पूर्व मुखिया सुशीला देवी पंचतत्व में विलीन, नम आंखों से अगुवानी घाट पर दी गयी अंतिम विदाई

Mukhiyajee Reporter | Patna

बिहार के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ वामपंथी नेता स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह की पत्नी तथा पूर्व मुखिया सुशीला देवी शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। उनका अंतिम संस्कार अगुवानी घाट पर पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ किया गया। उनके इकलौते पुत्र डॉ. अंकित ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजनों, रिश्तेदारों, मित्रों, शुभचिंतकों और भाकपा कार्यकर्ताओं की आंखें नम दिखीं। कैथी गांव की गलियों से लेकर अगुवानी घाट तक हर ओर शोक का माहौल था। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की नम आंखें इस बात की गवाही दे रही थीं कि सुशीला देवी ने अपने सामाजिक जीवन में लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया था

बता दें कि सुशीला देवी का निधन गुरुवार रात लंबी बीमारी के बाद हो गया था। निधन की सूचना मिलते ही शोक की लहर दौड़ गयी। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए खगड़िया जिले के पैतृक गांव कैथी ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव से निकली शव यात्रा में सगे-संबंधियों, मित्रों और भाकपा कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। मुखियाजी डॉट कॉम से बातचीत में उनके पुत्र डॉ. अंकित ने बताया कि अंतिम दर्शन के लिए घर पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मां का सामाजिक और राजनीतिक जीवन लोगों के बीच हमेशा याद किया जाएगा।

दरअसल, सुशीला देवी केवल एक राजनीतिक परिवार की सदस्य भर नहीं थीं, बल्कि स्वयं भी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती थीं। अपने पति सत्यनारायण सिंह के विधायक रहने के दौरान उन्होंने संगठन और जनसंपर्क के कार्यों में लगातार सहयोग किया। इसके अलावा वह मध्य बोरने पंचायत की लगातार दो कार्यकाल तक मुखिया रहीं और पंचायत क्षेत्र में अपने कार्यों के लिए जानी जाती थीं। बीमारी के दौरान भी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनसे मुलाकात कर उनका हालचाल जाना था। इनमें भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, एमएलसी शशि यादव, सचिव कुणाल जी तथा भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय सहित कई नेता शामिल थे। इधर, पूर्व मुखिया सुशीला देवी के निधन पर भाकपा नेताओं में राम बाबू, जितेंद्र कुमार, निखिल झा, ललन तिवारी, अशोक सिन्हा, अजय सिंह, शिक्षक चंद्रबिंद, नवीन कुमार समेत अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। शोक संदेशों में उन्हें एक सरल, मिलनसार और जनसेवा के प्रति समर्पित महिला बताते हुए कहा गया कि उनका निधन सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।