Mukhiyajee Reporter | Patna
हवेली खड़गपुर अस्पताल के इतिहास में आजादी के बाद पहली बार प्रसव मामले में सफल ऑपरेशन किया गया। अब यहां की महिलाओं को सिजेरियन के लिए मुंगेर, भागलपुर या पटना जाने की जरूरत नहीं है। यह क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस सफल सिजेरियन को स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशु ने अंजाम दिया, जबकि एनेस्थेटिस्ट डॉ. अनुज की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। मेडिकल टीम की इस सफलता ने न केवल अस्पताल प्रशासन का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों में यह भरोसा भी जगाया है कि अब बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर भागना जरूरी नहीं है।


दरअसल, आजादी के समय से हवेली खड़गपुर मुख्यालय में सरकारी अस्पताल तो था, लेकिन वर्षों तक यह केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सीमाओं में ही सिमटा रहा। 1991 में खड़गपुर को अनुमंडल का दर्जा मिलने के बाद भी अस्पताल संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझता रहा। स्थिति ऐसी थी कि आजादी के बाद से यहां न तो स्थायी रूप से महिला सर्जन की प्रभावी व्यवस्था हो सकी और न ही सिजेरियन की ही सुविधा उपलब्ध थी। ऐसे में यहां के डॉक्टरों को गंभीर मामलों में मरीजों को मुंगेर, भागलपुर या पटना रेफर करना मजबूरी बन चुकी थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल और मॉनिटरिंग में हवेली खड़गपुर को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का काम तेज हुआ।
दो वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां 100 बेड वाले अनुमंडलीय अस्पताल की आधारशिला रखी थी। उस ऑनलाइन शिलान्यास समारोह में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल हुए थे। बाद में इसी अस्पताल का उद्घाटन सम्राट चौधरी ने किया। पिछले साल 28 दिसंबर को इसका उद्घाटन हुआ था। करीब ₹12 करोड़ की लागत से बने इस आधुनिक अनुमंडलीय अस्पताल में 100 बेड की सुविधा, तीन अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, छह ICU बेड, डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। इसके अलावा छह बेड का इमरजेंसी वार्ड और चार बेड का प्रसव कक्ष भी बनाया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यहां महिला सर्जन की पोस्टिंग भी सुनिश्चित की गयी।
बहरहाल, इन सुविधाओं का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। स्त्री रोग विशेषज्ञ सर्जन डॉ अंशु की पूरी टीम ने हवेली खड़गपुर अस्पताल में वह काम कर दिखाया, जो आजादी के बाद पहली बार हुआ। उन्होंने प्रसव मामले में सफल सिजेरियन किया, जो क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो सपना वर्षों से अधूरा था, वह अब धीरे-धीरे साकार होता दिख रहा है। हवेली खड़गपुर का यह अस्पताल अब केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि बदलते बिहार और मजबूत होती ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रतीक बनकर उभर रहा है। वहीं महिला डॉक्टर और उसकी टीम को लोग लगातार बधाई दे रहे हैं।







