Mukhiyajee Reporter | Patna
वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि माधव प्रसाद ने मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि बशीर बद्र का जाना केवल उर्दू साहित्य ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। कोलकाता में रहने वाले हवेली खड़गपुर के मूल निवासी माधव प्रसाद ने मुखियाजी डॉट कॉम से बात करते हुए अपने शोक संदेश में कहा कि बशीर बद्र उन विरले शायरों में थे, जिन्होंने शब्दों को केवल लिखा नहीं, बल्कि उन्हें इंसानी भावनाओं की धड़कन बना दिया। उन्होंने दिवंगत शायर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों और प्रशंसकों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
माधव प्रसाद ने कहा कि बशीर साहब की गजलों में मोहब्बत की नर्मी, रिश्तों की कसक और जिंदगी की सच्चाई बेहद सरल, लेकिन प्रभावशाली अंदाज में मिलती है। उनकी शायरी आम आदमी के दिल तक पहुंचती है। उनके अशआर सिर्फ महफिलों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए। ‘कोई यूँ ही बेवफा नहीं होता…’ ‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो…’ सहित न जाने कितने ही शेर आने वाली पीढ़ियों तक याद किए जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बशीर बद्र ने उर्दू अदब को नयी ऊंचाई दी और भाषा की दीवारों को तोड़ते हुए करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनायी। उनका साहित्यिक योगदान सदैव अमर रहेगा।
मालूम हो कि अपने अशआर से मोहब्बत, तन्हाई और रिश्तों की टूटन को नयी आवाज देने वाले मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। 91 वर्ष की उम्र में आज गुरुवार को भोपाल स्थित उनके आवास पर उनका निधन हो गया। उनके जाने के साथ ही उर्दू शायरी का एक सुनहरा दौर मानो थम-सा गया। लंबे समय से बीमार चल रहे बशीर बद्र की याददाश्त भी काफी कमजोर हो चुकी थी। उनके निधन से बिहार के शायरों से लेकर बुद्धिजीवियों तक में शोक की लहर है। दरअसल, बशीर बद्र उन चुनिंदा शायरों में रहे, जिन्होंने उर्दू गजलों को महफिलों से निकालकर आम लोगों के दिलों तक पहुंचाया। उनके शेर सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों की जिंदगी और बातचीत का हिस्सा बन गए। उनका हर शेर लोगों के दिल तक दस्तक देता था।







