बिहार पंचायत चुनाव 2026 : आरक्षण-परिसीमन पर हलचल तेज, 27 मई तक सभी प्रखंडों में बैठक कर प्रतिनिधियों को एकजुट करने की तैयारी

Rajesh Thakur | Patna

बिहार में प्रस्तावित पंचायत चुनाव 2026 से पहले परिसीमन और आरक्षण के मुद्दे पर सियासी व सामाजिक सरगर्मी तेज हो गयी है। पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकार, हिस्सेदारी और नए सिरे से होने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर अब राज्यव्यापी आंदोलन की जमीन तैयार की जा रही है। इसी कड़ी में मुखिया महासंघ बिहार ने राज्य के सभी प्रखंडों में 17 मई से 27 मई के बीच विशेष बैठक आयोजित करने का फैसला लिया है। मुखिया महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने बताया कि पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर जमीनी प्रतिनिधियों की राय सरकार तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि ग्रामीण लोकतंत्र की आवाज दब न सके।

उन्होंने कहा कि प्रखंडों में होने वाली बैठकें केवल बैठक भर नहीं है, बल्कि पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को जोड़ने का व्यापक अभियान है। उन्होंने यह भी बताया कि इसे लेकर प्रत्येक प्रखंड स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों से जुड़ा ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय एवं संबंधित आयोगों को भेजा जाएगा। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पंचायत चुनाव 2026 से पहले आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा गांव की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। नए परिसीमन से कई पंचायतों की भौगोलिक और सामाजिक संरचना बदल सकती है, जिसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों की यह सक्रियता आने वाले महीनों में ग्रामीण राजनीति की दिशा तय कर सकती है।

बहरहाल, बिहार की पंचायत राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि यदि यह अभियान व्यापक समर्थन जुटाने में सफल रहा, तो पंचायत चुनाव 2026 से पहले यह मुद्दा राज्य की मुख्य राजनीतिक बहस बन सकता है। ग्रामीण बिहार में अब सवाल केवल चुनाव का नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व, अधिकार और हिस्सेदारी का बनता दिख रहा है। हालांकि, बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा है कि पंचायत चुनाव समय पर होगा और यह 2011 की जनसंख्या के आधार पर होगा। साथ ही उसी के आधार पर आरक्षण का रोटेशन बदलेगा। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि संगठन नया परिसीमन कराने में सफल होता है या सरकार 2011 की जनसंख्या के आधार पर ही चुनाव कराने में कामयाब होता है, यह यक्ष प्रश्न है।