Trump News : भारत जब सो रहा था, तो अमेरिका में तेज थी सियासी हलचल, सीनेट में ट्रंप को बड़ा झटका

Mukhiyajee Desk | New Delhi
भारत जब गुरुवार की रात गहरी नींद में डूबा हुआ था, तो उसी वक्त अटलांटिक पार अमेरिका की सियासत में तेज हलचल मची हुई थी। वॉशिंगटन में चली बहस के बाद अमेरिकी सीनेट ने ऐसा फैसला सुना दिया, जिसने वेनेजुएला मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया। आगे की रणनीति क्या होगी, इसे ट्रंप किस रूप में लेंगे; यह भविष्य में पता चलेगा, लेकिन वेनेजुएला को लेकर अपनायी गयी आक्रामक नीति पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सीनेट ने गुरुवार को एक अहम प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत राष्ट्रपति को वेनेजुएला में आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले कांग्रेस (सीनेट) की मंजूरी लेनी होगी। 100 सदस्यीय अमेरिकी सीनेट में यह प्रस्ताव 52 के मुकाबले 47 मतों से पारित हुआ। प्रस्ताव का समर्थन डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सीनेटरों ने भी किया। माना जा रहा है कि ट्रंप के 5 सांसदों ने अपनी ही पार्टी के विरोध में वोट किया है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि वेनेजुएला मुद्दे पर ट्रंप को अपनी ही पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह प्रस्ताव अमेरिका के War Powers Resolution के तहत लाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की अनुमति के किसी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई न कर सकें। प्रस्ताव में कहा गया है कि वेनेजुएला के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई संविधान में निहित शक्तियों का उल्लंघन होगी, जब तक कि उसे संसद की स्पष्ट मंजूरी न मिले।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह वोट ट्रंप के लिए इसलिए भी अहम झटका माना जा रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी के कम से कम पांच रिपब्लिकन सीनेटर डेमोक्रेट्स के साथ खड़े नजर आए। इससे पहले आम तौर पर विदेश नीति और सैन्य मामलों में राष्ट्रपति को पार्टी का व्यापक समर्थन मिलता रहा है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से कानून नहीं बना है। इसे अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। यदि वहां से भी इसे मंजूरी मिलती है, तो राष्ट्रपति के पास इस पर वीटो करने का अधिकार होगा। ऐसे में कानून बनने के लिए कांग्रेस को राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा, जो आसान नहीं माना जा रहा है।

बहरहाल, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका द्वारा वेनेजुएला को लेकर उठाए गए हालिया कदमों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी संसद के भीतर उठी यह आवाज इस बात का संकेत मानी जा रही है कि वेनेजुएला संकट पर अब ट्रंप प्रशासन को घरेलू राजनीतिक दबाव का भी सामना करना पड़ेगा। इस फैसले का असर वहां की सेना पर भी पड़ सकता है। खास बात कि अमेरिकी विरोधी देशों में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मालूम हो कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के अपहरण के बाद विदेशों में अमेरिका की किरकिरी हो रही है। तीसरे विश्वयुद्ध की ओर विश्व मुड़ रहा है। रूस सहित अन्य देश भी अलर्ट मोड में आ गया है।