Mukhiyajee Reporter | Patna
राज्य सरकार के स्तर से पटना समेत 11 शहरों के पास घोषित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए चिन्हित की गयी जमीन पर लगी खरीद-बिक्री की रोक हटा दी गयी है। ग्रीनफील्ड सैटनेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री की छूट देने से संबंधित प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में कुल 29 एजेंडों पर मुहर लगी। इसमें लिए गए निर्णयों के बारे में विस्तृत जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन स्थित सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि इन सैटेलाइट टाउनशिप की जद में जिनकी जमीन आयी है, अब वे बिहार राज्य आवास बोर्ड को अपनी जमीन बेच सकते हैं। यह जमीन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के स्तर से अधिसूचित बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के अंतर्गत बिक्री की जा सकेगी। साथ ही राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद के स्तर से अनुमोदित निवेश परियोजनाओं के लिए संबंधित निवेशक को जमीन की खरीद-बिक्री करने की अनुमति प्रदान करने की भी स्वीकृति दी गयी है। इस प्रावधान से भू-स्वामी की तत्कालिक वित्तीय आवश्यकताएं पूरी की जा सकेगी और सरकारी प्राधिकार अपनी योजनाओं के लिए भूमि का प्रबंध भी कर सकेगी। राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद के स्तर से अनुमोदित निवेश परियोजनाओं के लिए भी जमीन का प्रबंध हो सकेगा।
राज्य के 500 स्थानों पर लगेगा आईटीएमएस : अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि राज्य में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने और सड़क दुर्घटनाओं को 22 फीसदी तक कम करने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) मॉडल को लागू किया जाएगा। पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर पहले चरण में राज्य के 200 और दूसरे चरण में 300 स्थानों पर इस विशेष प्रणाली को लागू किया जाएगा। इस तरह राज्य में 500 स्थानों पर दो चरणों में इस नई प्रणाली को लागू करने की योजना है। इसके क्रियान्वयन पर आगामी 10 वर्षों (2026-27 से 2037-38) में 622 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। आईटीएमएस की मदद से वाहनों का ऑटोमेटिक चालान कटने से लेकर ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों या किसी संदिग्ध वाहनों की पहचान करने तक की व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसमें लगाए जाने वाले अत्याधुनिक कैमरों की मदद से किसी वाहन के नंबर प्लेट से पूरी जानकारी एकत्र की जा सकती है। ऐसी कई अन्य सुविधाएं इस प्रणाली में मौजूद है।
सभी कार्य विभाग के लिपिकों का होगा एक संवर्ग : कैबिनेट ने एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगायी, जिसके तहत राज्य के सभी कार्य विभागों के लिपिकों का अब एक संवर्ग होगा। इसमें पथ निर्माण विभाग, पीएचईडी, भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, योजना एवं विकास विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग के सामान्य लिपिकीय संवर्ग के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया और उनकी सेवा शर्तों के आधार पर कार्य विभाग क्षेत्रीय सामान्य लिपिकीय संवर्ग (भर्ती एवं सेवा शर्ते) नियमावली, 2026 के गठन की स्वीकृति दी गयी है। इसके अलावा पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत मूल कोटि के पद (शोध सहायक) पर चयन परीक्षा बीपीएससी के स्थान पर बिहार तकनीकी सेवा आयोग के स्तर से ली जाएगी। बिहार नागरिक सुरक्षा क्षेत्रीय आशुलिपिक संवर्ग नियमावली, 2026 के गठन की मंजूरी दी गई है। इसमें आशुलिपिक के पद पर सीधी भर्ती के लिए निर्धारित न्यूनतम उम्र सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी है। साथ ही प्रोवेशन समयावधि को भी कम करके 2 के बदले 1 वर्ष कर दी गयी है। इसके लिए अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता इंटरमीडिएट होनी चाहिए। इसके अलावा बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति नियमावली, 2023 के तहत ओलंपिक खेलों में शामिल किसी भी विधा में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी तथा क्रिकेट खेल विधा के किसी भी प्रारूप में भारतीय का प्रतिनिधित्व करने वाले तथा एशियाई गेम्स या राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक विजेता प्रतिभावान या उत्कृष्ट खिलाड़ियों को वेतन स्तर-09 में नियुक्ति की जाएगी। एशियन गेम्स या कॉमनवेल्थ गेम्स में शामिल खेल विधा के किसी प्रारूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले तथा रजत या कांस्य पदक खिलाड़ी विजेता खिलाड़ियों को वेतन स्तर-07 और नेशनल गेम्स या सीनियर नेशनल चैम्पियनशीप के किसी स्वर्ण या रजत पदक विजेता खिलाड़ी को वेतन स्तर 06 में नियुक्ति की जाएगी।
एक्सप्रेसवे के लिए कैमूर के पास होगा जमीन अधिग्रहण : वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के पास कैमूर के नजदीक कैमूर जिला के चांद और चैनपुर अंचल के विभिन्न मौजों में कुल 781.18 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए 230 करोड़ 64 लाख रुपये खर्च का प्रावधान रखा गया है। सहरसा जिला के कहरा अंचल के वनगांव, देवनागोपाल तथा बलहर अराजी मौजा में बनने वाले औद्योगिक क्षेत्र के रकवा में परिवर्तन किया गया है।
5 प्रमुख नदियों का होगा पुनर्भरण अध्ययन : अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य की प्रमुख 5 नदियों सोन, कियूल, फल्गू, मोरहर और चानन का पुनर्भरण अध्ययन किया जाएगा। इन नदियों में बालू के जमा होने के स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। यह कार्य सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीच्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआई) से कराया जाएगा, जिस पर दो करोड़ 32 लाख रुपये का खर्च आएगा।
सरकार कराएगी बिहार के नागरिकों का सिंधु दर्शन : राज्य सरकार बिहार के नागरिकों को सिंधु दर्शन कराएगी। इसके लिए एक विशेष योजना तैयार की गयी है। कैबिनेट से इस पर मंजूरी मिल गयी है। इसके तहत 18 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोग इसका लाभ उठा सकते हैं। प्रत्येक वर्ष अधिकतम 100 लोगों को यह यात्रा कराई जाएगी। राज्य के मूल निवासियों को तीर्थ यात्रा पूर्ण करने के बाद यात्रा व्यय की 50 फीसदी राशि या अधिकतम 20 हजार रुपये प्रति तीर्थ यात्री की दर से प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में दिया जाएगा। राज्य के पर्य़टकीय स्थलों का भ्रमण हेलिकॉप्टर से कर सकते हैं। मुख्यमंत्री बिहार हेली टूरिज्म सेवा योजना 2026 की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसके तहत पहले चरण में वाल्मीकिनगर (पश्चिमी चंपारण), मां मुंडेश्वरी मंदिर (कैमूर) तथा राजगीर (नालंदा) को शामिल किया गया है। वाल्मीकिनगर के लिए राजकीय वायुयान तथा कैमूर एवं राजगीर के लिए किराये पर प्राप्त 6+2 सीटर श्रेणी के हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाएगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए पर्यटकों को पर्यटन पैकेज का चयन किया जाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा पटना शहर का स्काईलाइन का हवाई दृश्य उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक शनिवार और रविवार को हेलीकॉप्टर जॉय राइड का संचालन किया जाएगा। इसी दर प्रति सीट 2100 रुपये निर्धारित की गयी है। इसके अलावा बिहार राज्य में पर्यटकों की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना की स्वीकृति दी गयी है। इसके अंतर्गत अधिकतम 8 कमरे तक के लिए होमस्टे में निबंधन कराया जा सकता है। वित्तीय प्रोत्साहन के तहत प्रति कमरा रुपये ढाई लाख की दर से अधिक 4 कमरों के लिए 10 लाख रुपये की कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी। महिला, एसएचजी, आवेदन के समय 18 से 25 वर्ष आयु के युवा या युवती उद्यमी के स्तर से संचालित होमस्टे को प्रोत्साहन के रूप में 25 हजार रुपये प्रति कमरे की दर से अतिरिक्त राशि दी जाएगी।







