महागठबंधन में फूट के बाद भी दरभंगा स्नातक में राजद की बंपर जीत; कांग्रेस ने काटे वोट, MY को जनसुराज ने दरकाया, फिर भी अनिल झा जीते

Mukhiyajee Reporter | Patna

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे ने बिहार की सियासत में कई सवाल खड़े किए हैं। महागठबंधन के भीतर तालमेल न बैठने और कांग्रेस के अलग उम्मीदवार उतारने के बावजूद राजद के अनिल कुमार झा ने भाजपा के सर्वेश कुमार को हराकर सीट अपने नाम कर ली। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी शीर्ष पांच उम्मीदवारों की सूची के मुताबिक अनिल झा को 25,406 और सर्वेश कुमार को 21,396 वोट मिले। इस तरह राजद उम्मीदवार ने 4,010 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। सूची के आंकड़े दिलचस्प तस्वीर दिखाते हैं। जनसुराज के मोहम्मद इम्तेयाज को 12,823, निर्दलीय दिलीप कुमार को 7,143 और कांग्रेस के रजनीकांत पाठक को 4,514 वोट मिले।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, दरभंगा स्नातक के शीर्ष पांचों उम्मीदवारों के कुल 71,282 वोट में राजद की हिस्सेदारी करीब 36 प्रतिशत और भाजपा की करीब 30 प्रतिशत रही। इम्तेयाज, दिलीप और रजनीकांत के कुल 24,480 वोट राजद को मिले वोटों के लगभग बराबर हैं। यानी इन तीनों ने मिलकर उतने वोट खींचे, जितने विजेता को मिले। सियासी पंडितों के अनुसार सबसे बड़ी सेंध जनसुराज ने लगायी। मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर उसने राजद के परंपरागत मुस्लिम-यादव समीकरण में दखल दिया और मुस्लिम मतदाताओं के एक हिस्से को अपनी ओर खींचा। 12 हजार से ज्यादा वोट इसी का संकेत माने जा रहे हैं। महागठबंधन की पांच सीटों पर राजद और कांग्रेस आमने-सामने थे, और दरभंगा स्नातक में कांग्रेस उम्मीदवार को मिले साढ़े चार हजार से ज्यादा वोट गठबंधन के वोट बैंक में बंटवारे की ओर इशारा करते हैं। निर्दलीय उम्मीदवार को मिले सात हजार से ज्यादा वोट ने भी राजद की राह मुश्किल की। इसके बावजूद राजद का जीतना बताता है कि स्नातक मतदाताओं में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और भाजपा के खिलाफ वोटों का रुझान कारगर रहा।

बहरहाल, जीत के बाद अनिल झा ने कहा कि यह आम लोगों की जीत है और 30 वर्षों से लोगों के बीच रहने का नतीजा है। विपक्षी वोट बंटने के बाद भी राजद का चार हजार से ज्यादा वोटों से आगे निकलना उसकी जमीनी पकड़ को दिखाता है।
भाजपा के लिए यह नतीजा चिंता की बात है, क्योंकि विपक्षी वोट तीन हिस्सों में बंटने के बाद भी वह सीट नहीं निकाल सकी। वहीं राजद के लिए संदेश साफ है कि मुस्लिम-यादव समीकरण पर अब पहले जैसा भरोसा नहीं किया जा सकता, और गठबंधन की फूट आगे भारी पड़ सकती है। बता दें कि दरभंगा स्नातक सीट का रिजल्ट तीसरे दिन निकला, जबकि दो दिनों तक सियासी महकमे में भाजपा के सर्वेश कुमार को लोग जीता रहे थे। ऐसे में तीसरे दिन जब द्वितीय वरीयता के आधार पर फाइनल रिजल्ट आया तो हर कोई चौंक पड़ा।