Mukhiyajee Reporter | Patna
जमुई के रहने वाले यश राज की मां ‘लखपति जीविका दीदी’ हैं। यश राज बताते हैं कि वह अपनी मां के कारोबार में फाइनेंस और मार्केटिंग का काम संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मां की आर्थिक तरक्की में सरकार की योजनाओं और जीविका की महत्वपूर्ण भूमिका है। यश राज जैसे कई बेटे अपनी मां की सफलता और तरक्की की सराहना कर रहे हैं। जीविका के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की पहल ने बिहार में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश की है।
जीविका से जुड़ी बिहार की महिलाएं अब अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर सपनों को हकीकत में बदल रही हैं। कभी घर की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज छोटे-छोटे कारोबार को आगे बढ़ाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर आगे बढ़ रही हैं। आसान भाषा में कहें तो ‘लखपति दीदी’ वह महिला है, जो स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी है और उसके परिवार की सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये है। यानी उसकी औसत मासिक आय करीब 10,000 रुपये या उससे अधिक है। बता दें कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पिछले हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि बिहार में 1.81 करोड़ महिलाएं जीविका से जुड़ी हैं, जिनमें 70 लाख से अधिक जीविका दीदियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इनमें 43 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। अगले दो वर्षों में एक लाख और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है। सुनिए क्या कह रही हैं लखपति जीविका दीदी…
मेरे पति पहले से ही कैरम बोर्ड बनाने के काम में जुटे हुए थे। जीविका से जुड़ने के बाद हमने इसे अपना व्यवसाय बना लिया। हम दोनों पति-पत्नी मिलकर कैरम बोर्ड बनाते हैं और पूरे बिहार में इसकी बिक्री करते हैं। वाकई, जीविका ने हमारी जिंदगी बदल दी है।
किरण कुमारी
जीविका दीदी, वैशाली
मैं 2015 में जीविका से जुड़ी थी। मैंने सिर्फ ₹5,000 से लकड़ी का व्यवसाय शुरू किया। लकड़ी का सामान बनाकर बेचती थी। इसी बीच जीविका से लोन लेकर फाइबर का काम भी शुरू किया। अब मेरे पास आधुनिक मशीनें हैं और कई लोग मेरे साथ काम करते हैं। मेरा बेटा भी मेरे साथ काम करता है।
मंजू दीदी
जीविका दीदी, जमुई
मैंने 1 लाख रुपया का लोन लेकर नर्सरी का काम शुरू किया था। शुरुआत में 45,000 पौधे देने के बाद मुझे 4.50 लाख रुपया का फायदा हुआ था। मेरी मेहनत और आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि आज मेरा पूरा परिवार बेहतर जिंदगी जी रहा है।
गीता दीदी
जीविका दीदी, गया





