सीतामढ़ी में अब सम्राट चौधरी के साथ जुड़ा दैविक संयोग, राम-जानकी मठ में शिलापूजन और तेज बारिश

Rajesh Thakur from Sitamarhi

आस्था, इतिहास और संयोग— तीनों जब एक साथ खड़े होते हैं, तो घटनाएं सिर्फ खबर नहीं रह जातीं, वे विश्वास की कथा बन जाती हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सीतामढ़ी दौरे ने कुछ ऐसा ही भावनात्मक अध्याय जोड़ दिया है। जानकी नवमी के पावन अवसर पर सीतामढ़ी के डुमरा प्रखंड अंतर्गत राघोपुर बखरी स्थित प्राचीन श्रीराम-जानकी मठ में आयोजित शिला पूजन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने जब हजारों वर्ष पुराने उस प्रसंग को दोहराया कि राजा जनक के समय पड़े भयंकर अकाल के बीच मां सीता का अवतरण हुआ और उनके आगमन के साथ ही वर्षा ने धरती को जीवन दिया। उन्होंने पुनौराधाम के शिलान्यास का भी जिक्र किया और कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जब इसका शिलान्यास किया था, उस दिन भी बारिश हुई थी। जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी यह प्रसंग सुना रहे थे, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही घंटों में यह कथा वर्तमान में भी जीवंत हो उठेगी और महज 12 घंटे के अंदर ही सीतामढ़ी में इस कदर तेज बारिश होगी।

राम-जानकी मठ के शिलापूजन में यजमान के रूप में शामिल हुए रामायण रिसर्च काउंसिल के मुख्य ट्रस्टी संजीव सिंह….. फोटो : मुखियाजी।
पूजन समारोह के बाद माँ के संग प्रसाद ग्रहण करते मुख्य ट्रस्टी संजीव सिंह व अन्य… फोटो : मुखियाजी।

दरअसल, जानकी नवमी के अवसर पर राघोपुर बखरी स्थित प्राचीन श्रीराम-जानकी मठ में शिलापूजन समारोह का आयोजन किया गया था। पूजा लगभग दोपहर 2 बजे शुरू हुई थी। पूजा पर यजमान के रूप में रामायण रिसर्च काउंसिल के मुख्य ट्रस्टी संजीव सिंह सप्तनीक बैठे हुए थे। इस समारोह में निर्धारित समय पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए। उन्होंने शिलापूजन के साथ ही जीर्णोद्धार की नींव रखी। इसके बाद समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में राजा जनक, माँ सीता के जन्म और बारिश के सुखद संयोग का जिक्र किया। तब किसी ने उसी दिन बारिश होने की कल्पना तक नहीं की थी। जिस समय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बारिश वाले प्रसंग को सुनाया, उस समय शहर का तापमान करीब 41 डिग्री सेल्सियस था। आसमान साफ था। बादलों का नामोनिशान नहीं था। लोग पसीने से लथपथ हो रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस प्रसंग के महज 12 घंटे के अंदर सीतामढ़ी की धरती पर तेज बारिश हुई। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि दैविक संयोग बन गया।

राघोपुर बखरी में शिला पूजन और उसके बाद हुई बारिश को स्थानीय लोग ‘मां जानकी की कृपा’ और राज्य के लिए ‘शुभ संकेत’ के रूप में देख रहे हैं। कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रख्यात संत श्री राम भद्राचार्य से शिष्टाचार मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। यह मुलाकात जहां आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक बनी, वहीं राम-जानकी मठ में शिला पूजन के बाद शहर में हुई तेज बारिश ने लोगों में भावनात्मक ऊर्जा भर दी। सीतामढ़ी के स्थानीय निवासियों के बीच इस सुखद घटना की चर्चा तेजी से फैल रही है। कई लोग इसे ‘संयोग नहीं, शुभ संकेत’ बता रहे हैं। बहरहाल, पूजा पर यजमान के रूप में बैठे रामायण रिसर्च काउंसिल के मुख्य ट्रस्टी संजीव सिंह ने मुखियाजी डॉट कॉम को बताया कि राजनीति में प्रतीक और संदेश दोनों मायने रखते हैं। लेकिन जब आस्था उससे जुड़ जाती है, तो वह जनभावना का हिस्सा बन जाती है। सीतामढ़ी में हुई यह बारिश केवल मौसम की घटना नहीं, बल्कि उस विश्वास की पुनर्पुष्टि है, जो सदियों से मां जानकी की इस धरती से जुड़ा रहा है। यहां अकाल भी कथा बनता है और बारिश भी आशीर्वाद।