Bengal Election 2026 : सूती में बिहार के BJP MLA मनोज शर्मा दे रहे धार; क्या कहता है TMC का सियासी समीकरण, बांग्ला में भी पढ़ें

Rajesh Thakur | Murshidabad

बंगाल चुनाव 2026 | बिहार फैक्टर सीरीज | मुखियाजी स्पेशल के तहत अब तक आपने यह पढ़ा कि किस तरह 50 से 60 सीटों पर ‘बिहार फैक्टर’ काम कर रहा है। हालांकि, हमने मेदिनीपुर जिले की केशपुर विधानसभा क्षेत्र का विश्लेषण लिखा, जहां हिंदी भाषी वोटरों की संख्या काफी कम है, लेकिन भाजपा बिहार को इस बार बंगाल चुनाव से सीधा कनेक्ट किये हुए है। यही वजह है कि भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी बिहार के वरीय नेता नितिन नवीन को दी है। वे लगातार पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा भी रहे हैं। वहीं केशपुर विश्लेषण में आपने पढ़ा कि बिहार के भाजपा विधान पार्षद जीवन कुमार वहां लगातार चुनाव प्रबंधन पर मंथन कर रहे हैं। अब इसी कड़ी में बात करते हैं मुर्शिदाबाद जिले के सूती विधानसभा क्षेत्र की। यहां बिहार से चुनाव प्रचार के लिए अरवल विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनोज शर्मा पहुंचे हुए हैं और पिछले तीन दिनों से लगातार वोटरों को मोटिवेट करने में लगे हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में भी हिंदी वोटरों की संख्या बहुत अधिक नहीं है।

सूती विस क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार करते बिहार से अरवल के विधायक मनोज शर्मा व अन्य।

सूती विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक चरित्र : दरअसल, मुर्शिदाबाद जिले का सूती विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक चरित्र पारंपरिक रूप से अलग रहा है। यह इलाका लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के प्रभाव में रहा है। यहां मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है। 74 वर्षों में इस सीट से केवल मुस्लिम विधायक ही चुनाव जीते हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में भारतीय जनता पार्टी ने यहां अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की है और संगठनात्मक विस्तार पर खास ध्यान दिया है। सूती विधानसभा क्षेत्र में हिंदीभाषी और प्रवासी मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक नहीं मानी जाती, लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। अनुमानतः यहां 3 से 7 प्रतिशत के बीच हिंदीभाषी वोटर मौजूद हैं, जिनमें बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़े परिवार शामिल हैं। यह वर्ग मुख्यतः मजदूरी, छोटे व्यापार और सेवा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। संख्या सीमित होने के बावजूद कड़े मुकाबले की स्थिति में यह वोट बैंक असर डाल सकता है। यही वजह है कि मनोज शर्मा जैसे नेताओं की सक्रियता को भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी इस वर्ग को जोड़कर व्यापक चुनावी संदेश देने की कोशिश कर रही है, ताकि इसका असर आसपास की सीटों पर भी पड़े।

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती : सियासी पंडितों की मानें तो सूती सीट पर भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस की मजबूत जमीनी पकड़ और पारंपरिक वोट बैंक है। संगठनात्मक सक्रियता और बाहरी नेताओं की मौजूदगी से माहौल जरूर बनता दिख रहा है, लेकिन इसे वोट में तब्दील करना आसान नहीं होगा। स्पष्ट है कि सूती में मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि संगठन, सामाजिक समीकरण और रणनीति के बीच है। आने वाला समय तय करेगा कि भाजपा यहां नयी जमीन बना पाती है या तृणमूल अपना दबदबा कायम रखती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो सीमावर्ती और संवेदनशील मानी जाने वाले इस क्षेत्र पर भारतीय जनता पार्टी संगठन के दम पर नयी जमीन तलाशने में जुटी है। इसी के तहत बिहार के अरवल से विधायक मनोज शर्मा इन दिनों सूती क्षेत्र में सक्रिय होकर चुनावी रणनीति को धार दे रहे हैं। उन्होंने रविवार को मंडल अध्यक्षों, शक्ति केंद्र प्रमुखों और बूथ अध्यक्षों के साथ आयोजित बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने पर जोर दिया। उन्होंने मुखियाजी डॉट कॉम को बताया कि भाजपा कार्यकर्ता पूर्ण बहुमत के संकल्प के साथ मैदान में हैं और संगठन की एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत है। इससे पहले मुर्शिदाबाद के जंगीपुर में भी एक अहम बैठक हुई, जिसमें आंध्र प्रदेश के संगठन महामंत्री एन मधुकर की मौजूदगी में जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा की गयी।

