Rajesh Thakur | Patna
बिहार विधानसभा में आज गुरुवार को शिक्षा मंत्री ने विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पर अपना वक्तव्य रखा। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों की सराहना की तथा अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। शिक्षा विभाग की ओर से किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी, साथ ही शिक्षक नियुक्ति के बारे में भी बताया। इसी बीच, विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा तथा शोर किया। इस पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने नसीहत देते हुए कहा कि आपलोग धैर्य से सुनें, सबकुछ बताएंगे। उनकी बातों को इग्नोर करते हुए विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के वक्तव्य का बहिष्कार कर दिया। तब विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि आपलोग आदत से लाचार हैं। दरअसल, किसी भी विभागीय बजट भाषण पर विपक्ष का बहिष्कार इन दिनों एक नयी परिपाटी बन गयी है।


मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 68 हजार 216 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि राज्य के कुल बजट का बड़ा हिस्सा है और इसका सीधा उद्देश्य विद्यालयों की गुणवत्ता, शिक्षक व्यवस्था और छात्र कल्याण योजनाओं को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने 1.20 लाख शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बांटकर एक मिसाल कायम की थी। उन्होंने विपक्ष के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि शिक्षकों के तनख्वाह में कोई विलंब नहीं होता है। कक्षा 1 से 12 तक के स्टूडेंट्स की छात्रवृति दोगुनी कर दी गयी है। साइकिल योजना गेम चेंजर साबित हुई। दो देशों ने तो इस योजना को अपने देश में लागू किया, यह हमारी सरकार की बड़ी उपलब्धि है। सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ के तहत हर प्रखंड में एक आदर्श विद्यालय खोलने की घोषणा की है। साथ ही चयनित पुराने शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना की भी रूपरेखा पेश की गयी।



2.53 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति : शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि अब तक दो लाख 27 हजार से अधिक विद्यालय अध्यापक, 28 हजार से अधिक प्रधान शिक्षक और लगभग 4 हजार 700 प्रधानाध्यापक नियुक्त किए जा चुके हैं। स्थानीय निकाय शिक्षकों को विशिष्ट शिक्षक का दर्जा देने की प्रक्रिया में दो लाख 53 हजार 961 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया गया है। सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष में लगभग छह लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है, ताकि कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरे। उन्होंने कहा कि बजट में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों का मानदेय 8 हजार से बढ़ाकर 16 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। रात्रि प्रहरियों का मानदेय 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये तथा मध्याह्न भोजन योजना के रसोइयों का मानदेय 1 हजार 650 रुपये से बढ़ाकर 3 हजार 300 रुपये कर दिया गया है।
93 लाख छात्रों को पोशाक राशि : उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में 93 लाख 12 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को एक हजार 47 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से दी गयी। इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्तीर्ण अविवाहित छात्राओं को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की योजना के तहत 4 लाख 67 हजार से अधिक छात्राओं को एक हजार 168 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की गयी। उन्होंने कहा कि पीएम पोषण योजना के तहत एक करोड़ 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस मद में हजारों करोड़ रुपये का व्यय किया गया है और आगामी वर्ष के लिए भी अलग से प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि विद्यालय भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण और जर्जर भवनों के जीर्णोद्धार के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। राज्य के 2 हजार 107 मध्य विद्यालयों और 627 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की सुविधा दी गई है। छात्रों की उपस्थिति अब टैबलेट के माध्यम से दर्ज की जा रही है।

बहरहाल, बिहार सरकार ने शिक्षा बजट में बड़े प्रावधान और व्यापक योजनाओं का खाका पेश किया है। नियुक्ति, प्रशिक्षण और अवसंरचना पर जोर साफ दिखता है। हालांकि, असली परीक्षा इन घोषणाओं को समय पर और प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारने की होगी। शिक्षा को लेकर सरकार के इस बड़े दावे पर अब विपक्ष की नजर भी रहेगी और जनता की अपेक्षाएं भी।




