PATNA । RAJESH THAKUR
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहली बार तारापुर से चुनाव लड़े और आजादी के बाद से अब तक के सबसे बड़े मार्जिन से जीतकर विधायक बने। वे न केवल दोबारा उपमुख्यमंत्री बने, बल्कि एनडीए के 20 वर्षों के कार्यकाल में पहली बार वे गृहमंत्री भी बने। इतना ही नहीं, तारापुर के इतिहास में पहली बार वहां भाजपा की एंट्री हुई। लेकिन सबसे बड़ी बात यह थी कि तारापुर से उनके चुनाव लड़ने की घोषणा पर यदि कोई सबसे अधिक खुश थे, तो वह थे उनके वयोवृद्ध पिता और सियासत के पितामह कहे जाने वाले शकुनी चौधरी। 7 बार विधायक और एक बार सांसद रहने वाले शकुनी चौधरी 4 जनवरी 2026 को 90 साल के हो गए। आज जन्मदिन पर पूरा बिहार ही नहीं, देश के बड़े दिग्गज भी बधाई दे रहे हैं। उनके स्वस्थ जीवन की कामना कर रहे हैं।


दरअसल, जब यह तय हुआ कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तारापुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे, तो उनके पिता शकुनी चौधरी के लिए यह पल केवल बेटे की राजनीतिक सफलता का नहीं, बल्कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन की विरासत को सही हाथों में जाते देखने का भावनात्मक अवसर था। बिहार के सियासी महकमे में पितामह के रूप में लोकप्रिय शख्सियत शकुनी चौधरी भले ही पिछले करीब 10 वर्षों से सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके हों, लेकिन उनकी राजनीतिक समझ और प्रभाव आज भी कायम है। खासकर पूर्व बिहार के भागलपुर जोन की राजनीति में उन्हें अब भी एक मार्गदर्शक और गार्जियन के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि तारापुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के समय लगभग हर दल के प्रत्याशी उनसे आशीर्वाद लेना नहीं भूलते हैं। आपको 2021 का उपचुनाव याद होगा, जब एनडीए के साथ ही महागठबंधन के प्रत्याशी भी उनका आशीर्वाद लेने उनके घर पर पहुंचे थे।

शकुनी चौधरी ने भले ही मंच और चुनावी शोर से खुद को अलग कर लिया हो, लेकिन उनकी पकड़ कभी कमजोर नहीं पड़ी। बेटे सम्राट चौधरी की राजनीति में उन्होंने अपने अनुभव के साथ ही संयम और मूल्यों की विरासत भी सौंपी। उनका मानना रहा कि राजनीति पद से नहीं, भरोसे से चलती है और यही सीख उन्होंने अपने जीवन में इन्हें दी। ऐसे में सम्राट चौधरी का तारापुर से चुनाव लड़ना उनके लिए एक राजनीतिक निर्णय था, लेकिन शकुनी चौधरी के लिए यह उस जमीन से जुड़ाव का प्रतीक था, जिसने उन्हें कई दशकों से पहचान दी और अपनी मेहनत से सींचा। चुनाव के दौरान उन्होंने मुखियाजी डॉट कॉम से अपने अनुभव भी साझा किये। उन्हें लगा कि सम्राट चौधरी नहीं वे एक बार फिर खुद चुनाव लड़ रहे हैं। बता दें कि जिस समय वे स्वास्थ्य मंत्री थे तो मैं हिंदुस्तान अखबार में हवेली खड़गपुर से रिपोर्टर था। तब तारापुर अनुमंडल नहीं बना था।
कोई एक दिन में शकुनी चौधरी नहीं बन सकता है। इसके लिए पूरी जिंदगी तपाना पड़ता है। तब जाकर सोना बनता है। इनका राजनीतिक और सामाजिक सफर कुछ ऐसा ही रहा है। यदि फ्लैशबैक जाएं तो पाते हैं कि अंग क्षेत्र के कद्दावर और लोकप्रिय नेता रहे शकुनी चौधरी का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और काफी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1985 में निर्दलीय विधायक के रूप में की और आगे चलकर बिहार सरकार में कई विभागों के मंत्री से लेकर विधानसभा उपाध्यक्ष तक का दायित्व निभाया। वे खगड़िया से एक बार सांसद भी चुने गए। लगभग 35 वर्षों तक सक्रिय राजनीति में रहने वाले शकुनी चौधरी ने वर्ष 2015 में सार्वजनिक रूप से राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की। इसके पहले वे 15 वर्षों तक सेना में सेवा दे चुके थे और पेशे से इंजीनियर भी रहे। उनके केंद्रीय राजनीति में जाने के बाद उनकी पत्नी पार्वती देवी तारापुर से विधायक बनी थीं। हालांकि, पार्वती देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनका लगभग साढ़े तीन वर्ष पूर्व निधन हो गया।

खास बात कि शकुनी चौधरी का सभी दलों के नेताओं से अच्छा संबंध रहा है, जो आज भी कायम है। दरअसल, इनका राजनीतिक सफर भले ही निर्दलीय विधायक के रूप में हुआ, लेकिन बाद में वे कांग्रेस में आए, समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और जदयू के गठन में भी उनकी अहम भूमिका रही। राजद और हम पार्टी में भी वे प्रभावशाली भूमिका में रहे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, दोनों से उनके संबंध सदैव सम्मानजनक रहे और आज भी दोनों उन्हें मान देते हैं। 4 जनवरी 1936 को तारापुर के लखनपुर गांव में जन्मे शकुनी चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं। 90 वर्ष की उम्र में भी उनकी ‘तूती’ इलाके में आज भी बोल रही है। 2025 के चुनाव में लोगों ने देखा भी। राजनीति से संन्यास के बाद भी उनका व्यक्तित्व, अनुभव और मार्गदर्शन के लिए नेता उनका आशीर्वाद पाना चाहते हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पिता के जन्मदिन पर आज इमोशनल मैसेज में लिखा भी है- ‘मेरे पूज्य पिताजी श्री शकुनी चौधरी जी के 90वें जन्मदिवस के पावन अवसर पर उन्हें अनंत शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद का आकांक्षी। पिताजी… आपका स्नेहिल आशीर्वाद, अनुशासन, त्याग और जीवन मूल्यों से भरा मार्गदर्शन ही हमारे लिए प्रेरणा का प्रकाशपुंज है। आपकी दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर कृपा हम सब पर बनी रहे, यही ईश्वर से प्रार्थना है…।’




