Rajesh Thakur | Patna
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 13 मई को हुई बिहार कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में 19 एजेंडों पर मुहर लगी। इन्हीं में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़ा एक ऐसा महत्वपूर्ण फैसला भी शामिल है, जिसने मुंगेर जिले के टेटिया बंबर प्रखंड के हजारों छात्र-छात्राओं, खासकर बेटियों के भविष्य को नयी दिशा देने का रास्ता खोल दिया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार बिहार सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत डिग्री महाविद्यालय से वंचित प्रखंडों में नए कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में फिलहाल तीन प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। इनमें टेटिया बंबर प्रखंड को भी डिग्री कॉलेज की सौगात मिली है। यह प्रखंड तारापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करते हैं। ऐसे में क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और दूरगामी सौगात दी है।
दरअसल, अब तक टेटिया बंबर और आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं को स्नातक की पढ़ाई के लिए अनुमंडल मुख्यालय या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। दूरी, यातायात और आर्थिक बोझ के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बीच में प्रभावित होती थी। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण परिवारों की बेटियों को उठानी पड़ती थी, लेकिन अब डिग्री कॉलेज खुलने के फैसले के बाद टेटिया बंबर की बेटियां अपने ही गृह प्रखंड में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी। इससे न सिर्फ छात्राओं की शिक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि माता-पिता को भी यह सुकून मिलेगा कि उनकी बेटियां सुरक्षित माहौल में घर के नजदीक रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह फैसला सिर्फ एक कॉलेज खोलने का निर्णय नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव है। आने वाले वर्षों में यह संस्थान टेटिया बंबर समेत पूरे क्षेत्र के युवाओं के सपनों को नयी उड़ान देने का काम करेगा।


बहरहाल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट बैठक का यह निर्णय केवल तीन नए डिग्री महाविद्यालयों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार की उस स्पष्ट सोच को भी दर्शाता है, जिसमें गांव-गांव तक उच्च शिक्षा पहुंचाने, बेटियों को सुरक्षित व सुलभ शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने तथा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का संकल्प दिखाई देता है। टेटिया बंबर को मिली यह सौगात आने वाले समय में शिक्षा, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।





