आपदा के दौरान बच्चों-महिलाओं से जुड़े मुद्दों की संवेदनशील रिपोर्टिंग पर जोर, यूनिसेफ के वर्कशॉप में बोले वक्ता

Mukhiyajee Reporter | Patna

जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा, लू और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं के बीच बच्चों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों की संवेदनशील एवं जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूनिसेफ और बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने पटना में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों तथा विभिन्न सरकारी विभागों के जनसंपर्क पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्टेट कंस्लटेंट शादाब मलिक ने बुके देकर स्वागत किया।

यूनिसेफ के वर्कशॉप में शामिल मीडियाकर्मी।
वर्कशॉप में शामिल मुखियाजी के संपादक राजेश ठाकुर व अन्य पत्रकार।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव मोहम्मद नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने कहा कि बिहार सरकार बाढ़, लू और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अन्य आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली, आपदा पूर्व तैयारी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समुदाय और मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि आपदा के दौरान केवल सत्यापित और तथ्यपरक सूचनाओं का ही प्रसार करें, ताकि अफवाहों और भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जा सके। यूनिसेफ बिहार की फील्ड ऑफिस प्रमुख डॉ. मोनिका नेल्सन ने कहा कि यदि जलवायु संकटों को करीब से देखा जाए तो उनकी सबसे बड़ी कीमत बच्चे और महिलाएं चुकाते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल छोड़ने के खतरे का सामना कर रही किशोरियां, स्वास्थ्य सेवाओं से दूर रहने वाली गर्भवती महिलाएं तथा टीकाकरण से वंचित रह जाने वाले बच्चे अक्सर मुख्यधारा की रिपोर्टिंग में पीछे छूट जाते हैं। मीडिया इन मानवीय कहानियों को सामने लाकर समाज और नीति-निर्माताओं का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित कर सकता है। उन्होंने बिहार की मीडिया की सराहना करते हुए कहा कि पत्रकारों ने बाल पोषण, टीकाकरण, नवजात शिशु स्वास्थ्य और बाल संरक्षण जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया ने आंकड़ों को मानवीय चेहरा देने का काम किया है और बच्चों तथा परिवारों की वास्तविक चुनौतियों को समाज के सामने रखा है।

तकनीकी सत्र में मीडिया एवं संचार विशेषज्ञ मीनती चकलानवीस ने आपदा रिपोर्टिंग के नैतिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संकट की परिस्थितियों में रिपोर्टिंग करते समय प्रभावित लोगों की गरिमा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बच्चों की पहचान की गोपनीयता बनाए रखने, सूचित सहमति प्राप्त करने और सनसनीखेज प्रस्तुति से बचने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया। इसी दौरान उन्होंने माइंडगेम को विजिटर्स से खेलवाया। वहीं यूनिसेफ के वॉश विशेषज्ञ सुधाकर रेड्डी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बच्चों, महिलाओं और वंचित समुदायों पर असमान रूप से अधिक पड़ता है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे के कारण पेयजल स्रोत प्रभावित होते हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकार, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे के रूप में देखने की आवश्यकता है। कार्यशाला का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने आपदा संचार, जलवायु जागरूकता और जन-जवाबदेही सुनिश्चित करने में मीडिया की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।