नीतीश संवाद : मुंगेर में भी ललन सिंह की कमी खली, संजय झा के कार्यक्रम से दूरी; जदयू में सबके अपने-अपने तर्क

Mukhiyajee Reporter | Patna

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का सोमवार को मुंगेर मुख्यालय में कार्यक्रम था, लेकिन चर्चा का केंद्र वह शख्स रहा जो वहां मौजूद ही नहीं था। मुंगेर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का संसदीय क्षेत्र है, फिर भी वे इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए। दिलचस्प यह कि कार्यक्रम स्थल पर लगे पोस्टरों में ललन सिंह की तस्वीर मौजूद थी। इसके बाद जिले के सियासी गलियारों में सवालों का दौर शुरू हो गया है। सियासी पंडितों का कहना है कि मंच पर मौजूद जमालपुर विधायक नचिकेता मंडल और जदयू जिलाध्यक्ष सौरभ निधि केंद्रीय मंत्री के काफी नजदीकी माने जाते हैं। इसी कारण आयोजन के पोस्टर में ललन सिंह की तस्वीर लगायी गयी होगी। यानी स्थानीय स्तर पर आयोजकों ने अपने नेता को पोस्टर में जगह देने में कोई कोताही नहीं बरती।

मुंगेर के कार्यक्रम में मंच पर मौजूद नेता।

ललन सिंह की अनुपस्थिति को लेकर उनके समर्थकों का तर्क अलग है। समर्थकों का कहना है कि पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं के अनुसार ललन सिंह भारत सरकार के मंत्री हैं, इसलिए वे पार्टी के इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। समर्थक इसे प्रोटोकॉल और पद की मर्यादा से जोड़कर देख रहे हैं। साथ ही उनका यह भी कहना है कि ललन सिंह केंद्र सरकार में मंत्री हैं और केंद्र सरकार से ही पार्टी जल संधि पर पुर्नविचार की मांग कर रही है। इसलिए सरकार में मंत्री होने के कारण वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। पार्टी की इस विचारधारा से ललन सिंह पूरी तरह अवगत हैं। लखीसराय और मुंगेर में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम का ललन सिंह बार-बार फोन पर अपडेट लेते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पार्टी का विक्षुब्ध गुट इस दलील से सहमत नहीं है। इस गुट का कहना है कि यह सब बचने का बहाना है। उनका तर्क है कि भाजपा के कई बड़े कार्यक्रमों में बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल होते रहे हैं। यही नहीं, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, तब वे पार्टी के कई कार्यक्रमों में शामिल होते रहे थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री पार्टी और सहयोगी दलों के कार्यक्रमों में जा सकते हैं, तो ललन सिंह अपने ही संसदीय क्षेत्र में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के कार्यक्रम से दूर क्यों रहे।

इस चर्चा को हवा पटना की एक घटना से भी मिली है। पिछले सप्ताह एमएलसी चुनाव में एनडीए प्रत्याशियों की जीत पर बधाई के लिए जदयू के एक्स हैंडल से जारी पोस्टर में कभी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे ललन सिंह की तस्वीर नहीं थी। उस पोस्टर में नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी, चिराग पासवान, संजय सरावगी, उमेश कुशवाहा, संजय झा और निशांत कुमार की तस्वीरें थीं। एमएलसी चुनाव के दौरान ललन सिंह का बयान ‘ताली एक हाथ से नहीं बजती’ भी खूब चर्चा में रहा था, जबकि जीत के बाद नीरज कुमार ने कहा था कि वे ललन सिंह का आशीर्वाद नहीं लेंगे। इन सबको जोड़कर अब मुंगेर की गैरमौजूदगी को भी देखा जा रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले पर जदयू की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पटना के पोस्टर से मुंगेर के मंच तक की यह दूरी महज संयोग है या किसी बड़े सियासी संकेत की शुरुआत, इसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा। तब तक ललन सिंह के गढ़ मुंगेर में यह चर्चा थमती नजर नहीं आती।

बहरहाल, नीतीश संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संजय झा ने 1996 में भारत और बंगलादेश के बीच हुए फरक्का जल संधि को बिहार के हक के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि 1996 में देवगौड़ा सरकार ने फरक्का जल संधि की थी, उस समय बिहार के हित का ख्याल नहीं रखा गया। इसकी वजह से ही राज्य को बाढ़ और सुखाड़ का सामना करना पड़ता है। इससे यहां के 12 जिले बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इस संधि के कारण ही सिर्फ गंगा ही नहीं, सहायक नदियों का पानी भी खींचकर बंगलादेश को दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर बिहारवासियों के लिए हकमारी है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से ही कहते रहे हैं कि फरक्का जल संधि से बिहार को प्रत्येक वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। विधायक नचिकेता मंडल ने कहा कि पार्टी का यह अभियान बिहार के हक और बिहारवासियों के हित के लिए है। केंद्र सरकार फरक्का जल संधि पर पुर्नविचार करे, इसलिए हमलोग अपनी आवाज वहां तक पहुंचाना चाह रहे हैं। कार्यक्रम में पूर्व विधायक राजीव सिंह, जिलाध्यक्ष सौरभ निधि सहित अन्य मौजूद रहे। संचालन खड़गपुर प्रखंड अध्यक्ष राजेंद्र मंडल ने किया।