अंबानी के ‘झारखंडी जाल’ में उलझी कांग्रेस, राहुल को कहीं का नहीं छोड़ा ये विधायक

Mukhiyajee Reporter | Patna

झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए बेहद हाई-प्रोफाइल मुकाबले में बड़ा उलटफेर हुआ है। भाजपा और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जादुई आंकड़ा छूते हुए राज्यसभा चुनाव जीत लिया है। एनडीए समर्थित निर्दलीय परिमल नथवानी ने 28 वोट पाकर जीत दर्ज की। वह चौथी बार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को 19 वोट मिले। वहीं 3 वोट को अमान्य घोषित किया गया है। इस चुनाव भी महागठबंधन की रणनीति फेल हो गयी है। वहीं एक सीट पर जेएमएम के बैद्यानाथ राम जीते हैं। उनको 30 मत मिले।

इंडिया ब्लॉक के पास झारखंड विधानसभा में स्पष्ट संख्या बल 56 विधायक होने के बावजूद क्रॉस-वोटिंग हुई और कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार प्रणव झा को धरती पकड़वा दिया। वैसे इसकी आशंका पहले से लगायी जा रही थी। दो दिन पहले ही भाजपा ने एकजुट रखने के लिए अपने विधायकों को होटल मे निगहवानी के साथ शिफ्ट करा दिया था। शायद भाजपा को खुद अपने विधायकों पर एतबार नही रहा होगा तभी तो वैसे कदम से गुजरना पड़ा। भाजपा खेमे से आ रही जानकारी के अनुसार निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी को जीत के लिए जरूरी प्रथम वरीयता के पूरे 28 वोट मिले हैं। दूसरी तरफ सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक के बहुमत के दावों के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को करारा झटका लगा है। प्रणव झा को महज 19 वोटों से ही संतोष करना पड़ा है। इस चुनाव में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब वोटिंग के दौरान 3 वोटों को अमान्य घोषित कर दिया गया। जिसने पूरे सियासी समीकरण को पलट कर रख दिया। परिमल नथवानी की इस जीत के साथ ही झारखंड की सियासी जमीन पर भाजपा समर्थित रणनीति एक बार फिर कामयाब साबित हुई है, जबकि सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस को अपनी सीट गंवानी पड़ी है।

एनडीए और इंडिया ब्लॉक दोनों को क्रॉस वोटिंग का डर पहले से सत्ता रहा था। तभी तो दोनों गुट अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। एनडीए विधायकों को बीते मंगलवार को ही रांची के एक होटल में स्थानांतरित कर दिया गया था, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन ‘इंडिया’ क्रॉस-वोटिंग की आशंकाओं को खत्म करने के लिए अपने विधायकों के साथ बैठकें करने में व्यस्त रहा। भाजपा विधायक बस से रांची में राज्य विधानसभा स्थित मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचे थे। मतदान से पहले अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों खेमों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। बावजूद परिणाम बिपरीत स्वरूप में सामने आया है। राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा पहुंचे कांग्रेस विधायक जयमंगल सिंह की एक सुरक्षा अधिकारी से तीखी बहस हो गयी। बेरमो के कांग्रेस विधायक जयमंगल सिंह की सुरक्षा अधिकारी के साथ हुई तीखी बहस का वीडियो भी सामने आया, जिसमें कांग्रेस विधायक यह कहते दिख रहे हैं कि अभी अरेस्ट करवा दूंगा, पहचानता नहीं है मुझको।

भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 24 विधायक हैं, जो संसद के उच्च सदन में एक सीट सुरक्षित करने के लिए 81 सदस्यीय विधानसभा में आवश्यक न्यूनतम 28 प्रथम-वरीयता मतों से चार कम है। एनडीए के 24 विधायकों में भाजपा के 21 और लोजपा (रामविलास), आजसू और जदयू के एक-एक विधायक शामिल हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का एक विधायक है। झामुमो और कांग्रेस सहित सत्तारूढ़ गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के सदन में 56 सदस्य हैं। झामुमो के 34 सदस्य हैं। ‘इंडिया’ अन्य घटक दलों में कांग्रेस के पास 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पास चार और भाकपा (माले) लिबरेशन के पास दो विधायक हैं। झारखंड राज्यसभा चुनाव में मतदान को लेकर चल रही अटकलों के संबंध में भाकपा (माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि हम पूरी जिम्मेदारी के साथ आश्वस्त कर सकते हैं कि हमारे दोनों विधायकों ने योजना के अनुसार कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है। वाम फ्रंट के दो वरिष्ठ नेता पीबीएम कॉमरेड हलधर महतो और सीसीएम कॉमरेड गीता मंडल ने सीपीआईएमएल के विधायकों कॉमरेड अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो द्वारा डाले गए वोटों का विधिवत सत्यापन किया।

बहरहाल, परिमल नथवाणी, मुकेश अंबानी के बेहद खास और दशकों पुराने आदमी हैं। धीरूभाई अंबानी के समय से ही ये रिलायंस समूह से जुड़े हुए हैं। परिमल नथवाणी रिलायंस इंडस्ट्रीज में कॉरपोरेट अफेयर्स के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। ये सिर्फ रिलायंस के सिर्फ कॉरपोरेट एग्जीक्यूटिव ही नहीं हैं, बल्कि अंबानी के सबसे बड़े लॉबिस्ट भी हैं। वे आंध्रप्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में राज्यसभा सांसद हैं। यह कार्यकाल जून 2020 में शुरू हुआ था। इसके पूर्व वे झारखंड से 2008 से 2020 तक दो बार निर्दलीय सांसद के रूप में राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इस बार झारखंड राज्यसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चौथी बार फिर शानदार जीत दर्ज की है। (यह आलेख वरीय पत्रकार कमलाकांत पांडेय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अक्षरशः लिया गया है। लेखक की बिहार और झारखंड की राजनीति पर अच्छी पकड़ है। इस आलेख में उनके निजी विचार हैं।)