Rajesh Thakur | Patna
बिहार विधान परिषद का सदन बुधवार को उस समय गरमा गया, जब राजद के एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने मंत्री अशोक चौधरी पर नकली डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल करने का आरोप लगा दिया। आरोप ऐसा था कि सदन में सियासी तापमान अचानक कई डिग्री बढ़ गया। सुनील कुमार सिंह ने कहा कि मंत्री ने फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी पायी है। इस पर अशोक चौधरी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सदन में दो टूक चुनौती दे डाली- ‘मेरी डिग्री को नकली साबित करें, नहीं तो विधान परिषद में आना बंद करें।’ इतना ही नहीं, उन्होंने आगे कहा कि यदि आरोप सही साबित हो जाए तो वे खुद जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं, अन्यथा आरोप लगाने वाले सदस्य को इस्तीफा देना चाहिए।


बहस यहीं नहीं थमी। संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि बिना दस्तावेज के इस तरह के आरोप लगाना संसदीय परंपरा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस प्रकार के आरोप को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। उनका कहना था कि किसी भी आरोप के साथ ठोस कागज पेश करना जरूरी है। दूसरी ओर, सुनील कुमार सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि एक अधिकारी ने रिश्वत की मांग से जुड़ा पत्र लिखा है और वे संबंधित दस्तावेज सदन के पटल पर रखेंगे। इसी बीच मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश का भी आरोप लगा। इस बीच अशोक चौधरी ने कहा कि सवाल का जवाब लेने के बजाय उन्हें ‘टारगेट’ किया जा रहा है।

आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिससे सदन का माहौल देर तक गरम रहा। एक तरफ ‘साबित करो’ की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ ‘दस्तावेज रखेंगे’ का दावा। कुल मिलाकर, आज विधान परिषद में सवाल कम और सियासी तकरार ज्यादा दिखी। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या आरोपों के समर्थन में दस्तावेज सामने आते हैं या यह बहस महज राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगी। फिलहाल, ‘डिग्री’ का मुद्दा सदन से निकलकर सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।