सूती विधानसभा क्षेत्र का ताना-बाना : सूती विधानसभा क्षेत्र का ताना-बाना देखें तो यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण और सीमावर्ती इलाका है, जहां खेती, छोटे कारोबार और श्रमिक वर्ग की बड़ी आबादी है। यहां चुनावी मुद्दे भी स्थानीय स्तर पर केंद्रित रहते हैं। रोजगार, आधारभूत सुविधाएं, सीमावर्ती सुरक्षा और विकास प्रमुख विषय हैं। भाजपा जहां संगठन और राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर मैदान में है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी योजनाओं और स्थानीय पकड़ के सहारे चुनावी बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। सुति विधानसभा क्षेत्र में पहले चरण में इसी माह 23 अप्रैल को वोटिंग है और 4 मई को क्लियर हो जाएगा कि ममता सरकार रहेगी या जाएगी। सियासी पंडितों की मानें तो यहां भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। 2021 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (AITC) के उम्मीदवार इमानी बिस्वास ने 127351 वोट हासिल कर जीत हासिल की थी। उन्होंने BJP प्रत्याशी कौशिक दास को हराया, जिनके हिस्से 56650 वोट आए। इसके पहले 2011 में इमानी बिस्वास कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। लेकिन, 2016 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद इमानी बिस्वास कांग्रेस के हुमायूं रेजा से महज 3950 वोटों से करीबी मुकाबले में हार गए थे। 2021 में बिस्वास जहां बड़े मार्जिन से चुनाव जीते थे, वहीं भाजपा भी जबरदस्त ढंग से परफॉरमेंस कर दूसरे नंबर पर आ गयी थी, जबकि लेफ्ट फ्रंट के सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के रेजा तीसरे नंबर पर खिसक गए थे।

भाजपा ने बदल दिया उम्मीदवार : बहरहाल, सूती सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने अपने मौजूदा विधायक इमानी बिस्वास पर फिर से भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने उम्मीदवार बदलते हुए महावीर घोष को चुनाव मैदान में उतारा है। आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस को यहां से आठ बार जीत मिली है, जबकि लेफ्ल फ्रंट की मजबूत विंग रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) को छह बार जीत हासिल हुई है। इसी तरह, दो बार निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहे हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस सिर्फ एक बार जीत दर्ज की है। जहां तक इस चुनाव की बात है तो इस बार भी तृणमूल पूरे दमखम के साथ मैदान में है। वहीं, भाजपा मुस्लिम वोटों में बड़े बंटवारे की रणनीति पर काम कर रही है। खास बात कि पिछले दो चुनावों के आंकड़े साफ बताते हैं कि सूती में तृणमूल की पकड़ मजबूत रही है, लेकिन भाजपा का ग्राफ भी लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। बंगाल चुनाव 2026 की ऐसी ही विश्लेषणात्मक खबरों के लिए बिहार फैक्टर सीरीज से जुड़े रहें और मुखियाजी डॉट कॉम की स्पेशल स्टोरी पढ़ते रहें। और हां, पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से जुड़ी कोई जानकारी देनी हो तो 9507777555 पर व्हाट्सअप करें। © Mukhiyajee | मुखियाजी

