वजन भी जरूरत से बहुत ज्यादा। एक-एक अमरूद का वजन 250 से 300 ग्राम तक। कोई-कोई अमरूद तो 450 ग्राम का एक, जबकि मैक्सिमम अमरूद का वजन 300 ग्राम के आसपास। रेट 100 रुपए प्रति किलो। साइज बेल की तरह। 

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