बिहार के वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ झा नहीं रहे, पत्रकारिता और जनसरोकारों की दुनिया में शोक


Mukhiyajee Reporter | Patna

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्ध चिंतक और नदी-पानी के मुद्दों पर लंबे समय तक काम करने वाले अमरनाथ झा का बुधवार रात निधन हो गया। कुछ दिन पूर्व उन्हें ब्रेन हेमरेज होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पत्रकारिता जगत, सामाजिक आंदोलनों और नागरिक समाज में शोक की लहर दौड़ गयी है। इधर आज गुरुवार को उनका दाह-संस्कार पटना के दीघा घाट पर किया गया। इस मौके पर सगे-संबंधी सहित अनेक साहित्यकार और पत्रकार जुटे थे। सबों ने उनके कार्यों को याद करते हुए उन्हें नम आँखों से अंतिम विदाई दी। अमरनाथ झा उन चुनिंदा पत्रकारों में थे जिन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी के रूप में जिया। उन्होंने लंबे समय तक पत्रकारिता और अनुवाद के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से उत्तर बिहार में नदी और पानी से जुड़े सवालों पर उनका काम व्यापक रूप से सराहा जाता रहा।

साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता अरुण नारायण ने अपने शोक संदेश में कहा कि अमरनाथ झा लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और मानवीय सरोकारों के पक्ष में हमेशा स्पष्ट और निर्भीक आवाज बने रहे। उन्होंने कहा कि बिहार के जन आंदोलनों, सामाजिक-सांस्कृतिक पहलों और वैचारिक बहसों में उनकी सक्रिय भागीदारी उन्हें केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि नागरिक समाज का विश्वसनीय हस्ताक्षर बनाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि अमरनाथ जी ने लंबे समय तक पत्रकारिता की, अनुवाद का काम किया, नदी पानी के सवाल को लेकर उत्तर बिहार के गांवों में काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका जाना पत्रकारिता जगत, लोकतांत्रिक चेतना और समाजवादी आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बाढ़, विस्थापन, जल प्रबंधन और ग्रामीण जीवन से जुड़े मुद्दों पर उनकी समझ और हस्तक्षेप उन्हें अलग पहचान दिलाते थे। उनके विचार, उनकी प्रतिबद्धता और जनपक्षधर हस्तक्षेप आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

वरिष्ठ पत्रकार सीटू तिवारी ने कहा कि बिहार में नदी और पानी के विषय पर जितनी गंभीर और गहरी समझ अमरनाथ झा की थी, वैसा काम बहुत कम पत्रकारों ने किया है। उन्होंने कहा कि अपनी विद्वता और अनुभव के बावजूद अमरनाथ झा हमेशा सादगी और विनम्रता के साथ लोगों से जुड़े रहे। उनके अनुसार हाल के वर्षों में बिहार ने पानी के सवालों पर काम करने वाले दो महत्वपूर्ण लोगों को खो दिया है और यह सार्वजनिक विमर्श के लिए बड़ी क्षति है। समाजसेवी महेंद्र यादव ने उनके निधन को सामाजिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि अमरनाथ झा ने अपना जीवन नदी-पानी और समाज के सवालों को समर्पित किया। उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से इस दुःख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की। दूसरी ओर दीघा घाट पर अंतिम संस्कार में परिजन, मित्र, सहकर्मी और बड़ी संख्या में शुभचिंतक जुटे। अपने विचारों, जनपक्षधर दृष्टिकोण और सामाजिक प्रतिबद्धता के कारण अमरनाथ झा आने वाले समय में भी लोगों की स्मृतियों और संघर्षों में जीवित रहेंगे।