पश्चिम बंगाल के बांग्लाभाषी वोटरों के लिए बांग्ला में प्रस्तुत है पूरी खबर

বেঙ্গল নির্বাচন ২০২৬ | বিহার ফ্যাক্টর সিরিজ | মুখিয়াজী স্পেশাল-এর অধীনে এখন পর্যন্ত আপনি পড়েছেন, কীভাবে ৫০ থেকে ৬০টি আসনে ‘বিহার ফ্যাক্টর’ কাজ করছে। যদিও আমরা মেদিনীপুর জেলার কেশপুর বিধানসভা এলাকার বিশ্লেষণ লিখেছি, যেখানে হিন্দিভাষী ভোটারের সংখ্যা যথেষ্ট কম, কিন্তু বিজেপি এইবার বিহারকে সরাসরি বেঙ্গল নির্বাচনের সঙ্গে যুক্ত করেছে। এই কারণেই বিজেপি তাদের জাতীয় সভাপতির দায়িত্ব বিহারের বরিষ্ঠ নেতা Nitin Nabin-কে দিয়েছে। তিনি নিয়মিত পশ্চিমবঙ্গ সফরে যাচ্ছেন। একই সঙ্গে কেশপুর বিশ্লেষণে আপনি পড়েছেন, কীভাবে বিহারের বিজেপি বিধান পরিষদ সদস্য Jeevan Kumar সেখানে ধারাবাহিকভাবে নির্বাচন ব্যবস্থাপনা নিয়ে কাজ করছেন। এখন সেই ধারাবাহিকতায় কথা বলি মুর্শিদাবাদ জেলার সুঁতি বিধানসভা এলাকার। এখানে বিহার থেকে নির্বাচনী প্রচারের জন্য অরওয়াল বিধানসভা এলাকার বিধায়ক Manoj Sharma পৌঁছেছেন এবং গত তিন দিন ধরে ধারাবাহিকভাবে ভোটারদের মোটিভেট করার কাজে লেগে আছেন। যদিও এই এলাকাতেও হিন্দি ভোটারের সংখ্যা খুব বেশি নয়।
আসলে, মুর্শিদাবাদ জেলার সুঁতি বিধানসভা এলাকার রাজনৈতিক চরিত্র ঐতিহ্যগতভাবে আলাদা। এই এলাকা দীর্ঘদিন ধরে All India Trinamool Congress এবং অন্যান্য আঞ্চলিক দলের প্রভাবে রয়েছে। এখানে মুসলিম ভোটারের উল্লেখযোগ্য সংখ্যা রয়েছে। গত ৭৪ বছরে এই আসন থেকে শুধুমাত্র মুসলিম বিধায়করাই জয়ী হয়েছেন। তবে সাম্প্রতিক বছরে Bharatiya Janata Party এখানে নিজেদের উপস্থিতি বাড়ানোর চেষ্টা করেছে এবং সংগঠনগত বিস্তারে বিশেষ জোর দিয়েছে। সুঁতি বিধানসভা এলাকায় হিন্দিভাষী ও প্রবাসী ভোটারের সংখ্যা খুব বেশি নয় বলে মনে করা হয়, তবে একে পুরোপুরি উপেক্ষা করা যায় না। অনুমান করা হয়, এখানে ৩ থেকে ৭ শতাংশের মধ্যে হিন্দিভাষী ভোটার রয়েছে, যাদের মধ্যে বিহার ও পূর্ব উত্তরপ্রদেশের সঙ্গে যুক্ত পরিবার রয়েছে। এই শ্রেণি মূলত শ্রম, ছোট ব্যবসা এবং পরিষেবা ক্ষেত্রে যুক্ত। সংখ্যা সীমিত হওয়া সত্ত্বেও, কড়া প্রতিদ্বন্দ্বিতার পরিস্থিতিতে এই ভোটব্যাঙ্ক প্রভাব ফেলতে পারে। এই কারণেই Manoj Sharma-এর মতো নেতাদের সক্রিয়তাকে বিজেপির কৌশলের অংশ হিসেবে দেখা হচ্ছে। দল এই শ্রেণিকে যুক্ত করে বৃহত্তর রাজনৈতিক বার্তা দেওয়ার চেষ্টা করছে, যাতে এর প্রভাব আশেপাশের বিধানসভা এলাকাতেও পড়ে।
