असम दौरे पर गये बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां कामाख्या के चरणों में टेका मत्था, जनता के लिए मांगी सुख-समृद्धि

Rajesh Thakur | Patna

असम दौरे पर पहुंचे सम्राट चौधरी का मंगलवार को एक अलग ही आध्यात्मिक स्वरूप देखने को मिला। पूर्वोत्तर भारत के महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने से पहले बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कामाख्या मंदिर पहुंचकर माँ कामाख्या देवी के दरबार में विधिवत पूजा-अर्चना की और देश, बिहार तथा समस्त जनमानस की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर से सामने आयी तस्वीरों में मुख्यमंत्री पूरी श्रद्धा के साथ हाथ जोड़कर माँ के चरणों में नतमस्तक नजर आए। सम्राट चौधरी असम में आयोजित नयी सरकार के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे हैं।

असम शपथग्रहण समारोह पूर्वोत्तर की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में देश के कई प्रमुख राजनीतिक चेहरे भी मौजूद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, बिहार से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। इस कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का सीधे शक्तिपीठ पहुंचना यह बताता है कि राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच उनकी आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव कितना गहरा है। पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता कामाख्या देवी के दर्शन का उन्हें सौभाग्य मिला और उन्होंने माँ से सभी के कल्याण, सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके साथ उन्होंने संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक- ‘कामाख्ये कामसम्पन्ने कामेश्वरि हरप्रिये…’ भी साझा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

पूजा-अर्चना करते बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।

दरअसल, गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और पूजनीय शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि जब माता सती के शरीर के अंग पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे थे, तब इस स्थान पर देवी का योनिभाग गिरा था। इसके कारण यह स्थान शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र बना। तांत्रिक साधना, शक्ति आराधना और विशेष रूप से अंबुबाची मेले के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर न केवल असम, बल्कि पूरे देश और विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सदियों पुराना यह धाम भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, शक्ति साधना और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

राजनीतिक कार्यक्रम से पहले इस शक्तिपीठ में माथा टेककर सम्राट चौधरी ने एक तरह से आध्यात्मिक संदेश भी दिया है। बिहार की राजनीति में अपनी सक्रिय और आक्रामक शैली के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री का यह श्रद्धामय रूप समर्थकों और राजनीतिक गलियारों, दोनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर उनकी यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जहां समर्थक ‘जय माँ कामाख्या’ के जयकारों के साथ अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।