Rajesh Thakur । Patna
बिहार की आए दिन जुगाड़ गाड़ियां आपको देखने को मिलती होंगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की गाड़ियां ज्यादा देखने को मिलती हैं। इस तरह की गाड़ियों को प्रायः अन्य गाड़ियों और सामान की बॉडी को जोड़कर बनाया जाता है। अब इस तरह की गाड़ियों पर भी सरकार की भृकुटी तन गयी है। अब ये जुगाड़ गाड़ियां सड़कों पर नहीं दिखेंगी। राज्य में जुगाड़ गाड़ियों के अवैध संचालन पर पूर्ण रूप से रोक लगने जा रहा है। परिवहन एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस संबंध में सभी जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पटना हाईकोर्ट ने जुगाड़ गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए हैं।


पहले चलती थी बैलगाड़ी : दरअसल, बिहार में एक समय था, जब सड़कों से लेकर खेतों तक में काफी संख्या में बैलगाड़ी चलती थी। कृषि कार्यों में बैलगाड़ी का ज्यादा इस्तेमाल होता था। खासकर खेतों पर से फसल ढुलाई में किसानों को काफी राहत मिलती थी। लेकिन कालांतर में बैलों का पालन करना महंगा पड़ गया। तो इसकी जगह बाजार में जुगाड़ गाड़ी आ गयी। एक तरह से यह गांवों के लिए मालगाड़ी थी। ये जुगाड़ गाड़ियां मुख्य रूप से डीजल पंप सेट, मोटर साइकिल हैंडल और माल ढोने वाले रिक्शे-ठेलों की बॉडी को जोड़कर बनायी जाती हैं। आज बुधवार को परिवहन एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस तरह की गाड़ियां अब नहीं चलेंगी। इसे कड़ाई से लागू करने के लिए सभी डीटीओ को अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई : उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय व राज्य राजमार्ग के साथ शहरों में चलने वाले जुगाड़ वाहनों व चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार के वाहन मोटर वाहन अधिनियम 1988, केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली 1989 और बिहार मोटर वाहन नियमावली 1992 की किसी भी धारा या नियम में वर्णित मानकों को पूरा नहीं करते हैं। केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली 1989 के नियम 126 के तहत अधिकृत परीक्षण एजेंसियों से ऐसे वाहनों के प्रोटोटाइप की मंजूरी का प्रमाण-पत्र भी जारी नहीं होता। इसके नतीजतन, इन वाहनों का पंजीकरण, परमिट, बीमा, फिटनेस या प्रदूषण प्रमाण-पत्र आदि नहीं हो पाता। साथ ही ऐसे वाहनों से दुर्घटना होने पर प्रभावित व्यक्ति या वाहन मालिक को क्षतिपूर्ति का भुगतान भी नहीं मिल सकता। इनके संचालन से विभागीय नियमों की खुलेआम अवहेलना होती है और ट्रैफिक भी बाधित होता है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है।

जुगाड़ गाड़ी का परिचालन दंडनीय अपराध : मंत्री ने स्पष्ट किया कि जुगाड़ वाहनों का परिचालन दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। यह मामला न्यायालय और जनहित से जुड़ा है, इसलिए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, रोजगार से जुड़ने के इच्छुक लोगों के लिए मंत्री ने सुझाव दिए कि वे मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना और ग्राम परिवहन योजना के तहत आवेदन कर वैध वाहन खरीदकर स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं। इन योजनाओं में वाहन खरीद पर सब्सिडी भी दी जा रही है।