রাজনৈতিক বিশ্লেষকদের মতে, সুঁতি আসনে বিজেপির জন্য সবচেয়ে বড় চ্যালেঞ্জ হল All India Trinamool Congress-এর শক্তিশালী মাটির সংগঠন এবং ঐতিহ্যবাহী ভোটব্যাঙ্ক। সংগঠনগত সক্রিয়তা এবং বাইরের নেতাদের উপস্থিতিতে পরিবেশ তৈরি হচ্ছে, কিন্তু সেটিকে ভোটে রূপান্তর করা সহজ হবে না।
স্পষ্ট যে সুঁতিতে লড়াই শুধুমাত্র প্রার্থীদের মধ্যে নয়, বরং সংগঠন, সামাজিক সমীকরণ এবং কৌশলের মধ্যে। আগামী সময়ই ঠিক করবে বিজেপি এখানে নতুন জমি তৈরি করতে পারে কি না, নাকি তৃণমূল তাদের দখল বজায় রাখবে। দলীয় সূত্রের মতে, সীমান্তবর্তী এবং সংবেদনশীল এই এলাকায় বিজেপি সংগঠনের জোরে নতুন জমি খুঁজছে। সেই লক্ষ্যেই বিহারের অরওয়াল থেকে বিধায়ক Manoj Sharma এই দিনগুলিতে সুঁতি এলাকায় সক্রিয় থেকে নির্বাচনী কৌশলকে আরও ধারালো করছেন। তিনি রবিবার মণ্ডল সভাপতি, শক্তি কেন্দ্র প্রধান এবং বুথ সভাপতিদের সঙ্গে বৈঠক করে সংগঠনকে বুথ স্তর পর্যন্ত শক্তিশালী করার এবং নির্বাচনী কৌশলকে মাঠে নামানোর ওপর জোর দিয়েছেন। তিনি মুখিয়াজী ডট কম-কে জানিয়েছেন যে বিজেপি কর্মীরা পূর্ণ সংখ্যাগরিষ্ঠতার সংকল্প নিয়ে মাঠে রয়েছে এবং সংগঠনের ঐক্যই তাদের সবচেয়ে বড় শক্তি। এর আগে মুর্শিদাবাদের জঙ্গিপুরে একটি গুরুত্বপূর্ণ বৈঠক অনুষ্ঠিত হয়, যেখানে অন্ধ্রপ্রদেশের সংগঠন মহামন্ত্রী N. Madhukar-এর উপস্থিতিতে জেলা স্তরের নেতাদের সঙ্গে নির্বাচনী প্রস্তুতি নিয়ে আলোচনা করা হয়েছে।
সুঁতি বিধানসভা এলাকার কাঠামো দেখলে বোঝা যায়, এটি মূলত একটি গ্রামীণ ও সীমান্তবর্তী এলাকা, যেখানে কৃষি, ছোট ব্যবসা এবং শ্রমজীবী মানুষের সংখ্যা বেশি। এখানে নির্বাচনী ইস্যুগুলিও স্থানীয় স্তরে কেন্দ্রীভূত। কর্মসংস্থান, মৌলিক পরিকাঠামো, সীমান্ত নিরাপত্তা এবং উন্নয়ন প্রধান বিষয়।
