Kulbhushan Gopal । Patna
राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिलब्ध साहित्यकार वीरेंद्र यादव, विनोद कुमार शुक्ल, राजेंद्र कुमार और ज्ञानरंजन हाल के दिनों में एक-एक कर गुजर गये। महज एक से डेढ़ माह के अंतराल में इन चारों का जाना बिहार समेत देशभर के साहित्यकारों को स्तब्ध कर दिया। उनकी स्मृति मेंजनवादी लेखक संघ की ओर से पटना मुख्यालय के जमाल रोड स्थित कार्यालय में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और जनचेतना से जुड़े अनेक लोग उपस्थित हुए और उन चारों ख्यातिलब्ध साहित्यकारों को नमन कर उन्हें याद किया।


श्रद्धांजलि सभा में प्रमुख वक्ता के रूप में जनवादी लेखक संघ के प्रांतीय सचिव कवि कुमार विनिताभ ने चारों साहित्यकारों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि लेखक का दायित्व केवल लेखन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे जनता की समस्याओं और उनके आंदोलनों से भी गहरा सरोकार रखना चाहिए। उन्होंने चारों दिवंगत रचनाकारों को जनता का लेखक बताते हुए कहा कि उनके साहित्यिक अवदानों को आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी। प्राच्य प्रभा के संपादक विजय कुमार सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्हें याद करते हुए कहा कि उनके निधन से समाज को व्यापक क्षति हुई है। विशेष रूप से विनोद कुमार शुक्ल की चर्चित कविता ‘तंदूर पर बनने वाली रोटी सबके हिस्से की नहीं होती’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पंक्ति अपने आप में सामाजिक असमानता पर तीखा व्यंग्य है।

इस अवसर पर अराजपत्रित कर्मचारी संघ के नेता मंजुल कुमार दास ने कहा कि साहित्यकारों को भी जनमुद्दों पर सड़क पर उतरना चाहिए। उनका सक्रिय हस्तक्षेप सामाजिक आंदोलनों को वैचारिक मजबूती प्रदान करता है।
वामपंथी नेता अरुण कुमार मिश्र, केबी राय और संजीव कुमार श्रीवास्तव ने दिवंगत लेखकों और कथाकारों के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं पृथ्वी राज पासवान, सुजीत कुमार, संतोष सिंह ‘राख’, उमेश सिंह और अमलेंदु मिश्र ने क्रमशः शोक संदेश प्रस्तुत किए। कवि रजनीश कुमार ‘गौरव’ ने अपनी एक कविता का पाठ कर दिवंगत साहित्यकारों को काव्यांजलि दी। सभा का संचालन जनवादी लेखक संघ के सचिव कुलभूषण ने किया। कार्यक्रम में वाईपी यादव, अनुपम कुमार, राहुल कुमार, किशोर कुमार, अशोक मिश्र, त्रिलोकी नाथ पांडे, विनोद कुमार सिंह, कमल बास राय, अमित रजक, मनोज कुमार, राजेश ठाकुर सहित अनेक कवियों, लेखकों और जनवादी विचारधारा से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। सभा के अंत में उपस्थितजनों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत साहित्यकारों की स्मृति को नमन किया।




