Rajesh Thakur | Mukhiyajee Reporter
बिहार विधानसभा के लाऊंज में आज दो दोस्तों का मिलन हुआ। वर्तमान में दोनों सियासत की दो धाराओं में हैं, लेकिन दोस्ती आज भी बरकरार है। एक हैं बेलहर से चार बार विधायक रहे रामदेव यादव तो दूसरा हैं समाजवादी नेता और वर्तमान में जदयू के अनिल कुमार सिंह। दोनों ही नेता 74 आंदोलन से जुड़े हैं और स्टूडेंट्स लाइफ में भी दोनों साथ रहे हैं। यह अलग बात है कि दोनों एक साथ पढ़े नहीं हैं, लेकिन दोस्ती तो छात्र जीवन से ही है। इस मिलन के मौके पर दोनों दोस्त यादों के सागर में डूबते-उपलाते रहे। पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद से लेकर आंदोलन-सियासत सब पर चर्चा हुई। नीतीश, लालू, सम्राट चौधरी से लेकर मधुलिमये, जाबिर हुसैन तक पर बातें हो रही थी।
दरअसल, अनिल सिंह के पिता कृति नारायण सिंह भागलपुर में शिक्षक थे, साथ ही शिक्षक संघ के नेता भी थे। बांका के बेलहर निवासी रामदेव यादव उस समय भागलपुर में ही पढ़ते थे। अनिल सिंह ने मुखियाजी डॉट कॉम के संपादक को बताया कि हम तो मुंगेर में पढ़ते थे, लेकिन पिताजी की नौकरी की वजह से हमारा भागलपुर में बराबर रहना होता था। इसी दौरान हम दोनों में गहरी दोस्ती हो गयी। पिताजी भी दोनों को एक साथ बैठाकर समझाते थे और दोस्ती का मतलब भी बताते थे। वहीं, पूर्व विधायक रामदेव यादव ने बताया कि स्टूडेंट्स लाइफ की दोस्ती की जगह कोई नहीं ले सकता है। भले ही सियासत के रास्ते अलग हों, लेकिन दोनों की विचारधारा एक है और वह है समाजवादी विचारधारा।
बहरहाल, बांका के चटमा निवासी अनिल कुमार सिंह 1974 से ही सत्ता के दिग्गज लोगों के बीच रहे हैं। ये पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सहित कर्पूरी ठाकुर, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद, रामसुंदर दास आदि नेताओं से व्यक्तिगत मिले हुए हैं। यहां तक कि अनिल सिंह 9 बार विधानसभा का चुनाव भी लड़े, लेकिन कहा जाता है कि किस्मत भी कुछ चीज होती है, जिसकी वजह से ये सदन नहीं पहुंच सके। वहीं बांका के ही धनजोड़मा निवासी रामदेव यादव किस्मत के धनी निकले। वे 1990 में राजद के टिकट पर बेलहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीत गये। इतना ही नहीं, वे 2005 तक चुनाव जीतते रहे। इस तरह, वे चार बार विधायक बने और आज भी वे राजद में हैं।







