Mukhiyajee Reporter | Patna
बिहार के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अब आधार कार्ड बनवाने या उसमें जरूरी बदलाव कराने के लिए लोगों को प्रखंड अथवा जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सम्राट चौधरी सरकार पंचायत सरकार भवनों को ग्रामीणों के लिए स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में राज्य की सभी 8,053 ग्राम पंचायतों में आधार सेवा केंद्र शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गयी है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के अनुसार, इस संबंध में पंचायती राज विभाग और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के बीच जल्द करार होने की उम्मीद है।

दरअसल, आधार से जुड़े कामों के लिए ग्रामीणों को अक्सर अपने गांव से दूर प्रखंड या जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह अतिरिक्त समय और खर्च का कारण बनता है। खासकर, जिनके घर में केवल बुजुर्ग रहते हैं, उन्हें तो काफी दिक्कत होती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने बड़ा फैसला पंचायत सरकार भवन में आधार सेवा केंद्र शुरू होने का लिया है। इससे वहां आधार बनवाने और उसमें आवश्यक अपडेट कराने जैसी सेवाएं पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। ग्रामीणों को इससे अपने गांव या पड़ोसी गांवों में ही सरकारी सुविधा मिलने का रास्ता साफ होगा। बता दें कि सम्राट सरकार की ओर से पंचायत सरकार भवनों को सिर्फ पंचायत कार्यालय तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीणों को अधिक से अधिक सरकारी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने वाले केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर मंत्री दीपक प्रकाश की ओर से कहा गया है कि राज्य की 8,053 पंचायतों में 64 सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी योजना आगे बढ़ रही है। ऐसे में आधार सेवा केंद्र की शुरुआत को पंचायत सरकार भवनों के माध्यम से ग्रामीणों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की व्यापक पहल का हिस्सा माना जा रहा है। बिहार में लगभग सभी पंचायतों तक एक जैसी सुविधा पहुंचाना अपने आप में बड़ा प्रशासनिक कदम है। आधार सेवा केंद्रों के लिए पंचायती राज विभाग और CSC के बीच प्रस्तावित करार के बाद इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। बहरहाल, सम्राट चौधरी की सरकार के इस मॉडल का स्पष्ट मैसेज यही है कि सरकार की सुविधा गांव तक पहुंचे, न कि गांव का व्यक्ति हर काम के लिए सरकार के पास दूर तक जाए। आधार जैसी रोजमर्रा की जरूरी सेवा को पंचायत स्तर तक पहुंचाने की पहल इसी सोच को मजबूत करती है।








