तेजस्वी ने नीतीश सरकार को 21 वर्षों के शासन पर घेरा, कहा- बिहार अब भी बेरोजगारी वाला प्रदेश

Ajeet Kumar | Patna

बिहार की राजनीति में एक बार फिर 21 वर्षों के शासन का लेखा-जोखा मुद्दा बन गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज सोमवार (23 फरवरी) को सत्तारूढ़ गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि दो दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद राज्य की बुनियादी तस्वीर नहीं बदली, बल्कि कई मानकों पर बिहार पीछे चला गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 21 सालों से बिहार में एनडीए की सरकार है, लेकिन आज भी राज्य देश का सबसे गरीब और सबसे अधिक बेरोजगारी वाला प्रदेश बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति निवेश और प्रति व्यक्ति खपत जैसे आर्थिक सूचकों में बिहार लगातार सबसे निचले पायदान पर है। शिक्षा, स्वास्थ्य और खेलकूद के क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि बिहार से पलायन की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में रोजगार के अवसरों की कमी के कारण युवाओं को बड़े पैमाने पर बाहर जाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 21 वर्षों में यदि विकास का दावा किया जाता है तो फिर पलायन और बेरोजगारी के आंकड़े क्यों नहीं बदलते? उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार और कथित कुशासन को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका आरोप था कि वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण राज्य का खजाना दबाव में है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय ध्यान भटकाने की राजनीति करती है। गौरतलब है कि बिहार में लंबे समय तक सत्ता का नेतृत्व नीतीश कुमार के हाथों में रहा है, जिनकी सरकार विकास और सुशासन के दावों को बार-बार दोहराती रही है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष के ताजा बयान ने एक बार फिर आगामी चुनावी माहौल में राजनीतिक बहस को धार दे दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष विकास बनाम दावे की इस बहस को मुख्य मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और आंकड़ों की इस जंग में जनता किस पक्ष की दलीलों को ज्यादा विश्वसनीय मानती है।

उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पहले रविवार को भी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सामाजिक समरसता के मुद्दे पर मुखर दिखे। पटना के मिलर हाई स्कूल मैदान में रविदास चेतना मंच द्वारा आयोजित संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती समारोह में उमड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जाति और धर्म के नाम पर नफरत और हिंसा फैलाने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की राजनीति समाज को विभाजित करने का काम कर रही है। उन्होंने संत रविदास की वाणी का उल्लेख करते हुए कहा- ‘ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट-बड़ो सब सम बसै, रैदास रहे प्रसन्न।’ उन्होंने कहा कि गुरु रविदास का संदेश सामाजिक समानता, भाईचारे और सर्वधर्म समभाव का है। इसी क्रम में उन्होंने संत की पंक्तियां उद्धृत कीं- ‘कृष्ण, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा; वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।’ उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि समाज संतों की शिक्षाओं को आत्मसात करे और नफरत की राजनीति से ऊपर उठकर समानता व सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़े।