বিজেপি যেখানে সংগঠন এবং জাতীয়তাবাদের ইস্যু নিয়ে মাঠে রয়েছে, সেখানে All India Trinamool Congress তাদের প্রকল্প এবং স্থানীয় সংযোগের জোরে এগিয়ে থাকার চেষ্টা করছে। উল্লেখযোগ্য যে পশ্চিমবঙ্গে দুই দফায় বিধানসভা নির্বাচন হবে। সুঁতি বিধানসভা এলাকায় প্রথম দফায় ২৩ এপ্রিল ভোটগ্রহণ হবে এবং ৪ মে স্পষ্ট হয়ে যাবে যে মমতা সরকার থাকবে না যাবে। রাজনৈতিক বিশ্লেষকদের মতে, এখানে বিজেপি, তৃণমূল, বামফ্রন্ট এবং কংগ্রেসের মধ্যে কড়া লড়াই হবে। ২০২১ সালের বিধানসভা নির্বাচনে এই আসনে তৃণমূল কংগ্রেস (AITC)-এর প্রার্থী ইমানি বিশ্বাস ১,২৭,৩৫১ ভোট পেয়ে জয়ী হন। তিনি বিজেপির প্রার্থী কৌশিক দাসকে পরাজিত করেন, যিনি ৫৬,৬৫০ ভোট পান। এর আগে ২০১১ সালে ইমানি বিশ্বাস কংগ্রেসের টিকিটে জয়ী হন। কিন্তু ২০১৬ সালে তৃণমূল কংগ্রেসে যোগ দেওয়ার পর তিনি কংগ্রেসের হুমায়ুন রেজার কাছে মাত্র ৩,৯৫০ ভোটের ব্যবধানে হেরে যান। ২০২১ সালে যেখানে ইমানি বিশ্বাস বড় ব্যবধানে জয়ী হন, সেখানে বিজেপিও শক্তিশালী পারফরম্যান্স করে দ্বিতীয় স্থানে উঠে আসে, আর কংগ্রেস তৃতীয় স্থানে নেমে যায়।
বহরহাল, সুঁতি আসনে তৃণমূল কংগ্রেস তাদের বর্তমান বিধায়ক ইমানি বিশ্বাসের উপর আবারও আস্থা রেখেছে, অন্যদিকে বিজেপি প্রার্থী পরিবর্তন করে মহাবীর ঘোষকে নির্বাচনী ময়দানে নামিয়েছে। পরিসংখ্যান বলছে, এই আসনে কংগ্রেস ৮ বার জয়ী হয়েছে, আর বামফ্রন্টের শক্তিশালী শাখা রেভল্যুশনারি সোশ্যালিস্ট পার্টি (RSP) ৬ বার জয়ী হয়েছে। একইভাবে, ২ বার নির্দল প্রার্থীও জয়ী হয়েছে। তৃণমূল কংগ্রেস এখানে মাত্র ১ বার জয় পেয়েছে। এই নির্বাচনে তৃণমূল পূর্ণ শক্তি নিয়ে মাঠে রয়েছে, অন্যদিকে বিজেপি মুসলিম ভোটে বড় বিভাজনের কৌশল নিয়ে কাজ করছে। গত দুই নির্বাচনের পরিসংখ্যান স্পষ্ট করে যে সুঁতিতে তৃণমূলের দখল শক্তিশালী, তবে বিজেপির গ্রাফ ধারাবাহিকভাবে উপরের দিকে উঠছে। বেঙ্গল নির্বাচন ২০২৬-এর এমন বিশ্লেষণধর্মী খবর পড়তে ‘বিহার ফ্যাক্টর সিরিজ’-এর সঙ্গে যুক্ত থাকুন এবং মুখিয়াজী ডট কম-এর স্পেশাল স্টোরি পড়তে থাকুন। এবং হ্যাঁ, পশ্চিমবঙ্গ নির্বাচন ২০২৬ সংক্রান্ত কোনো তথ্য দিতে চাইলে 9507777555 নম্বরে WhatsApp করুন। © Mukhiyajee | মুখিয়াজী