Mukhiyajee Reporter | Patna
पटना के रवींद्र भवन में आयोजित भामाशाह जयंती कार्यक्रम के दौरान बिहार की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने बांका समेत अंग क्षेत्र की सियासत में नयी चर्चा छेड़ दी। राष्ट्रीय जनता दल के कट्टर समर्थक, पूर्व जिला प्रवक्ता और बांका के मजबूत ओबीसी चेहरे ओमप्रकाश गुप्ता ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने यह सदस्यता संजय सरावगी, प्रेम कुमार, मंगल पांडेय और गंगा प्रसाद चौधरी की मौजूदगी में ली। कार्यक्रम में मौजूद भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत करते हुए इसे संगठन विस्तार और सामाजिक समीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश बताया।


बांका में ओबीसी राजनीति का बड़ा चेहरा : ओमप्रकाश गुप्ता सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि बांका के उन पुराने सामाजिक चेहरों में गिने जाते हैं, जिनकी पकड़ शहरी क्षेत्र के साथ ही गांवों में अच्छी मानी जाती रही है। ओबीसी समाज में उनकी स्वीकार्यता और संगठन क्षमता ने उन्हें वर्षों तक राजद की स्थानीय राजनीति का मजबूत स्तंभ बनाए रखा। बांका की सियासत में उन्हें ‘जमीनी योद्धा’ के तौर पर देखा जाता रहा है। राजद के स्वर्णिम दौर में ओमप्रकाश गुप्ता उन चुनिंदा नेताओं में माने जाते थे, जिनकी सीधी पहुंच लालू प्रसाद यादव तक थी। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि उन्होंने लालू यादव के समर्थन में एक गीत लिखा था, जो उस दौर में काफी लोकप्रिय हुआ और कार्यकर्ताओं के बीच लंबे समय तक गूंजता रहा। यही वजह थी कि राजद के पुराने कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अलग पहचान बनी।
2025 में टिकट की उम्मीद, फिर टूट गया मन : बता दें कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश गुप्ता को बांका से राजद टिकट मिलने की मजबूत उम्मीद थी। मुखियाजी डॉट कॉम में यह खबर प्रमुखता से छपी थी। उनको लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में भी खुशी का माहौल था। लेकिन अंतिम दौर में जब तेजस्वी यादव ने उन्हें तरजीह नहीं दी, तो यह उनके लिए बड़ा राजनीतिक और व्यक्तिगत झटका साबित था। बताया जाता है कि इसी घटना के बाद उनका राजद से मोहभंग हो गया और वे धीरे-धीरे लालू यादव की पार्टी से दूरी बनाने लगे।
सम्राट फैक्टर बना टर्निंग प्वाइंट : राजनीतिक जानकारों की मानें तो बांका के स्थानीय सामाजिक समीकरण और व्यक्तिगत रिश्तों ने इस फैसले में बड़ी भूमिका निभायी। बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यशैली से ओमप्रकाश गुप्ता पहले से प्रभावित रहे हैं। वहीं सम्राट चौधरी के पिता, पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी से उनके पुराने मित्रवत संबंध भी रहे हैं। यही भरोसा अंततः उन्हें भाजपा के करीब ले आया। भाजपा में शामिल होने के बाद ओमप्रकाश गुप्ता ने कहा कि वे नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के विकास कार्यों और विजन से प्रभावित होकर भाजपा में आए हैं। उन्होंने कहा कि देश और बिहार में बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच अब वे विकास की राजनीति के साथ खड़े रहना चाहते हैं।
ओबीसी वोट बैंक में रुकेगी सेंधमारी : बहरहाल, बांका की राजनीति में ओमप्रकाश गुप्ता का यह कदम सिर्फ दल-बदल नहीं, बल्कि ओबीसी वोट बैंक और पुराने सामाजिक नेटवर्क के लिहाज से एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 2026 के बाद बदलते बिहार के राजनीतिक समीकरणों में इसका असर आने वाले चुनावी मुकाबलों में साफ दिखाई दे सकता है। सियासी पंडितों की मानें तो बांका की राजनीति में यह बड़ा कदम है और राजद के लिए किसी झटके से कम नहीं है। चुनाव में इन्हीं की वजह से भाजपा के ओबीसी वोट बैंक में सेंधमारी होती थी। ओमप्रकाश गुप्ता के भाजपा में शामिल होने से यह सेंधमारी रुकेगी, जिससे भाजपा को सीधा लाभ पहुंचेगा।






