गली के सितारे 28 : घर की पार्किंग से लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड तक, यास्तिका बनीं यहां शतक लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर

Mukhiyajee Reporter | Rajesh Thakur

पिता ने कोविड लॉकडाउन के दौरान घर की पार्किंग में नेट लगवाया, ताकि बेटी का अभ्यास नहीं रुके। छह साल बाद उसी बेटी ने क्रिकेट के ‘मक्का’ कहे जाने वाले लॉर्ड्स में ऐसा इतिहास रच दिया, जिसे दुनिया की कोई महिला क्रिकेटर 142 वर्षों में नहीं कर सकी थी। भारतीय महिला टीम की विकेटकीपर व बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में 113 रन की शानदार पारी खेलकर इस ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बनने का गौरव हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक शतक नहीं, बल्कि सपनों, संघर्ष और परिवार के भरोसे की जीत की कहानी है। गुजरात के वडोदरा की रहने वाली यास्तिका की क्रिकेट यात्रा बताती है कि प्रतिभा को सही दिशा और परिवार का साथ मिल जाए तो छोटे-छोटे अभ्यास स्थल भी इतिहास की सीढ़ियां बन जाते हैं। इंजीनियर पिता की दूरदृष्टि, मां का विश्वास और बहन का खेल से जुड़ाव; इन तीनों ने मिलकर भारतीय महिला क्रिकेट को एक ऐसा सितारा दिया, जिसकी चमक अब दुनिया देख रही है।

यास्तिका भाटिया : 5 पॉइंट्स में सबकुछ जानिए

पिता ने पहचानी प्रतिभा, पार्किंग को बना दिया अभ्यास का मैदान : यास्तिका के पिता हरीश भाटिया कार्यकारी इंजीनियर हैं। कोरोना लॉकडाउन में जब मैदान बंद थे, तब उन्होंने घर की पार्किंग में नेट तैयार कराया और खुद अभ्यास में सहयोगी बने। मां गरिमा (जिग्ना) भाटिया ने पढ़ाई और खेल में संतुलन बनाए रखने के लिए हमेशा प्रेरित किया। इसी तरह बड़ी बहन पेशे से चिकित्सक डॉ जोसिता भाटिया ने भी इसके आगे बढ़ने में अहम रोल निभाया। दरअसल, यास्तिका की बड़ी बहन डॉ जोसिता भी क्षेत्रीय स्तर की क्रिकेटर रह चुकी हैं।

लॉर्ड्स में ऐसा कारनामा, जो 142 साल में कोई महिला नहीं कर सकी : इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट की दूसरी पारी में यास्तिका ने 158 गेंदों पर 113 रन बनाकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। वह लॉर्ड्स में टेस्ट शतक लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बनीं। उनका नाम अब इस ऐतिहासिक मैदान के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हो गया है। वह सौरव गांगुली के बाद लॉर्ड्स में टेस्ट शतक बनाने वाली दूसरी भारतीय बाएं हाथ की बल्लेबाज भी हैं। बता दें कि यहां यह उनकी चौथे मैच की छठी पारी है। इसके पहले उन्होंने पांचों पारी मिलाकर कुल 98 रन बनायी थीं। 25 साल की यस्तिका की पारी में 14 चौके शामिल थे। इसके दम पर यस्तिका ने टीम को दूसरी पारी में 300 रन के करीब पहुंचाया। इस मैच की पहली पारी में वो सिर्फ 12 रन बना सकी थीं।

पांच साल में टीम इंडिया की भरोसेमंद खिलाड़ी बनीं : साल 2021 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाली यास्तिका ने बहुत कम समय में भारतीय टीम में अपनी मजबूत जगह बना ली। वह 2022 के महिला वनडे विश्व कप और 2026 के महिला टी-20 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। बड़े मैचों में दबाव झेलने की उनकी क्षमता उन्हें अलग पहचान दिलाती है।

विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी, दोनों में टीम की ताकत : बाएं हाथ की बल्लेबाज यास्तिका परिस्थितियों के अनुसार शीर्ष क्रम से लेकर मध्यक्रम तक किसी भी स्थान पर बल्लेबाजी कर सकती हैं। विकेट के पीछे उनकी फुर्ती और बल्लेबाजी में धैर्य उन्हें भारतीय महिला टीम की सबसे उपयोगी खिलाड़ियों में शामिल करता है। यही वजह है कि टीम प्रबंधन उन्हें अलग-अलग भूमिकाओं में आजमाने से नहीं हिचकता।

बड़ौदा से WPL तक, चोट को हराकर की दमदार वापसी : घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा का प्रतिनिधित्व करने वाली यास्तिका महिला प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस और बाद में गुजरात जायंट्स का हिस्सा रह चुकी हैं। एसीएल सर्जरी के कारण वह 2026 का डब्ल्यूपीएल नहीं खेल सकीं, लेकिन फिट होकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटते ही लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक जड़कर उन्होंने साबित कर दिया कि बड़े खिलाड़ी मुश्किलों से नहीं, अपनी वापसी से पहचाने जाते हैं।

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