Rajesh Thakur | Patna
बिहार की सियासत में एक नया अध्याय लिखने वाले सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद आज पहली बार राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। कहने को तो यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी। लेकिन सियासी पंडित मानते हैं कि यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि उस लंबे राजनीतिक सफर की भावनात्मक परिणति भी थी, जिसमें संघर्ष, रणनीति और ‘साइलेंट कंसेंसस’ की ताकत शामिल रही। दिल्ली के सत्ताकक्ष में जब दोनों नेता आमने-सामने बैठे, तो तस्वीर में सिर्फ एक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि वह विश्वास दिख रहा था, जिसने बिहार की राजनीति की दिशा बदल दी। तस्वीरों में भी आप देख सकते हैं कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के चेहरे पर आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का संतुलन साफ झलक रहा है।



सियासी गलियारों में पिछले दिनों हुई हलचल पर नजर डालें तो पाते हैं कि सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना अचानक घटित घटना नहीं है। यह उस राजनीतिक धैर्य और जमीन से जुड़े समीकरणों का नतीजा है, जिसे उन्होंने वर्षों में गढ़ा। कभी संगठन में चुपचाप काम करने वाले इस नेता ने धीरे-धीरे खुद को बिहार की सत्ता के केंद्र में स्थापित किया। हिडेन नेताओं द्वारा उनके खिलाफ बनाए गए कई नैरेटिव (जातीय समीकरण से लेकर नेतृत्व क्षमता तक) समय के साथ ध्वस्त होते गए। इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत रही ‘साइलेंट कंसेंसस’, यानी जनता और संगठन के भीतर का वह मौन समर्थन, जो चुनावी शोर से कहीं ज्यादा प्रभावी साबित हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी से यह पहली मुलाकात कई मायनों में अहम मानी जा रही है। सियासी पंडितों के अनुसार इस दौरान बिहार के विकास, केंद्र-राज्य समन्वय और आने वाले राजनीतिक रोडमैप पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है- ‘मोदी जी से आज नई दिल्ली में शिष्टाचार मुलाकात हुई। विकसित भारत और समृद्ध बिहार के विजन पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। माननीय प्रधानमंत्री जी का स्नेह एवं सहयोग बिहार की प्रगति को नई गति प्रदान कर रहा है।’ वहीं सियासी पंडितों का मानना है कि इस मुलाकात का असली संदेश इससे भी गहरा है। यह संकेत है कि केंद्र और बिहार के बीच तालमेल की नयी रफ्तार तय हो चुकी है।
बहरहाल, सियासी गलियारों में अक्सर तस्वीरें सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती हैं, लेकिन यह मुलाकात उन दुर्लभ क्षणों में से एक है, जहां एक नेता की पूरी यात्रा जैसे एक फ्रेम में सिमट गयी हो। तारापुर की मिट्टी से उठकर पटना के सत्ता केंद्र तक पहुंचने वाले सम्राट चौधरी के लिए यह सिर्फ मुलाकात नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक उपलब्धि भी है, संघर्ष की उस कहानी का, जो अब सत्ता की जिम्मेदारी में बदल चुकी है। अब नजरें इस बात पर हैं कि मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी बिहार के लिए किस तरह की नयी दिशा तय करते हैं। दिल्ली में हुई यह पहली मुलाकात साफ संकेत दे रही है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति और विकास दोनों में तेज बदलाव देखने को मिल सकता है।






