गली के सितारे 26 : कहानी रांची की अवनी केजरीवाल की, इस नए 24 नंबर ने CBSE में लिखा परफेक्शन का नया अध्याय

Rajesh Thakur | Patna

कहते हैं कि मंजिल तक वही पहुंचते हैं, जो रास्ते में लगे बोर्ड देखकर नहीं; अपने कदमों पर भरोसा करते हैं। रांची की अवनी केजरीवाल ने इसी भरोसे के दम पर ऐसी कहानी लिखी है, जो हर स्टूडेंट के लिए प्रेरणा बन सकती है। पहले रिजल्ट में कुछ अंक कम आए, लेकिन उन्होंने इसे अपनी क्षमता का अंतिम फैसला नहीं माना। उन्होंने सिस्टम पर भी सवाल नहीं उठाया। उन्होंने केवल सिस्टम के अंदर उपलब्ध अपने अधिकार का इस्तेमाल किया और री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन कर दिया। जब संशोधित परिणाम सामने आया तो सिर्फ अंक नहीं बढ़े, बल्कि एक नया रिकॉर्ड बन गया। अवनी के 24 अंक बढ़ गए और उनका स्कोर 500 में 500 यानी शत-प्रतिशत हो गया। इस उपलब्धि के साथ डीपीएस रांची की यह छात्रा कॉमर्स स्ट्रीम की परफेक्ट स्कोरर बन गयी।

यह कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि अक्सर स्टूडेंट्स पहले परिणाम को ही अपनी किस्मत मान लेते हैं। वे निराशा में डूब जाते हैं, खुद पर सवाल उठाने लगते हैं और आगे बढ़ने का साहस खो देते हैं। लेकिन अवनी केजरीवाल ने साबित किया कि अगर अपनी मेहनत पर विश्वास हो तो अंतिम फैसला आने तक उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। उसकी सफलता यह भी बताती है कि री-इवैल्युएशन सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। कई बार यह मेहनत को उसका सही सम्मान दिलाने का माध्यम बन जाती है। एक सही निर्णय, एक आवेदन और अपने ऊपर अटूट विश्वास ने उन्हें 476 से सीधे 500 अंकों की ऊंचाई तक पहुंचा दिया।
सीबीएसई ने 21 जून तक री-इवैल्युएशन प्रक्रिया के तहत अधिकांश विद्यार्थियों के संशोधित परिणाम जारी कर दिए हैं। इसी बीच अवनी की कहानी पूरे देश में चर्चा का विषय बन गयी है। सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक हर जगह यह उदाहरण दिया जा रहा है कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती और यदि लगता है कि आपके साथ न्याय नहीं हुआ है, तो सही प्रक्रिया अपनाने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए।

बहरहाल, अवनी की उपलब्धि सिर्फ एक छात्रा के 24 अंक बढ़ने की खबर नहीं है। यह उन लाखों युवाओं के लिए संदेश है जो एक असफलता, एक कम नंबर या एक नकारात्मक परिणाम के बाद खुद को कमतर समझने लगते हैं। जिंदगी का हर रिजल्ट अंतिम नहीं होता और हर कॉपी का आखिरी पन्ना बंद होने के बाद भी सुधार की संभावना बनी रहती है। ऐसे में आप कह सकते हैं कि सपनों की दुनिया में 24 अंक सिर्फ एक संख्या हो सकते हैं, लेकिन मेहनत की दुनिया में यही 24 अंक उनके हौसले, आत्मविश्वास और उम्मीद के 24 नए दरवाजे खोल देते हैं। इसलिए खुद पर भरोसा रखिए, क्योंकि कभी-कभी जीत पहले प्रयास में नहीं, अपने अधिकार के लिए उठाए गए दूसरे कदम में मिलती है। मतलब कुछ कहानियां टॉप करने की नहीं होतीं, बल्कि यह सिखाने की होती हैं कि अपनी मेहनत पर भरोसा आखिरी सांस तक रखना चाहिए।