Rajesh Thakur। Patna : श्रेयसी सिंह अभी Talk of The Town बनी हुई हैं। इस बार की चर्चा न तो गोल्डन पंच को लेकर हो रही है और न ही खेल मंत्री को लेकर है। चर्चा जमुई की सियासत को लेकर भी नहीं हो रही है। इस बार वह होने वाले अपने दूल्हे को लेकर चर्चा में हैं। दरअसल बिहार की खेल मंत्री, ओलंपियन शूटर और गोल्डन गर्ल सुश्री श्रेयसी सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उस सवाल से दो-चार हुईं, जो अब राजनीति से जुड़े युवा चेहरों के साथ लगभग ‘अनिवार्य-सा’ हो चला है कि आखिर शादी कब? मीडिया की ओर से किये गए इस अचानक सवाल पर श्रेयसी सिंह न केवल सकुचा गयीं, बल्कि शर्मीले अंदाज में झेंप गयीं। बाद में खुद को संभालते हुए और हंसते हुए इतना भर कहा कि ‘राइट मैन’ मिलेगा तो जरूर होगी, सही वक्त और सही आदमी के मिलने पर मीडिया को जरूर बता दिया जाएगा। उन्हें निमंत्रण भी दिया जायेगा। जवाब सधा हुआ था, लेकिन पल भर की हिचक और हल्की झेंप कैमरों की नजर से छिप नहीं सकी।


यदि पिछले एक दशक के सियासी महकमे को देखा जाए तो यह पहला मौका नहीं है, जब राजनीति में सक्रिय किसी युवा चेहरे से निजी जीवन को लेकर सार्वजनिक मंच पर सवाल किया गया हो। इससे पहले यही जिज्ञासा उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से बार-बार जताई जाती रही, फिर यह सिलसिला चिराग पासवान तक पहुंचा, और अब इसकी कड़ी में श्रेयसी सिंह का नाम भी जुड़ गया है। सवाल वही, संदर्भ वही, बस किरदार बदलते जा रहे हैं। तेजस्वी यादव की शादी हो जाने के बाद उन्हें इस’खास सवाल’ से निजात मिल गयी है, लेकिन लोजपा-आर के संस्थापक चिराग पासवान को इस शादी वाले सवाल से अभी भी गाहे-बगाहे रूबरू होना पड़ रहा है। हालांकि, उनसे पूछते-पूछते अब मीडिया ही थक-सी गयी है। अब इसी सवाल को लेकर मीडिया श्रेयसी सिंह को घेर रही है और जब बात उठी है तो दूर तलक भी जाएगी, क्योंकि इस सवाल से उन्हें आगे भी जूझना पड़ेगा ही। बता दें कि यह सवाल मीडिया ने एक सप्ताह पूर्व 27 दिसंबर को पूछा था, लेकिन एक सप्ताह के बाद bhi वायरल हो रहा है।
यहां दिलचस्प यह है कि श्रेयसी सिंह एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं, निशानेबाजी में देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। जमुई से दूसरी बार विधायक बनने वाली सुश्री श्रेयसी सिंह अब बिहार सरकार में खेल मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी पहचान उपलब्धियों से गढ़ी गयी है, फिर भी सार्वजनिक संवाद का रुख अचानक निजी फैसलों की ओर मुड़ जाना कई सवाल खड़े करता है। खुद श्रेयसी शायद इसकी कल्पना भी नहीं कर रही थीं कि किसी आधिकारिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्हें इस तरह की जिज्ञासा का सामना करना पड़ेगा। सियासत के गलियारों में इसे हल्के-फुल्के अंदाज में लिया जा सकता है, लेकिन सामाजिक ताने-बाने में यह एक पुरानी प्रवृत्ति की याद दिलाता है, जहां युवा नेताओं और खासकर महिला नेताओं से उनकी भूमिका, काम और फैसलों से पहले उनके निजी जीवन पर सवाल पूछे जाते हैं। पुरुष नेताओं के मामले में यह जिज्ञासा ‘कौतूहल’ कहलाती है, जबकि महिला नेताओं के लिए अक्सर ‘अपेक्षा’ का रूप ले लेती है।

बहरहाल, श्रेयसी सिंह ने न केवल मीडिया के इस ‘निजी सवाल’ का ठोस जवाब दिया, बल्कि अपने काम की अहमियत को भी बताया। साथ ही पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने को भी स्वीकार किया। उन्होंने मीडिया से दो टुक कहा कि शादी उनके लिए व्यक्तिगत और महत्वपूर्ण निर्णय है, जिसे केवल सही समय और सही व्यक्ति मिलने पर ही लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करना बहुत जरूरी है। उनके इस बयान से यह साफ हो गया कि वे अपने निजी जीवन को भी समाज की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानती हैं और इसे ध्यान में रखते हुए ही कोई कदम उठाएंगी। उनका व्यक्तिगत जीवन भी समाज की व्यवस्था और परंपरा के अनुरूप ही आगे बढ़ेगा।

श्रेयसी सिंह की शायद यही मैचयूरिटी है, उनके बयानों में मैदान का अनुशासन और राजनीति की समझ, दोनों का शानदार मेल दिखा। लेकिन यह सवाल जरूर रह जाता है कि क्या आने वाले समय में राजनीति से जुड़े युवा चेहरों को उनके काम से ज्यादा उनके निजी फैसलों से तौला जाता रहेगा, या फिर संवाद का केंद्र आखिरकार नीतियों, प्रदर्शन और जिम्मेदारियों पर लौटेगा। तभी तो उन्होंने न केवल मीडिया पर चुटकी ली, बल्कि अपनी अहमियत भी बतायी। उन्होंने कहा कि जब भी उनकी शादी तय होगी, वे मीडिया को इसका निमंत्रण अवश्य भेजेंगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उनका पूरा ध्यान अपने विभाग (मंत्रालय) की जिम्मेदारियों और बिहार के विकास पर है।





