Mukhiyajee Political Desk | Patna
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव से ठीक पहले महागठबंधन और एनडीए के भीतर दरार खुलकर सामने आ गयी है। कांग्रेस राजद के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पायी, जिसके बाद कांग्रेस ने अपने 5 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। दूसरी ओर सारण सीट पर एनडीए गठबंधन के घटक दल जदयू और रालोमो के बीच टकराव कायम है। ऐसी स्थिति में फ्रेंडली फाइट से इनकार नहीं किया जा सकता है। इससे प्रदेश की राजनीति इस समय चर्चा में है। अब देखना ये होगा कि दोनों पार्टियां चुनाव में एक दूसरे को कितना नुकसान पहुंचाएगी। बता दें कि विवाद की जड़ महागठबंधन के प्रमुख घटक दल राजद के एकतरफा फैसले में छिपी है। दरअसल, विधान परिषद चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होते ही राजद ने 11 सितंबर को ही अपने सहयोगी दलों से कोई औपचारिक बातचीत किए बिना 6 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। कांग्रेस को यह बात नागवार गुजरी, क्योंकि गठबंधन में इस तरह के अहम फैसले आमतौर पर आपसी सहमति से लिये जाते हैं। राजद की इस घोषणा से नाराज कांग्रेस ने शुरुआत में सभी 8 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। पार्टी का आरोप था कि सहयोगी दल ने गठबंधन में जरूरी तालमेल सम्मान को नजरअंदाज कर दिया। बाद में 1 अक्टूबर देर रात कांग्रेस ने औपचारिक रूप से पांच उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, जिससे अब राजद के साथ सीधा टकराव तय हो गया है।

कांग्रेस के पांच में से चार सीटों पर राजद पहले से ही अपने उम्मीदवार उतार चुकी है, यानी इन चार सीटों पर अब कांग्रेस राजद के प्रत्याशी सीधी टक्कर में होंगे। वहीं, एक सीट डाॅ मदन मोहन झा वाली ऐसी भी है, जिसे कांग्रेस अपनी पारंपरिक सीट मानती रही है, जहां राजद ने फिलहाल कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। कुछ दिन पहले ऐसी खबरें आयी थीं कि कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद यह विवाद थम गया है पार्टी सिर्फ एक सीट पर चुनाव लड़ने के लिए राजी हो गयी थी। केंद्रीय नेतृत्व ने उस वक्त बिहार कांग्रेस को साफ संदेश दिया था कि राज्य में भाजपा को रोकने के लिए राजद अन्य सहयोगियों के साथ गठबंधन धर्म निभाना जरूरी है, लेकिन अब पांच उम्मीदवारों की यह ताजा घोषणा दिखाती है कि वह सुलह ज्यादा दिन टिक नहीं पायी, भीतरखाने नाराजगी फिर से उबाल पर आ गयी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राजद ने गठबंधन धर्म का उल्लंघन करते हुए बिना चर्चा किए उम्मीदवार उतार दिए, जिससे महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा हो गया। कांग्रेस का तर्क है कि अगर सहयोगी दल इसी तरह एकतरफा फैसले लेते रहेंगे, तो आपसी भरोसे पर गहरा असर पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक, यह चुनाव बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 8 सीटों के लिए हो रहा है। ये सीटें द्विवार्षिक आधार पर खाली होती हैं और इनके लिए सामान्य मतदाताओं की बजाय स्नातक और शिक्षक वर्ग के पंजीकृत मतदाता ही वोट डालते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस राजद एक-दूसरे के खिलाफ ही मैदान में उतर जाते हैं तो महागठबंधन के वोट बंटने की पूरी आशंका बनती है, जिसका सीधा लाभ भाजपा उसके सहयोगी दलों को मिल सकता है। यही वजह है कि इस टकराव को महागठबंधन के लिए आत्मघाती कदम जैसा भी बताया जा रहा है। फिलहाल दोनों दलों की तरफ से उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं, जिससे औपचारिक नामांकन के बाद पीछे हटना दोनों के लिए राजनीतिक रूप से मुश्किल हो सकता है। हालांकि, बिहार की गठबंधन राजनीति में इससे पहले भी देखा गया है कि आखिरी समय में हाईकमान के दखल से कुछ सीटों पर समझौता हो जाता है, ऐसे में पूरी तरह टकराव को अंतिम मान लेना जल्दबाजी होगी। इसी तरह एमएलसी चुनाव से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में गजब की खींचतान जारी है। मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और पटना स्नातक सीट से जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार का खुलकर विरोध कर रहे हैं। इस चुनाव में वो जन सुराज प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह का समर्थन कर रहे हैं और बीते कल उनके नामांकन में भी पहुंचे थे। इसी बीच, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मामला केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के क्षेत्र का है और उन्हें बात करके इसे सुलझाने के लिए कहा गया है।

संजय झा ने कहा, ‘ऐसा है कि बात पार्टी के संज्ञान में है और यह हम लोगों के केंद्रीय मंत्री ललन सिंह जी के क्षेत्र का भी इश्यू है। पार्टी ने बात कर लिया है उनसे और उन्हीं को जवाबदेही दी है कि वो बात करके इसे सुलझाएं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘साथ ही, जो मोकामा के विधायक है, उनका भी अपना इश्यू है, जो विधानसभा चुनाव को लेकर हुआ था। इसलिए सारी बात को संज्ञान में लेते हुए पार्टी ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को कहा है कि वे इस मुद्दे पर बात करके सुलझाएं, क्योंकि क्षेत्र भी उन्हीं का है। इससे मुझे लगता है कि रास्ता निकल जाएगा.’ बता दें कि विधान परिषद चुनाव के लिए जदयू ने पटना स्नातक सीट से अपने मुख्य प्रवक्ता और कद्दावर नेता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं जन सुराज ने डॉ. अनुज कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। अब अनंत सिंह जदयू के उम्मीदवार का खुला विरोध कर रहे हैं और अनुज कुमार सिंह का जबरदस्त समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच का यह विवाद काफी पुराना है। दोनों ही नेता पटना के बाढ़-मोकामा इलाके से ताल्लुक रखते हैं और कई मौकों पर एक-दूसरे पर सार्वजनिक तौर पर भी निशाना साधा है। उधर, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में एनडीए के भीतर सीट को लेकर खींचतान और घमासान की स्थिति बन गयी है। एनडीए की ओर से जनता दल (यूनाइटेड) ने ई. आनंद पुष्कर को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें भाजपा और जदयू के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त है। एनडीए के घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता एवं महासचिव राम पुकार सिन्हा ने इस सीट से बगावत करते हुए ताल ठोक दी है और चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उनके नामांकन दाखिल करने की घोषणा से एनडीए के भीतर ही आमने-सामने की स्थिति पैदा हो गयी है। राम पुकार सिन्हा ने 5 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की बात कही है और उनके मुताबिक उन्हें राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद उपेंद्र कुशवाहा एवं प्रदेश नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है। इस सीट पर महागठबंधन की तरफ से राजद ने जयराम यादव को मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। (यह आलेख वरीय पत्रकार कमला कांत पांडेय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अक्षरशः लिया गया है। इसमें उनके निजी विचार हैं।)










