Mukhiyajee Reporter | Patna
आज के दौर में बच्चों के सामने सूचनाओं की कमी नहीं है, लेकिन सही सूचना को समझने, उस पर विचार करने और जीवन में उसका सकारात्मक उपयोग करने की चुनौती जरूर बढ़ गयी है। बच्चों की इसी बदलती दुनिया और उनकी समस्याओं को केंद्र में रखते हुए हवेली खड़गपुर में जीवन जीने की सच्ची कला पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। हेब्रोन स्कूल तथा भानुमति आईटीआई में आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से फ्रांस से आए बीके सिमोन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पढ़ने, लिखने और सोचने की आदत को भी लगातार विकसित करना जरूरी है। उन्होंने रीडिंग, राइटिंग और थिंकिंग को बच्चों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।


बीके सिमोन ने बच्चों से कहा कि प्रत्येक सुबह एक नयी सोच और सकारात्मक ऊर्जा के साथ अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए। बीते दिन की परेशानियों को लेकर बैठने के बजाय हर दिन को स्वयं को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने बच्चों की मौजूदा समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की। बदलती जीवनशैली, पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया, अपेक्षाओं और पारिवारिक परिस्थितियों से पैदा होने वाले तनाव के बीच बच्चों को स्वयं को समझने और अपनी समस्याओं का समाधान तलाशने की जरूरत है। इसके लिए आत्मचिंतन और मेडिटेशन को उपयोगी बताते हुए उन्होंने नियमित ध्यान की आदत विकसित करने पर बल दिया।


उन्होंने कहा कि आज गूगल और सोशल मीडिया का दौर है। किसी भी विषय की जानकारी कुछ ही सेकंड में बच्चों के सामने उपलब्ध हो जाती है। ऐसे में शिक्षक की भूमिका कम नहीं, बल्कि और महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि जब बच्चा इंटरनेट से जानकारी प्राप्त कर सकता है, तब शिक्षक की जिम्मेदारी केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रह सकती। शिक्षक को बच्चों को यह समझाने की जरूरत है कि उपलब्ध जानकारी में क्या सही है, क्या उपयोगी है और उसका जीवन में किस तरह सकारात्मक इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए शिक्षक को भी पूरी तैयारी के साथ क्लासरूम में जाने की जरूरत है। इतना ही नहीं, कार्यक्रम में बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया।
बीके सिमोन ने कहा कि बच्चों की हर समस्या का समाधान केवल स्कूल या किताबों में नहीं मिलता। परिवार का वातावरण भी बच्चे के व्यक्तित्व और सोच को गहराई से प्रभावित करता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ प्रेमपूर्ण और सहज व्यवहार रखने की अपील करते हुए कहा कि घर में संवाद का माहौल होना चाहिए। बच्चों की छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करने के बजाय उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ परिवार, संवेदनशील शिक्षक और सकारात्मक सोच वाला बच्चा मिलकर बेहतर समाज की नींव तैयार करते हैं। कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि बच्चों को केवल सफल बनने की नहीं, बल्कि संतुलित, सकारात्मक और बेहतर जीवन जीने की कला भी सिखायी जानी चाहिए। कार्यक्रम में बीके प्रभाकर सिंह, बीके धनिक कुमार, डॉ पनिश चंद्रा के अलावा हेब्रोन स्कूल में निदेशक पीसी प्रसाद, दीपक कुमार, विनय कुमार, सीमा कुमारी, एजाज खान तो भानुमति आईटीआई में निदेशक नंदकिशोर चौधरी, प्रिंसिपल धनंजय शर्मा, अध्यक्ष अरुण कुमार, नवोदय विद्यालय के विवेकानंद भारती, नीरज कुमार आदि मौजूद रहे।








