Rajesh Thakur | Patna
पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 का चुनाव सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि ‘डर बनाम विश्वास’ की कहानी बनता जा रहा है। बिहार के गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद जीवन कुमार ने केसपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान 2021 की एक भयावह घटना को याद करते हुए दावा किया कि इस बार माहौल बदला हुआ है, और लोकतंत्र अब ज्यादा सुरक्षित महसूस हो रहा है। उन्होंने बताया कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान हावड़ा ब्रिज के पास प्रचार के समय उन्हें और उनके साथियों को TMC समर्थित तत्वों द्वारा घेर लिया गया था। वो पल आज भी याद है, जब जान बचाना चुनौती बन गया था। कुछ देशभक्त साथियों के प्रयास से हम सुरक्षित निकल पाए। वह घटना लोकतंत्र के लिए काला अध्याय है।

वोटिंग की पूर्व संध्या पर जीवन कुमार ने मुखियाजी डॉट कॉम को बताया कि 2021 में मेरी तरह कई बड़े नेता भी ऐसे हालात का सामना कर चुके थे। राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक को घेरने की कोशिश हुई थी, लेकिन आज स्थिति बदली है। अब कार्यकर्ता खुलकर प्रचार कर पा रहे हैं। केसपुर में बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करते हुए उन्होंने कहा कि 2021 के बाद हुई घटनाओं ने कार्यकर्ताओं के भीतर एक नया संकल्प पैदा किया। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इस वजह से इस बार कार्यकर्ता खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अब डर का माहौल खत्म हो रहा है और लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हो रही हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन केसपुर में माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा दिखा। स्थानीय स्तर पर भी कार्यकर्ताओं में उत्साह नजर आया। जीवन कुमार ने वोटरों से अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव सिर्फ सरकार चुनने का नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूती देने का अवसर है।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होनी है। ऐसे में केसपुर जैसे क्षेत्रों में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता यह संकेत दे रही है कि मुकाबला कड़ा है, लेकिन नैरेटिव बदलने की कोशिशें भी तेज हैं। वहीं 2021 की हिंसा और भय के साये से निकलकर 2026 का चुनाव एक नई कहानी लिखने की कोशिश कर रहा है। जीवन कुमार जैसे नेता इस बदलाव को ‘जमीनी सच्चाई’ के रूप में पेश कर रहे हैं। अब यह फैसला वोटरों के हाथ में है।






