पटना। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का सत्याग्रह अभियान बिहार के गांव-गांव में चलेगा। लॉकडाउन के बाद इस आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा। इसी के तहत रविवार को नीतीश सरकार के खिलाफ पूरे बिहार में पार्टी की ओर से काला दिवस मनाया गया। रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा समेत पार्टी के वरीय पदाधिकारी पटना, वैशाली, शेखपुरा, मुंगेर, भागलपुर समेत तमाम जिलों में दो घंटे तक सत्याग्रह आंदोलन चलाया। वे लोग काली पट्टी बांधकर सीएम नीतीश कुमार के निर्णय का विरोध किया। आज भी रालोसपा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किेया गया। बता दें कि इसे लेकर कुशवाहा ने ट्वीट भी किया था।

आज का आंदोलन कोरोना वायरस को लेकर बनाए गए क्वारंटाइन सेंटरों पर मजदूरों को सुविधा नहीं मिलने और वहां मीडिया के जाने पर बैन लगाने के विरोध में किया गया। इस बाबत रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव राहुल कुमार ने बताया कि उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में सत्याग्रह के तहत आगे भी आंदोलन होगा। गांव-गांव पार्टी की मुहिम चलेगी। रालोसपा की ओर से किए गए आज के आंदोलन में पार्टी प्रमुख व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा खुद वैशाली में बैठे थे। उनके साथ कई अन्य पदाधिकारी बैठे हुए थे, वहीं अन्य जिलों में पार्टी के प्रदेश प्रमुख व जिला प्रमुख बैठे थे।

गरीबों को मदद नहीं कर रही है नीतीश सरकार: कुशवाहा

इस अभियान में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी धोरैया (बांका), प्रदेश अध्यक्ष अभियान समिति जीतेंद्र नाथ (शेखपुरा), राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश यादव (पटना), रालसोपा के प्रदेश किसान अध्यक्ष सुभाष यादव तुरकौलिया (मोतिहारी), कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मदन चौधरी (मुजफ्फरपुर), कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कुशवाहा (कैमूर), अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ अध्यक्ष सुभाष चन्द्रवंशी (दनियावां), युवा प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु पटेल (सुल्तानगंज), छात्र रालोसपा अध्यक्ष गोविंद कुशवाहा (आरा) सहित सभी जिलाध्यक्षों ने अपने अपने जिला मुख्यालय में काली पट्टी लगाकर अपने समर्थकों के साथ काला दिवस मनाया।

‘सत्‍याग्रह के तहत आगे भी जारी रहेगा आंदोलन’

इस बाबत वैशाली में उपेंद्र कुशवाहा ने सीएम नीतीश कुमार पर कमेंट किया। उन्होंने सरकार पर कोरोना संकट में भी मजदूरों को मदद नहीं करने का आरोप लगाया। क्वारंटाइन सेंटरों पर मजदूरों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्हें न ठीक से भोजन दिया जा रहा है और न ही राशन। क्वांरटाइन सेंटरों पर सुविधा का अभाव है। पब्लिक को इसकी जानकारी नहीं मिले, इसलिए क्वारंटाइन सेंटर के अंदर मीडिया के जाने पर रोक लगा दी गई है।

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