Mukhiyajee Reporter | Patna (Rajesh)
मुंगेर का कल्याणपुर गांव कम से कम बिहार में किसी पहचान का मोहताज नहीं रहा। वह एक ब्रांड बन चुका है और इसका सारा श्रेय Burnett Homeopathy Company के डायरेक्टर डॉ नीतीश चंद्र दुबे (Dr Nitish Chandra Dube) को जाता है। उनके नेतृत्व में हुई कल्याणपुर (Kalyanpur) की दुर्गापूजा, पांच करोड़ की लागत का भव्य पंडाल, सितारों की महफिल और ‘कल्याणपुर वाली माँ’ की आस्था ने इस गांव को नयी पहचान दी है। डॉ नीतीश चंद्र दुबे ने सप्तमी-अष्टमी की रात पूजा पंडाल में मुखियाजी डॉट कॉम के संपादक राजेश ठाकुर से बात की। पंडाल-मेला निरीक्षण तथा उनसे बातचीत के आधार पर ‘कल्याणपुर वाली माँ’ की सभी टॉप-10 कड़ियों में से पढ़ें दूसरी कड़ी…

कल्याणपुर की दुर्गापूजा इस बार फिर चर्चा के केंद्र में रही और वजह रही पंडाल का विशाल स्वरूप। आयोजकों के मुताबिक पंडाल का फैलाव ढाई से तीन किलोमीटर के दायरे में था, जबकि मेला क्षेत्र पांच से छह किलोमीटर के रेडियस में फैला हुआ था। इस मामले में इतना बड़ा पंडाल पूरे बिहार में शीर्ष पर रहा और संभव है कि देश में भी यह सबसे बड़ा रहा हो। डॉ नीतीश चंद्र दुबे के अनुसार इस पूरे आयोजन पर लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत आयी। इस बार पंडाल की थीम ने भी लोगों का ध्यान खींचा। पंडाल मलेशिया के प्रसिद्ध ट्विन टावर की प्रतिकृति पर तैयार किया गया था। इसके साथ ही ब्रिटिश संसद का भी एक अलग स्वरूप बनाया गया था और उसके ऊपर शिवलिंग स्थापित किया गया। विदेशी इमारतों के स्वरूप में आस्था के प्रतीक का यह मेल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहा। दूर-दूर से आए लोग इन संरचनाओं के सामने सेल्फी लेते नजर आए।

कल्याणपुर के पंडाल की खासियत यह है कि वह हर बार नए रूप में दिखता है। इससे पहले यहां बुर्ज खलीफा, एफिल टावर, ब्रिटिश बिल्डिंग सहित दुनिया की कई बड़ी धरोहरों की तर्ज पर पंडाल बन चुके हैं। हर साल लोगों में यह उत्सुकता रहती है कि अगली बार कौन-सी इमारत कल्याणपुर की धरती पर उतरेगी। यह उत्सुकता ही इस आयोजन को साल-दर-साल बड़ा बनाती जा रही है। यहां प्रतिष्ठापित होने वाली श्री श्री 108 बड़ी दुर्गा महारानी को डॉ दुबे ने ‘कल्याणपुर वाली माँ’ नाम दिया है। यह नाम अब श्रद्धालुओं की जुबान पर चढ़ चुका है और गांव की पहचान के साथ माँ की महिमा को भी जोड़ता है।
सबसे बड़ा ऐलान माँ दुर्गा के विसर्जन के दौरान हुआ। डॉ दुबे ने घोषणा की कि अगली बार, यानी 2027 में पंडाल का विस्तार इस बार से तिगुने दायरे में होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे इससे भी बड़े पंडाल बनाए जाएंगे। अगर यह संकल्प जमीन पर उतरा, तो कल्याणपुर का आयोजन देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जा सकता है। इस घोषणा के बाद से इलाके में अभी से 2027 की चर्चा शुरू हो गयी है।









